Ajmer News: अजमेर में फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्र बनाकर सरकारी नौकरी हासिल करने के मामले में पुलिस जांच लगातार नए खुलासे कर रही है. अब तक की कार्रवाई में आरपीएससी स्टेनोग्राफर अरुण शर्मा, डेगाना निवासी ई-मित्र संचालक रामनिवास जाट, जेएलएन अस्पताल के ठेका कर्मचारी मोडू राम उर्फ मनीष तथा सेवानिवृत्त चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी दिलीप कुमार वैष्णव की गिरफ्तारी हो चुकी है. जांच में सामने आया कि कथित तौर पर ₹20,000 लेकर फर्जी प्रमाण पत्र तैयार कराया गया, जिस पर अस्पताल के विभागीय सील-साइन भी करवाए गए. इसी प्रमाण पत्र के आधार पर नौकरी लाभ लेने का मामला दर्ज हुआ. पुलिस अब प्रमाण पत्र बनाने की पूरी चेन—ई-मित्र से अस्पताल और सील नेटवर्क—की कड़ियों को जोड़ रही है.
27 सरकारी सील बरामद, कई विभाग जांच के दायरे में
दिलीप कुमार वैष्णव के किराए के मकान से करीब 27 सरकारी सील बरामद होना जांच का सबसे बड़ा बिंदु बन गया है. इनमें जेएलएन अस्पताल के नेत्र रोग, अस्थि रोग, नाक-कान-गला विभागों के अलावा रोडवेज, नगर निगम और शिक्षा विभाग से जुड़ी सील भी बताई जा रही हैं. पुलिस दो एंगल पर जांच कर रही है—क्या सील सरकारी कार्यालयों से चोरी हुईं या अवैध रूप से बनवाई गईं. सब इंस्पेक्टर गिरिराज के अनुसार रिमांड अवधि में सीलों के उपयोग, स्रोत और उनसे बने संभावित फर्जी प्रमाण पत्रों की पड़ताल की जा रही है. आशंका है कि यह नेटवर्क केवल एक नौकरी तक सीमित नहीं, बल्कि कई लाभार्थियों तक फैला हो सकता है.
अस्पताल प्रशासन का स्पष्टीकरण , मेडिकल बोर्ड रिपोर्ट ने खोली पोल
जवाहरलाल नेहरू अस्पताल अधीक्षक डॉ. अरविंद खरे ने मामले में अस्पताल की आधिकारिक स्थिति स्पष्ट की है. उनके अनुसार आरपीएससी से पत्र मिलने के बाद मेडिकल बोर्ड गठित कर आरोपी अरुण शर्मा की वीईपी जांच जयपुर एसएमएस अस्पताल में कराई गई. रिपोर्ट में दिव्यांगता निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं पाई गई. इसके बाद पूरी रिपोर्ट आरपीएससी को भेज दी गई. अधीक्षक ने कहा कि अस्पताल की सील-साइन प्रमाण पत्र पर कैसे लगे, यह जांच का विषय है. पुलिस दस्तावेज सत्यापन, हस्ताक्षर मिलान और विभागीय जिम्मेदारी तय करने की दिशा में काम कर रही है.
विधायक शंकर सिंह रावत की बेटी का मामला भी चर्चा में, राजस्व मंडल ने किया एपीओ
इसी तरह के आरोपों के बीच ब्यावर से भाजपा विधायक शंकर सिंह रावत की नायब तहसीलदार बेटी कंचन रावत का मामला भी सुर्खियों में आ गया है. वर्ष 2018 बैच की आरटीएस अधिकारी कंचन पर नियुक्ति में फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्र उपयोग का आरोप लगने के बाद शिकायत मुख्यमंत्री व एसओजी तक पहुंची थी. राजनीतिक विवाद बढ़ने पर जांच एसओजी को सौंपी गई.
हालांकि जांच रिपोर्ट अभी सार्वजनिक नहीं हुई, लेकिन राजस्व मंडल अजमेर ने कंचन रावत को एपीओ कर दिया है. आदेश में कारण प्रशासनिक बताया गया, फिर भी कार्रवाई को दिव्यांग प्रमाण पत्र प्रकरण से जोड़कर देखा जा रहा है. दोनों मामलों के सामने आने के बाद फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्रों के जरिए सरकारी लाभ लेने के नेटवर्क पर राज्यभर में सख्त जांच की मांग तेज हो गई है.
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