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सीएम भजनलाल ने विपक्ष की 5 साल बनाम 2 साल की चुनौती को स्वीकारा, कहा- दिन और समय तय किया जाए

सीएम भजनलाल ने कहा सरकार के दो साल के कामकाज से जुड़े सभी दस्तावेज सदन में रखे जा रहे हैं ताकि पूरी पारदर्शिता के साथ चर्चा हो सके. मुख्यमंत्री ने कहा कि वे पांच साल बनाम दो साल पर सदन में बहस के लिए पूरी तरह तैयार हैं.

सीएम भजनलाल ने विपक्ष की 5 साल बनाम 2 साल की चुनौती को स्वीकारा, कहा- दिन और समय तय किया जाए
सीएम भजनलाल शर्मा और नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली

Rajasthan Assembly Session: राजस्थान विधानसभा में राज्यपाल के अभिभाषण पर बहस के दौरान सियासी माहौल उस समय गरमा गया जब मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने विपक्ष की ओर से दी गई पांच साल बनाम दो साल के कामकाज पर बहस की चुनौती को सदन में स्वीकार कर लिया. उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष से आग्रह किया कि इस विषय पर बहस के लिए दिन और समय तय कर दिया जाए. मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने सदन में कहा कि विपक्ष ने कांग्रेस सरकार के पांच साल और भाजपा सरकार के दो साल के कार्यकाल की तुलना की चुनौती दी थी जिसे वे प्रदेश के जनसेवक होने के नाते स्वीकार करते हैं. 

उन्होंने कहा कि सरकार के दो साल के कामकाज से जुड़े सभी दस्तावेज सदन में रखे जा रहे हैं ताकि पूरी पारदर्शिता के साथ चर्चा हो सके. मुख्यमंत्री ने कहा कि वे पांच साल बनाम दो साल पर सदन में बहस के लिए पूरी तरह तैयार हैं.

मुख्यमंत्री के जवाब के दौरान हंगामा

मुख्यमंत्री के जवाब के दौरान सदन में दो बार हंगामा भी हुआ. पहले जब मुख्यमंत्री ने एसआईआर से जुड़े विपक्ष के आरोपों को गलत बताया तब कांग्रेस विधायकों ने विरोध जताते हुए नारेबाजी शुरू कर दी. इसके बाद जब मुख्यमंत्री ने पांच साल बनाम दो साल की बहस का मुद्दा दोहराया तो कांग्रेस विधायकों ने फिर से हंगामा किया जिससे कुछ देर के लिए सदन की कार्यवाही प्रभावित हुई.

टीकाराम जूली ने दी चुनौती

नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने सरकार को चुनौती देते हुए कहा कि कांग्रेस सरकार के पांच साल के काम और भाजपा सरकार के दो साल के काम की तुलना होनी चाहिए. इस पर मुख्यमंत्री ने पलटवार करते हुए कहा कि सरकार का दो साल का रिपोर्ट कार्ड जनता के सामने है और आगे भी रखा जाएगा. उन्होंने कहा कि यदि विपक्ष इस रिपोर्ट कार्ड को पढ़ेगा तो उसे सरकार के कामकाज की वास्तविकता समझ में आएगी.

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में यह भी कहा कि केवल आरोप लगाने से काम नहीं चलेगा और जनप्रतिनिधियों को जमीन पर उतरकर काम करना पड़ेगा. उन्होंने भरोसा जताया कि आने वाले तीन वर्षों में प्रदेश में विकास की रफ्तार और तेज होगी और राजस्थान को विकास के मामले में अग्रणी राज्यों में शामिल किया जाएगा. अब सभी की निगाहें विधानसभा अध्यक्ष के फैसले पर टिकी हैं कि इस बहस के लिए दिन और समय कब तय किया जाता है.
 

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