Jodhpur Division Railway News: पश्चिमी राजस्थान के जैसलमेर और बाड़मेर जैसे सीमावर्ती क्षेत्रों के रेल यात्रियों के लिए एक बड़ी और राहत भरी खबर है. उत्तर पश्चिम रेलवे के जोधपुर मंडल ने अपनी सबसे महत्वपूर्ण सुरक्षा परियोजना 'कवच 4.0' को धरातल पर उतारने का पूरा खाका तैयार कर लिया है . इसके लिए रेलवे प्रशासन मिशन मोड में काम कर रही है. जिसके तहत अगले 18 महीनों के अंदर रेल लाइन में फाइबर बिछाने और संचार उपकरणों को लगाने का काम पूरा किया जाएगा. .
79 करोड़ का बजट से स्वदेशी तकनीक से लैस होंगे ट्रैक
रेलवे ने इस अत्याधुनिक 'एंटी-कोलिजन' (टक्कर रोधी) स्वदेशी प्रणाली के विस्तार के लिए 79 करोड़ 17 लाख रुपये का भारी-भरकम बजट मंजूर किया है. यह पूरी तकनीक 'मेड इन इंडिया' है, जो न केवल विदेशी प्रणालियों से सस्ती है, बल्कि अधिक सटीक और विश्वसनीय भी है.
कैसे काम करेगा कवच 4.0?
जोधपुर मंडल के डीआरएम अनुराग त्रिपाठी ने बताया कि इस प्रणाली की सफलता 48 कोर की ऑप्टिकल फाइबर केबल (OFC) पर निर्भर है. यह तकनीक तीन प्रमुख तकनीकों के तामलमेल से चलेगी. जिसमें जीपीएस, रेडियो फ्रीक्वेंसी और फाइबर ऑप्टिक शामिल है. इनके तालमेल से खराब मौसम, घने कोहरे या भारी बारिश में भी कंट्रोल रूम और ट्रेन के बीच संपर्क कभी नहीं टूटेगा.
कवच 4.0 से ऐसे सुरक्षित बनेगा रेल सफर
कवच 4.0 केवल एक तकनीक नहीं, बल्कि रेल सफर में मानवीय भूलों को 'जीरो' करने का माध्यम है. इसकी कुछ प्रमुख विशेषताएं हैं जैसे यदि एक ही ट्रैक पर 5 किलोमीटर के दायरे में दो ट्रेनें आमने-सामने आ जाती हैं, तो सिस्टम खतरे को भांपकर खुद इमरजेंसी ब्रेक लगा देगा. यदि लोको पायलट गलती से लाल सिग्नल पार (SPAD) करने की कोशिश करेगा, तो ट्रेन तुरंत रुक जाएगी.
सर्दियों में जब कोहरा शून्य दृश्यता पैदा करता है, तब सिग्नल की स्थिति सीधे ड्राइवर के केबिन की स्क्रीन पर दिखाई देगी. रेलवे फाटकों के करीब पहुंचते ही ट्रेन यात्रियों और राहगीरों को सचेत करने के लिए खुद-ब-खुद हॉर्न बजाएगी.साथ ही ट्रेन के ओवर-स्पीड होने की स्थिति में सिस्टम उसे सुरक्षित गति पर वापस ले आएगा.
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