Rajasthan News: राजस्थान के अजमेर जिले में फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्र बनवाकर सरकारी नौकरी हासिल करने का मामला लगातार गहराता जा रहा है. सिविल लाइन थाना पुलिस की जांच जैसे जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे वैसे नए और चौंकाने वाले तथ्य सामने आ रहे हैं. अब इस मामले में जेएलएन अस्पताल से जुड़ा कनेक्शन भी सामने आया है.
आरपीएससी कर्मचारी की गिरफ्तारी से खुली परतें
इस पूरे प्रकरण की शुरुआत आरपीएससी से जुड़े एक स्टेनोग्राफर की गिरफ्तारी से हुई थी. आरोपी पर आरोप है कि उसने फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्र के आधार पर नौकरी में लाभ लिया. पूछताछ के दौरान सामने आया कि यह प्रमाण पत्र किसी एक व्यक्ति ने नहीं बल्कि पूरे नेटवर्क की मदद से तैयार करवाया गया.
जांच पहुंची जेएलएन अस्पताल तक
पुलिस जांच की कड़ी जोड़ते जोड़ते जेएलएन अस्पताल तक पहुंच गई. आशंका जताई जा रही है कि यहीं से दिव्यांग प्रमाण पत्र पर जरूरी सील और हस्ताक्षर करवाए गए. इसके बाद पुलिस ने दस्तावेजों की सत्यता और हस्ताक्षर करने वाले व्यक्ति की भूमिका की गहन जांच शुरू की.
ठेका कर्मी की भूमिका आई सामने
जांच में मोडूराम उर्फ मनीष चौधरी नाम का व्यक्ति सामने आया है. वह जेएलएन अस्पताल में ठेकेदार के अधीन कार्यरत है और मरीजों के बेड से जुड़े कपड़ों के प्रबंधन का काम करता है. पुलिस के अनुसार उसने अस्पताल में संपर्क स्थापित कर फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्र पर सील और साइन करवाने में अहम भूमिका निभाई. पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया है.
ई मित्र संचालक भी गिरफ्तार
इस नेटवर्क में ई मित्र संचालक रामनिवास निवासी डेगाना की भूमिका भी उजागर हुई है. आरोप है कि उसने 20 हजार रुपये लेकर फर्जी प्रमाण पत्र बनवाने में मदद की. पुलिस ने उसे भी गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया. कोर्ट ने मुख्य आरोपी अरुण शर्मा और ई मित्र संचालक रामनिवास दोनों को न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया है.
जांच की पूरी कड़ी
पहले आरपीएससी कर्मचारी की गिरफ्तारी हुई. उसकी निशानदेही पर ई मित्र संचालक पकड़ा गया. इसके बाद जेएलएन अस्पताल से जुड़े ठेका कर्मी मोडूराम उर्फ मनीष चौधरी को गिरफ्तार किया गया. अब पुलिस सील साइन और पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही है. संभावना है कि आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां हो सकती हैं.
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