राजस्थान में आज भी कई घर ऐसे हैं, जहां पीने के लिए साफ पानी नहीं है. करीब 34 फीसदी महिलाओं ने इंटरनेट का इस्तेमाल नहीं किया. नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे (NFHFS-6) की ताजा रिपोर्ट में मूलभूत सुविधाओं से जुड़े आंकड़े चिंताजनक है. स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की ओर से जारी रिपोर्ट में महिलाओं, बच्चों और परिवारों की सामाजिक स्थिति के बारे में डेटा शामिल हैं. इस रिपोर्ट में जानिए पेयजल, बिजली-इंटरनेट कनेक्शन समेत कई बुनियादी सुविधाओं की स्थिति के बारे में जानिए.
साल 2019-21 के मुकाबले और बिगड़े हालात
रिपोर्ट के मुताबिक, राजस्थान में 15.5 फीसदी महिलाएं खुद से जुड़े और परिवार के मूलभूत निर्णय नहीं लेती है. देशभर में यह आंकड़ा 11 फीसदी है यानी राजस्थान का औसत देशभर से खराब है. आज भी इन परिवारों में महिलाओं को फैसले लेने की आजादी नहीं है. यहां तक कि घर में जरूरी सामान की खरीद, परिजनों और रिश्तेदारों से मिलने जाने और अपने स्वास्थ्य की देखरेख से जुड़े फैसले भी खुद नहीं करती है. आंध्रप्रदेश के बाद राजस्थान इसमें सबसे पिछड़ा हुआ है. 2019-21 की रिपोर्ट में ऐसी महिलाएं 87.7 फीसदी थीं, जबकि 2023-24 में ये स्थिति सुधरने के बजाय खराब हुई है.
करीब 5 फीसदी घरों में पीने का साफ पानी नहीं
2019-21 के एनएफएचएस सर्वे (NHFS-5) के मुताबिक 98.1 फीसदी घरों में बिजली थी. साल 2023-24 में 98.4 फीसदी घरों में बिजली का कनेक्शन पहुंच गया है. लेकिन पीने का साफ पानी 4.8 फीसदी घरों में उपलब्ध नहीं है. 2019-21 में यह आंकड़ा 3.5 फीसदी तक था.
पिछले वर्षों के मुकाबले डिजिटल साक्षरता बढ़ी
वहीं, महिलाएं अब तेजी से डिजिटल साक्षर हो रही है. साल 2019-21 के डेटा देखें तो 36.9 फीसदी महिलाएं इंटरनेट इस्तेमाल करती थी. ताजा रिपोर्ट में साल 2023-24 के आंकड़े 66.3 फीसदी महिलाओं ने इंटरनेट इस्तेमाल किया है. वहीं, 80.5 फीसदी पुरुष ऐसे हैं, जिन्होंने इंटरनेट का इस्तेमाल किया है.
यह भी पढ़ेंः अजेय कुमार बने राजस्थान BJP के नए प्रदेश संगठन महामंत्री, दिल्ली से जारी हुआ बड़ा आदेश