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This Article is From Jan 23, 2026

राजस्थान के जनरल सगत सिंह ने किए थे पाकिस्तान के टुकड़े, 64 गोलियों के बीच भी नहीं डगमगाए ; छह युद्धों में रहे नायक

राजस्थान के चूरू जिले से निकले जनरल सगत सिंह राठौड़ ने गोवा को आज़ाद कराया चीन को नाथू-ला में हराया और 1971 के युद्ध में पाकिस्तान को निर्णायक शिकस्त देकर इतिहास बदल दिया था. 

राजस्थान के जनरल सगत सिंह ने किए थे पाकिस्तान के टुकड़े, 64 गोलियों के बीच भी नहीं डगमगाए ; छह युद्धों में रहे नायक
जनरल सगत सिंह राठौड़.

Rajasthan News: राजस्थान के चूरू जिले की रतनगढ़ तहसील के गांव कुसुमदेसर में 14 जुलाई 1919 को जनरल सगत सिंह राठौड़ का जन्म हुआ. उनके पिता ठाकुर बृजपाल सिंह बिकानेर की कैमल कोर में सेवा दे चुके थे और प्रथम विश्व युद्ध में इराक में लड़े थे. सैन्य अनुशासन और साहस उन्हें विरासत में मिला.

गंगा रिसाला से भारतीय सेना तक

जनरल सगत सिंह ने अपना सैन्य जीवन बीकानेर के गंगा रिसाला से शुरू किया. यही इकाई आगे चलकर सादूल लाइट इन्फेंट्री बनी और फिर भारतीय सेना का हिस्सा बनी. शुरू से ही उनकी पहचान तेज निर्णय लेने और कठिन हालात में नेतृत्व करने की रही.

द्वितीय विश्व युद्ध में दिखाया कौशल

द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान उन्होंने मेसोपोटामिया सीरिया और फिलिस्तीन में युद्ध अभियानों में भाग लिया. इन अभियानों ने उनके भीतर एक कुशल रणनीतिकार को जन्म दिया. आज़ादी के बाद उन्होंने भारतीय सेना में बने रहने का निर्णय लिया और 1949 में 3 गोरखा राइफल्स में कमीशंड अधिकारी बने.

गोवा मुक्ति अभियान में ऐतिहासिक जीत

1961 में गोवा मुक्ति अभियान के दौरान ऑपरेशन विजय का नेतृत्व जनरल सगत सिंह ने किया. उनकी आक्रामक रणनीति और स्पष्ट योजना के कारण मात्र 40 घंटे में गोवा पुर्तगाली शासन से मुक्त हो गया. यह भारत के सैन्य इतिहास की तेज़ और निर्णायक कार्रवाई मानी जाती है.

नाथू-ला में चीन को करारा जवाब

1967 में नाथू-ला संघर्ष के दौरान चीन की सेना ने भारतीय चौकियों पर हमला किया. हालात गंभीर थे और ऊपर से आदेश का इंतजार हो रहा था. जनरल सगत सिंह ने स्थिति समझते हुए तुरंत तोपखाना मंगवाया और जवाबी कार्रवाई शुरू की. परिणामस्वरूप चीन के 300 से अधिक सैनिक मारे गए और भारत ने नाथू-ला में ऐतिहासिक जीत दर्ज की. उन्होंने स्पष्ट कहा था कि देश की जमीन खाली नहीं होगी.

1971 युद्ध जिसने बदला इतिहास

1971 के भारत पाकिस्तान युद्ध में जनरल सगत सिंह की भूमिका निर्णायक रही. मेघना नदी पार करने का पुल उड़ाए जाने के बाद उन्होंने इंतजार करने के बजाय हेलीकॉप्टर से सैनिकों को नदी पार कराने का साहसिक फैसला लिया. 9 हेलीकॉप्टरों ने 60 उड़ानों में 584 सैनिकों को पार उतारा. अनुमति के बिना लिया गया यह निर्णय युद्ध का रुख बदलने वाला साबित हुआ.

गोलियों के बीच भी नहीं डगमगाया साहस

युद्ध के दौरान उनके हेलीकॉप्टर पर फायरिंग हुई और उसमें 64 गोलियों के निशान पाए गए. इसके बावजूद वे नहीं रुके और तुरंत दूसरे हेलीकॉप्टर से निरीक्षण पर निकल पड़े. यही निर्भीकता उन्हें अलग पहचान देती है.

सम्मान और अमर विरासत

1971 युद्ध के बाद 93 हजार पाकिस्तानी सैनिकों ने आत्मसमर्पण किया. जनरल सगत सिंह को परम विशिष्ट सेवा मेडल और पद्मभूषण से सम्मानित किया गया. 30 नवंबर 1976 को सेवानिवृत्त होकर उन्होंने जयपुर में अंतिम समय बिताया और 26 सितंबर 2001 को उनका निधन हुआ. जनरल सगत सिंह राठौड़ ने छह युद्धों में भाग लिया और हर बार भारत का मान बढ़ाया. उनका जीवन हर भारतीय के लिए साहस नेतृत्व और देशभक्ति की प्रेरणा है.

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