Rajasthan 12th Topper 2026: राजस्थान बोर्ड के 12वीं के रिजल्ट (Rajasthan 12th Result 2026) में 99.60 प्रतिशत नंबर के साथ प्रदेश में टॉप करने वाली लूणियावास की लाडली नव्या मीणा की कहानी बहुत ही प्रेरणादायक है. गरीब हालातों में पली बढ़ी इस होनहार बच्ची ने माता-पिता के साथ गांव का सिर ऊंचा कर दिखाया है. नव्या के पिता एक किसान हैं और अब जब जमीन में पानी कम हुआ तो गुजरात में मजदूरी करने चले गए. परिवार में पांच बहने और एक भाई हैं. नव्या तीसरे नंबर की हैं, जो शुरू से ही प्रतिभा शाली रहीं हैं.
6 किमी पैदल चलकर जाती स्कूल
नव्या मीणा भयंकर गर्मी और आंधी-तूफान की परवाह किए बिना हर रोज 6 किलोमीटर का पैदल सफर तय करके स्कूल जाती हैं. संसाधनों की कमी और आर्थिक तंगी के बावजूद नव्या ने अपनी मेहनत से जो सफलता हासिल की है, वह समाज के लिए एक बड़ी मिसाल है. कठिन परिस्थितियों में घर में खेत का काम, फिर पैदल स्कूल जाने का सफर बहुत कठिन होता है, लेकिन नव्या का पढ़ाई को लेकर दृढ़ निश्चय उसके हौसलों को नहीं डगमगा पाया. नव्या की मेहनत का ही परिणाम है कि आज प्रदेश में कला संकाय में 99.60 प्रतिशत अंक लाकर फूले नहीं समा रही.

नव्या मीणा अपनी पढ़ाई की सफलता का श्रेय अपने माता पिता के साथ सरकारी स्कूल के अध्यापक को देती है. नव्या का सपना है कि वो आगे जाकर यूपीएससी में टॉप करे और आईएएस आईपीएस अधिकारी बन कर देश के लिए काम करेगी. आज नव्या के घर खुशी का माहौल है. परिवार के साथ गांव वाले भी खुशियों में शामिल हो रहे हैं. नव्या की बहनों को भी उम्मीद बनी है कि वे भी बहन की तरह तैयारी करेंगी. बेटी की सफलता की मां के चेहरे से खुशी साफ झलक रही है ताई को इतनी खुशी हुई है कि वो अपनी बेटी को जिला कलेक्टर बनते देखना चाहती है.
पिता रोजगार के लिए जाते हैं गुजरात
छह भाई-बहनों में तीसरे नंबर की नव्या का जीवन कभी आसान नहीं रहा. गांव में खेती के लिए पानी न होने के कारण उनके पिता को रोजगार की तलाश में गुजरात जाना पड़ा, जहां वे टाइल लगाने का काम करते हैं. उनकी मामूली कमाई से परिवार का खर्च भी बमुश्किल चल पाता है. स्कूल से लौटने के बाद नव्या घर के कामों में हाथ बंटाती है और बकरियां भी चराती हैं. इसके बावजूद पढ़ाई के प्रति उसका समर्पण कभी कम नहीं हुआ. घर में भी पढ़ाई का माहौल है; पिछले दो सालों से नव्या और उसकी छोटी बहन ट्विंकल के बीच ज्यादा नंबर लाने को लेकर कंपटीशन चल रहा है.
NDTV से खास बातचीत के दौरान नव्या ने अपने संघर्षों और गांव की जमीनी हकीकत को साझा किया. उसने बताया कि गांव के आस-पास स्कूल न होने के कारण उसके जैसी कई लड़कियों को मजबूरन अपनी पढ़ाई बीच में ही छोड़नी पड़ती है. अगर इंसान मन में ठान ले तो वह अपना हर लक्ष्य प्राप्त कर सकता है. मेरी लोगों से यही अपील है कि बेटियों को स्वतंत्रता दें और उन पर भरोसा रखें. अगर ऐसा हुआ तो मेरे जैसी न जाने कितनी बेटियां अपने लक्ष्य को प्राप्त कर सकती हैं और परिवार का नाम रोशन कर सकती हैं.

शिक्षक बीरबल महला ने नव्या के इस सफर के बारे में NDTV को बताया कि पिछले 5 सालों से नव्या उनके मार्गदर्शन में पढ़ रही है. वह सिर्फ पढ़ाई में ही नहीं, बल्कि खेलों में भी अव्वल है और जिला स्तर पर आयोजित खो-खो प्रतियोगिता में विजेता रह चुकी है. क्लास टेस्ट में लगातार टॉप करने के बाद शिक्षक ने उसकी प्रतिभा को पहचाना और उस पर विशेष ध्यान देना शुरू किया, ताकि उसके सभी कॉन्सेप्ट्स स्पष्ट हो सकें. बोर्ड परीक्षा से ठीक पहले कुछ टेस्ट्स में नव्या का प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा. ऐसे समय में बीरबल महला ने उसकी कमियों को पहचाना, उन पर काम किया और उसका आत्मविश्वास वापस लौटाया. अपने छात्रा की सफलता पर गर्व करते हुए बीरबल महला कहते हैं, नव्या का यह शानदार बोर्ड रिजल्ट ही मेरे लिए मेरी असली गुरु दक्षिणा है.
यह भी पढे़ं-