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This Article is From Aug 09, 2025

Rajasthan: जेल में बंद भाइयों को राखी बांधने पहुंची बहनें, भावुक हुईं; भाइयों से लिया अच्छाई अपनाने का वचन

रक्षाबंधन के अवसर पर अपने भाइयों को जेल से राखी बांधकर बाहर निकलती हुई बहनों ने बताया कि उन्होंने अपने भाइयों से कहा कि अब बाहर आने के पश्चात इस प्रकार का कोई काम ना करें जो उनको वापस जेल में ले जाए.

Rajasthan: जेल में बंद भाइयों को राखी बांधने पहुंची बहनें, भावुक हुईं; भाइयों से लिया अच्छाई अपनाने का वचन
भाइयों को बहनों ने बांधी राखी

Raksha Bandhan 2025: भाई और बहन के प्यार के प्रतीक रक्षाबंधन का पर्व आज धूमधाम से मनाया जा रहा है. जोधपुर के सेंट्रल जेल में भी बंद अपने भाइयों को राखी बांधने के लिए शनिवार को बड़ी संख्या में महिलाएं रक्षाबंधन पर्व के मौके पर पहुंची. इस दौरान कई महिलाएं भाइयों को राखी बांधते समय भावुक भी हो गई.

इस बार राखी के पर्व को देखते हुए जेल अधीक्षक प्रदीप लखावत के नेतृत्व में सेंट्रल जेल मुख्य द्वार के पास उचित व्यवस्था की गई थी. बहनों की भीड़ को देखते हुए विशेष इंतजाम किए गए थे, जिससे महिलाओं को परेशानियों का सामना नहीं करना पड़े.  जेल में आने वाली बहनों के लिए सुरक्षा जांच के बाद उन्हें भाइयों को राखी बांधने के लिए प्रवेश दिया गया. 

भाइयों को राखी बांधी तो वह भावुक हो गईं 

यहां पर आई बहनों ने जब अपने भाइयों को राखी बांधी तो वह भावुक हो गई. इस दौरान बहनों ने भाई से रक्षा का वचन लिया, वहीं भाई ने भी बहन को बुराई त्यागकर अच्छाई अपनाने का वचन दिया.  जेल में पहली बार इस तरह की व्यवस्था की गई. जिसमें बहनों के लिए टेंट, कुर्सी आदि की व्यवस्था की गया. जेल के कर्मी ने बहनों को बारी बारी से जेल के बंद भाइयों से राखी बांधने के लिए मिलवाया.

झालवाड़ में भी राखी बांधने जेल पहुंची बहनें 

झालावाड़ में भी जेल में बंद लगभग पांच सौ कैदियों को राखी बांधने रक्षाबंधन के अवसर पर उनकी बहनें बड़ी तादाद में पहुंचीं थीं. जेल के मुख्य द्वार पर जेल प्रशासन ने माकूल इंतजाम करके रक्षाबंधन का त्यौहार मनाने की व्यवस्था की थी. जहां टेंट लगाकर छाया की गई इसके अतिरिक्त आने वाली बहनों के लिए बैठने और पीने के पानी की अभी इंतजाम किया गया.

ऐसा काम ना करें जो उनको वापस जेल में ले जाए

कैदियों को राखी बांधने आने वाली उनकी बहनों को बारी-बारी से जेल के मुख्य द्वार पर भेजा गया जहां कैदी मुख्य द्वार पर अंदर की तरफ बैठे हुए थे तथा बाहर बैठ कर उनकी बहनें उनको रक्षा सूत्र बांध रही थीं. रक्षाबंधन के अवसर पर अपने भाइयों को जेल से राखी बांधकर बाहर निकलती हुई बहनों ने बताया कि उन्होंने अपने भाइयों से कहा कि अब बाहर आने के पश्चात इस प्रकार का कोई काम ना करें जो उनको वापस जेल में ले जाए.

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