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"माता-पिता की मौत के बाद छोटा भाई आयुषी पर निर्भर", कोर्ट ने नहीं मानी दलील, जमानत याचिका खारिज

जयपुर के नीरज शर्मा मर्डर केस का आरोपी और आयुषी का चचेरा भाई बलराम फरार है. कोर्ट का मानना है कि जमानत देने से जांच प्रभावित होने की आशंका है.

"माता-पिता की मौत के बाद छोटा भाई आयुषी पर निर्भर", कोर्ट ने नहीं मानी दलील, जमानत याचिका खारिज
आरोप है कि आयुषी पिता की मौत के बाद नौकरी चाहती थी, लेकिन मां को अनुकंपा नियुक्ति मिलने से वो नाराज थी.

जयपुर में मां की हत्या के चर्चित मामले में आरोपी बेटी आयुषी की जमानत याचिका कोर्ट ने खारिज कर दी है. जयपुर महानगर प्रथम के एडीजे-6 कोर्ट की न्यायाधीश श्वेता दाधीच ने आदेश में कहा कि जांच और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर प्रथमदृष्टया यह प्रतीत नहीं होता कि अभियुक्ता को झूठा फंसाया गया है. अदालत ने यह भी उल्लेख किया कि रिकॉर्ड से सामने आया है कि आयुषी और उसकी मां के बीच लंबे समय से मनमुटाव था. पिता की मृत्यु के बाद मां द्वारा अनुकंपा नियुक्ति लेने को लेकर भी वह नाराज थी और आए दिन मां को प्रताड़ित करती थी. 

आयुषी का चचेरा भाई बलराम फरार 

कोर्ट ने यह भी कहा कि मामले का एक अन्य आरोपी, आयुषी का चचेरा भाई बलराम उर्फ रवि, अभी फरार है और जांच जारी है. ऐसे में इस चरण पर जमानत देने से जांच प्रभावित होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता. जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान आयुषी के वकीलों ने दलील दी, "उसे मृतका के परिजनों के दबाव में फंसाया गया है. उससे कोई बरामदगी नहीं हुई है और न ही कोई बरामदगी बाकी है. अन्य आरोपियों से उसका कोई संबंध नहीं है."

आयुषी की घटनास्थल पर मौजूदगी नहीं थी- वकील

वकील का तर्क था कि आरोपी का छोटा भाई गंभीर बीमारी से पीड़ित है, जो आयुषी पर निर्भर है. साथ ही, आयुषी की घटनास्थल पर मौजूदगी नहीं थी और उसका कोई आपराधिक रिकॉर्ड भी नहीं है. इसलिए ट्रायल में लगने वाले लंबे समय को देखते हुए उसे जमानत दी जानी चाहिए.

पुलिस और परिवादी पक्ष के वकीलों ने जमानत का विरोध करते हुए कहा कि आरोपी ने संपत्ति और अनुकंपा नियुक्ति पाने के लिए मां की हत्या की साजिश रची. मामले की गंभीरता और अन्य आरोपी के फरार होने का हवाला देते हुए उन्होंने जमानत न देने की मांग की.

3 जुलाई की शाम स्कॉर्पियो की टक्कर में नीरज की मौत

पुलिस के अनुसार, प्रताप नगर के रविंद्र नगर निवासी नीरज शर्मा (45) कोर्ट में एलडीसी थीं. उसके पति का सालभर पहले निधन हो गया था. इसके बाद उन्हें अनुकंपा नियुक्ति मिली थी. 3 जुलाई की शाम करीब 4:45 बजे वह अपने बेटे को कोचिंग छोड़कर लौट रही थीं, तभी तेज रफ्तार स्कॉर्पियो ने उन्हें टक्कर मार दी. करीब 130 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हुई टक्कर में वह करीब 100 फीट दूर जा गिरीं और मौके पर ही उनकी मौत हो गई. आरोपी वाहन चालक मौके से फरार हो गया था.

जांच में सामने आया कि इस हत्या के लिए आयुषी ने अपने रिश्तेदारों और अन्य आरोपियों के साथ मिलकर 7 लाख रुपये में साजिश रची थी. पुलिस इस मामले में बेटी समेत 7 आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है और वारदात में प्रयुक्त स्कॉर्पियो भी बरामद कर ली गई है.

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