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This Article is From Mar 15, 2026

Rajasthan: जयपुर का अनोखा घर ‘फुटबॉल भवन’ जहां हर कोना फुटबॉल से सजा है

अग्रवाल राजस्थान फुटबॉल टीम के कप्तान भी रह चुके हैं और राजस्थान फुटबॉल एडहॉक कमेटी के संयोजक की जिम्मेदारी भी निभा चुके हैं. उनका कहना है कि फुटबॉल उनके जीवन से कभी अलग नहीं हो सकता.

Rajasthan: जयपुर का अनोखा घर ‘फुटबॉल भवन’ जहां हर कोना फुटबॉल से सजा है

आमतौर पर घरों के नाम किसी आस्था, रिश्ते, शुभ संकेत या प्रकृति से प्रेरित होते हैं, लेकिन राजस्थान की राजधानी जयपुर में एक ऐसा घर है जिसका नाम सुनकर लोग ठिठक जाते हैं और मुस्कुरा उठते हैं. इस घर का नाम है - ‘‘फुटबॉल भवन''. यह नाम किसी सजावटी कल्पना का नतीजा नहीं, बल्कि एक ऐसे व्यक्ति के जीवनभर के जुनून की कहानी है जिसके लिए फुटबॉल सिर्फ खेल नहीं बल्कि जीवन का अभिन्न हिस्सा बन चुका है. जयपुर के नेहरू नगर निवासी और राजस्थान फुटबॉल संघ के पूर्व सचिव 80 वर्षीय लालचंद अग्रवाल ने अपने घर का नाम ‘‘फुटबॉल भवन'' रखा है. फुटबॉल के प्रति उनका लगाव इतना गहरा है कि जब उन्होंने अपना घर बनाया तो उसे उसी पहचान से जोड़ दिया जिसने उनके जीवन को दिशा दी.

अग्रवाल का कहना है कि उनके घर के बाहर लगा यह नाम लोगों को अक्सर रुकने पर मजबूर कर देता है. राहगीर जिज्ञासावश पूछ बैठते हैं, ‘‘आखिर घर का नाम फुटबॉल भवन क्यों?'' और फिर शुरू होती है उनके जुनून की दिलचस्प कहानी. अग्रवाल ने कहा कि राहगीर अक्सर रुककर इस अनोखे नाम के पीछे की कहानी पूछते हैं. उनका दावा है कि आज पूरे देश में ‘‘फुटबॉल भवन'' नाम का घर सिर्फ जयपुर में ही है. वह बताते हैं कि पहले ऐसे दो घर थे - एक कोलकाता के मशहूर खिलाड़ी एस. मेवालाल का और दूसरा उनका.

''किशनपोल बाजार में किराए के मकान में रहते थे और फुटबॉल खेलते थे''

अग्रवाल ने बताया कि कुछ समय पहले जब वह कोलकाता गए तो वहां के ‘‘फुटबॉल भवन'' को देखने की इच्छा हुई. लेकिन वहां पहुंचकर पता चला कि वह घर बिक चुका है और उसे तोड़कर उसकी जगह नया मकान बन चुका है. अग्रवाल कहते हैं कि जब वह किशनपोल बाजार में किराए के मकान में रहते थे और फुटबॉल खेलते थे, तभी उन्होंने संकल्प लिया था कि अगर कभी अपना घर बनाएंगे तो उसका नाम ‘‘फुटबॉल भवन'' ही रखेंगे. उन्होंने कहा कि वर्ष 1970 में जब उन्होंने अपना घर बनाया तो अपने उसी संकल्प को साकार कर दिया.

करीब 70 देशों से लाई गई फुटबॉल से जुड़ी वस्तुएं मौजूद

यह घर केवल नाम से ही फुटबॉल से जुड़ा नहीं है. इसके भीतर एक छोटा सा अनोखा फुटबॉल संग्रहालय भी है. यहां फुटबॉल आकार के जूते, ट्रॉफियां, मास्क, टेडी बियर, घड़ियां, कप, पेंसिल, पंखे, बालकनी सजावट की सामग्री, पेपरवेट, की-चेन, फोटो फ्रेम, कैप और जर्सी जैसी कई वस्तुएं सजी हुई हैं. फुटबॉल भवन में स्वीडन, इंग्लैंड, ब्राजील, जापान, चीन, जर्मनी, फ्रांस, इंडोनेशिया, कतर और थाईलैंड सहित करीब 70 देशों से लाई गई फुटबॉल से जुड़ी वस्तुएं मौजूद हैं.

अग्रवाल राजस्थान फुटबॉल टीम के कप्तान भी रह चुके हैं और राजस्थान फुटबॉल एडहॉक कमेटी के संयोजक की जिम्मेदारी भी निभा चुके हैं. उनका कहना है कि फुटबॉल उनके जीवन से कभी अलग नहीं हो सकता. उन्होंने कहा, ‘‘फुटबॉल मेरे जीवन में इस तरह बस गया है कि हर चीज में उसकी झलक दिखाई देती है. इसमें मेरी आत्मा बसती है.'' अग्रवाल ने कहा कि जब भी वह किसी दूसरे देश जाते हैं तो वहां से फुटबॉल से जुड़ी कोई न कोई चीज जरूर तलाशते हैं. उन्होंने कहा कि इस अनोखे संग्रह को बढ़ाने में उनके परिवार के सदस्य भी उनका पूरा साथ देते हैं.

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