Rajasthan News: पेपर लीक होने के कारण NEET UG 2026 की परीक्षा रद्द कर दी गई है. अब NEET पेपर लीक को लेकर पूरे देश में बवाल मचा हुआ है. छात्र संगठन नीट पेपर लीक को लेकर NTA के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं. उधर सीबीआई NEET पेपर लीक केस की जांच में जुट गई है. कई राज्यों में छापेमारी के बाद CBI ने NEET पेपर लीक केस में अब तक 5 लोगों को गिरफ्तार किया है. साथ ही कई लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है. जिस NEET पेपर लीक के चलते परीक्षा रद्द हो गई, उसी पेपर लीक की कहानी राजस्थान से शुरू हो गई. अब NEET पेपर लीक को लेकर राजस्थान के मंत्री ने माफी मांगी है.
OBC आरक्षण पर क्या बोले मंत्री खर्रा
झुंझुनूं के दौरे पर गए यूडीएच मंत्री झाबरसिंह खर्रा ने निकाय चुनावों में ओबीसी आरक्षण और नीट पेपर लीक मामले को लेकर बड़ा बयान दिया है. मंत्री खर्रा ने कहा कि यदि विपक्ष बिना ओबीसी को राजनीतिक आरक्षण दिए निकाय चुनाव करवाना चाहता है तो वह लिखित प्रस्ताव दे. सरकार उस पर विचार करेगी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की अवमानना नहीं की जा सकती.

उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि ओबीसी वर्ग का ट्रिपल टेस्ट करवाकर आंकड़े तैयार किए जाएं. इसके बाद ही कोई सरकार ओबीसी वर्ग को राजनीतिक आरक्षण दे सकती है. मामला फिलहाल हाईकोर्ट में विचाराधीन है और सरकार अदालत के आदेशों की पालना करेगी.
NEET पेपर लीक पर मंत्री खर्रा ने मांगी माफी
वहीं नीट पेपर लीक पर मंत्री खर्रा ने कहा कि यह बेहद गंभीर विषय है. मेहनत से पढ़ाई करने वाले विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों को इससे पीड़ा हुई है. इसके लिए हम व्यक्तिगत रूप से और सरकार की ओर से माफी मांगते हैं. मंत्री झाबर सिंह खर्रा ने भरोसा दिलाया कि आगामी परीक्षाओं में पेपर लीक जैसी घटनाएं नहीं होंगी और पूरी चाक-चौबंद व्यवस्था के साथ परीक्षा आयोजित करवाई जाएगी.
बता दें कि जयपुर ग्रामीण के दो भाई दिनेश बिवाल और मांगीलाल अब NEET पेपर लीक मामले की जांच के केंद्र में हैं. CBI ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया है और पूछताछ कर रही है. पुलिस सूत्रों के मुताबिक, दिनेश और मांगीलाल ने यह कथित लीक पेपर सीकर के NEET अभ्यर्थियों तक राकेश कुमार मंडावरिया के जरिए पहुंचाया. राकेश मंडावरिया सीकर में आरके कंसल्टेंसी नाम से एक करियर गाइडेंस सेंटर चलाता है. जांच एजेंसियों का मानना है कि यहीं से यह कथित NEET गेस पेपर सीकर में तेजी से फैलना शुरू हुआ. बाद में सीकर के ही एक व्हिसलब्लोअर ने NTA को इसकी सूचना दी, जिसके बाद पूरे कथित घोटाले का खुलासा हुआ.
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