Rajasthan News: राजस्थान में पेट्रोल पंपों की प्रस्तावित हड़ताल को लेकर 1 जून का दिन बेहद अहम है. प्रदेशभर में पेट्रोल पंपों की अनिश्चितकालीन हड़ताल को 15 दिनों के लिए टाल दिया गया है. अब सबकी निगाहें आज जयपुर सचिवालय में होने वाली उच्च स्तरीय बैठक पर टिकी हैं. अगर इस बैठक में भजनलाल सरकार और राजस्थान पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन (RPDA) के बीच मांगों पर सहमति नहीं बनती है, तो प्रदेश में एक बार फिर पेट्रोल पंप हड़ताल का संकट गहरा सकता है.
मुख्य सचिव की टेबल पर फाइनल टॉक
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के निर्देशों के बाद आज जयपुर स्थित सचिवालय में सरकार और पेट्रोल पंप संचालकों के बीच एक महत्वपूर्ण बैठक होने जा रही है. इस उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता राज्य के मुख्य सचिव करेंगे. इस दौरान RPDA के अध्यक्ष डॉ. राजेंद्र सिंह भाटी सहित अन्य पदाधिकारी सरकार के सामने अपनी समस्याएं और मांगें प्रमुखता से रखेंगे.
सहमति नहीं बनी तो आगे क्या?
पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन ने यह पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि हड़ताल को पूरी तरह से रद्द नहीं किया गया है, बल्कि केवल 15 दिनों का समय दिया गया है. डीलर्स आज की वार्ता के परिणामों का इंतजार करेंगे. यदि आज की बैठक बेनतीजा रहती है और सरकार की तरफ से मांगों पर कोई ठोस समाधान या लिखित आश्वासन नहीं मिलता है, तो एसोसिएशन अपनी आगे की रणनीति तय करेगा, जिससे प्रदेश में पेट्रोल पंपों पर ताले लगने का खतरा फिर से मंडरा सकता है.
क्यों दी गई थी हड़ताल की चेतावनी?
RPDA ने 27 मई को चेतावनी दी थी कि अगर उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो वे 1 जून से हड़ताल पर जाएंगे. उनकी सबसे बड़ी मांग राजस्थान में पेट्रोल-डीजल पर लगने वाले भारी वैट को कम करने की है. डीलर्स चाहते हैं कि वैट को कम से कम 5% घटाकर पंजाब के बराबर लाया जाए. इसके अलावा, राज्य के कई पेट्रोल पंपों पर ईंधन की आपूर्ति बाधित होना, तेल कंपनियों द्वारा सप्लाई की सीमा तय करना और बकाया भुगतान न होना जैसी समस्याएं भी इस विरोध का मुख्य कारण हैं.
वैट कटौती के संकेतों से जगी है उम्मीद
डीलर्स और आम जनता दोनों को आज की बैठक से काफी उम्मीदें हैं. हाल ही में एक टीवी डिबेट में भाजपा प्रवक्ता द्वारा ईंधन पर वैट कटौती की योजना पर सहमति जताने से सकारात्मक माहौल बना है. इसी उम्मीद के सहारे डीलर्स ने अपना आंदोलन 15 दिन टाला था. अब देखना यह है कि आज की इस अहम बैठक में सरकार कोई बड़ा फैसला लेती है या गतिरोध बरकरार रहता है.
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