Sadhvi prem Baisa Death Mystery: जोधपुर की साध्वी प्रेम बाईसा की संदिग्ध मौत की पुलिस जांच अब तीन जरूरी रिपोर्ट पर टिकी है: पोस्टमॉर्टम, विसरा और FSL. इन तीनों के आने के बाद ही पुलिस और जांच एजेंसियां इनसे सामने आए फैक्ट्स के आधार पर तय करेंगी कि साध्वी की मौत नेचुरल थी, ड्रग रिएक्शन से हुई थी या इसके पीछे कोई साजिश है. लेकिन उससे पहले लोग जानना चाहते हैं कि ये तीनों जांच क्या हैं और ये किसी की मौत की मिस्ट्री को सुलझाने में यह कैसे मदद करती हैं.
पोस्टमार्टम रिपोर्ट क्या है और कैसे होती है इसमें मृत शरीर की जांच
यह एक विस्तृत मेडिकल दस्तावेज होता है जो किसी व्यक्ति की मौत के बाद उसके शरीर की मेडिकल जांच के आधार पर तैयार किया जाता है. पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट मौत के हालात और क्या कोई बाहरी वजहें हो सकती हैं, इस बारे में शुरुआती जानकारी देती है. यह मर्डर केस में एक जरूरी मेडिकल डॉक्यूमेंट माना जाता है. इसे मेडिकल बोर्ड में सबसे अच्छे डॉक्टरों की देखरेख में किया जाता है.
विसरा रिपोर्ट क्या है
पोस्टमॉर्टम के दौरान, डॉक्टर शरीर के कुछ अंदरूनी अंगों के नमूने सुरक्षित रखते हैं, जिन्हें विसरा (viscera) कहते हैं. इनमें आम तौर पर पेट, लिवर, किडनी, तिल्ली और कभी-कभी खून के सैंपल शामिल होते हैं.
कैसे मिलेगी मौत की गुत्थी को सुलझाने में मदद
इसकी रिपोर्ट से पता चलता है कि मरने वाले के शरीर में कोई जहर, नशीली चीज, ड्रग या जहरीला केमिकल था या नहीं. अगर विसरा में मरने वाले के शरीर में जहर या किसी संदिग्ध केमिकल के निशान मिलते हैं, तो मौत को अननैचुरल माना जाता है. साध्वी प्रेम बैसा के मामले में, विसरा रिपोर्ट बहुत जरूरी है क्योंकि यह पता चला है कि मौत से पहले उन्हें एक इंजेक्शन दिया गया था और खाना खाने के बाद उनकी तबीयत बिगड़ गई थी. इसी वजह से उनकी विसरा जांच करने का फैसला किया गया है. जिससे पता चलेगा कि मौत जहर से हुई थी या किसी दवा के जानलेवा रिएक्शन से.
एफएसएल जांच भी बेहद अहम
FSL यानी फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी पूरे केस की साइंटिफिक जांच करती है. इसमें सिर्फ विसरा ही नहीं बल्कि क्राइम सीन से इकट्ठा किए गए हर सबूत की जांच की जाती है. जिसमें खाने में इस्तेमाल की गई दालें, मसाले, पानी, दवाइयां, इंजेक्शन की शीशियां, सिरिंज और दूसरी चीजें FSL भेजी जाती हैं.
FSL रिपोर्ट बताती है कि खाने में किसी तरह की जहरीली चीज तो नहीं मिलाई गई थी, इंजेक्शन में कोई मिलावट तो नहीं थी या दवाओं का ऐसा कॉम्बिनेशन तो नहीं दिया गया था जो जानलेवा साबित हो सकता था.
कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट मौत की शुरुआती मेडिकल तस्वीर देती है. विसरा रिपोर्ट यह तय करती है कि शरीर के भीतर क्या गया था और उसका असर क्या पड़ा. एफएसएल जांच यह साफ करती है कि वह पदार्थ कहां से आया और किस माध्यम से शरीर तक पहुंचा.साध्वी प्रेम बाईसा के मामले में पुलिस का कहना है कि जब तक पोस्टमार्टम, विसरा और एफएसएल की अंतिम रिपोर्ट सामने नहीं आती तब तक मौत के कारण पर कोई निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी.
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