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राजस्थान के सीमावर्ती इलाकों में झोलाछाप डॉक्टरों का खेल, इलाज के नाम पर लोगों की जान से खिलवाड़

लोगों का कहना है कि कई मामलों में मेडिकल स्टोर या छोटी दुकानों से ही ये अवैध प्रैक्टिस चल रही है जहां बिना किसी योग्य चिकित्सक के मरीजों को चारपाई पर लेटा कर दवाइयां और इंजेक्शन लगाये जा रहे हैं.

राजस्थान के सीमावर्ती इलाकों में झोलाछाप डॉक्टरों का खेल, इलाज के नाम पर लोगों की जान से खिलवाड़
स्वास्थ्य विभाग की ओर से समय-समय पर कार्रवाई की जाती हैं.

Barmer News: बाड़मेर जिले के ग्रामीण और सीमावर्ती क्षेत्रों में अवैध हॉस्पिटलों और झोलाछाप डॉक्टरों का बोलबाला बढ़ता जा रहा है. इलाज के नाम पर ये फर्जी चिकित्सक ग्रामीणों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं जहां ड्रिप-इंजेक्शन लगाकर बिना योग्यता के उपचार किया जा रहा है. विभागीय आंकड़ों के अनुसार जिले में मात्र 71 निजी अस्पताल ही रजिस्टर्ड हैं लेकिन सैकड़ों की संख्या में अवैध क्लिनिक और हॉस्पिटल संचालित हो रहे हैं, जो खुलेआम मरीजों का ईलाज कर रहे हैं.इन अवैध क्लिनिकों ने पहले भी कई लोगों की जान ले चुके है.

बाड़मेर जिले के बामणोर व भूणिया सहित ग्रामीण क्षेत्रों में ये झोलाछाप डॉक्टर सरकारी स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी का फायदा उठाकर लोगों को अपनी ओर लुभा रहे हैं. कई मामलों में मेडिकल स्टोर या छोटी दुकानों से ही ये अवैध प्रैक्टिस चल रही है जहां बिना किसी योग्य चिकित्सक के मरीजों को चारपाई पर लेटा कर दवाइयां और इंजेक्शन लगाये जा रहे हैं.

क्या बोले मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी? 

स्वास्थ्य विभाग की ओर से समय-समय पर कार्रवाई की जाती हैं, लेकिन समस्या जस की तस बनी हुई है. बाड़मेर के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. विष्णु राम बिश्नोई ने बताया कि जिले में केवल 71 निजी अस्पताल रजिस्टर्ड हैं. झोलाछाप डॉक्टरों के खिलाफ कार्रवाई की जाती रहती है लेकिन अवैध क्लिनिकों पर प्रभावी कार्यवाही के लिए चिकित्सा विभाग के साथ जिला औषधि नियंत्रण अधिकारी सहित पुलिस प्रशासन की जरूरत पड़ती है.

कई जगह अवैध क्लिनिक सीज किये गए 

औषधि नियंत्रण अधिकारी के पास अन्य जिलों का भी प्रभार होने से बाड़मेर में कार्रवाई में देरी और समस्याएं आ रही हैं. उन्होंने कहा कि पहले भी सीमावर्ती इलाकों में कई अवैध अस्पतालों को सीज किया जा चुका है. हाल के महीनों में स्वास्थ्य विभाग ने कुछ जगहों पर छापेमारी की है. जैसे गडरा रोड क्षेत्र के सामीर का पार गांव में अवैध क्लिनिक सीज किया गया जहां बिना लाइसेंस प्रैक्टिस की जा रही थी

इसके बावजूद ग्रामीणों का कहना है कि समस्या अभी भी गंभीर बनी हुई है और सख्त एवं निरंतर कार्रवाई की जरूरत है. यह स्थिति ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं की कमी और जागरूकता की कमी को दर्शाती है जहां लोग मजबूरी में इन फर्जी डॉक्टरों के पास पहुंच रहे हैं. 

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