राजस्थान में AI तकनीक से रामदेवरा में जन्मा इस साल का पहला गोडावण चूजा, जैसलमेर में संख्या पहुंची 73

राजस्थान में जैसलमेर के रामदेवरा ब्रीडिंग सेंटर में AI तकनीक से गोडावण का पहला चूजा जन्मा है. इस सफलता से गोडावण संरक्षण को नई उम्मीद मिली है और जिले में इनकी संख्या बढ़कर 73 हो गई है.

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राजस्थान में जैसलमेर के रामदेवरा ब्रीडिंग सेंटर में AI तकनीक से गोडावण का पहला चूजा जन्मा है.

Rajasthan News: राजस्थान के जैसलमेर जिले से गोडावण संरक्षण को लेकर एक बार फिर उत्साहजनक खबर सामने आई है. पोकरण के पास रामदेवरा स्थित गोडावण ब्रीडिंग सेंटर में इस साल का पहला गोडावण चूजा सफलतापूर्वक जन्मा है. यह उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि इस चूजे का जन्म आधुनिक AI यानी आर्टिफिशियल इनसेमिनेशन तकनीक की मदद से हुआ है, जो इस दुर्लभ पक्षी के संरक्षण में अहम भूमिका निभा रही है.

जेरी और पर्व से मिला नया जीवन

यह चूजा मादा गोडावण “जेरी” और नर “पर्व” से प्राप्त अंडे से विकसित हुआ है. विशेषज्ञों के अनुसार यह प्रक्रिया बेहद संवेदनशील होती है और इसमें वैज्ञानिकों की निरंतर निगरानी जरूरी होती है. इससे पहले इसी महीने सम–सूदासरी ब्रीडिंग सेंटर में भी कई चूजों का जन्म हो चुका है, जिससे संरक्षण अभियान को लगातार मजबूती मिल रही है.

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संख्या बढ़कर 73 पहुंची, उम्मीदें और मजबूत

रामदेवरा की इस सफलता के साथ जैसलमेर जिले में गोडावणों की कुल संख्या अब बढ़कर 73 हो गई है. एक समय विलुप्ति के कगार पर पहुंच चुके इस पक्षी की संख्या में हो रही बढ़ोतरी को बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है. विशेषज्ञों का मानना है कि अगर इसी तरह प्रयास जारी रहे तो आने वाले समय में गोडावण की स्थिति और बेहतर हो सकती है.

प्रोजेक्ट GIB से मिली नई दिशा

गोडावण संरक्षण का यह अभियान “प्रोजेक्ट GIB” के तहत साल 2018 से केंद्र और राज्य सरकार के साथ वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के सहयोग से चलाया जा रहा है. शुरुआत में कई चुनौतियां सामने आईं लेकिन अब आधुनिक तकनीक और लगातार मॉनिटरिंग से सकारात्मक नतीजे मिलने लगे हैं.

प्राकृतिक आवास में छोड़ने की तैयारी

अब अगला लक्ष्य इन गोडावणों को उनके प्राकृतिक आवास में सुरक्षित तरीके से छोड़ना है. इसके लिए भी योजनाएं बनाई जा रही हैं ताकि यह दुर्लभ पक्षी फिर से खुले आसमान में उड़ान भर सके और उसकी संख्या स्थायी रूप से बढ़ सके.

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