Salumber News: राजस्थान के सलूंबर जिले में बच्चों की रहस्यमय मौत का सिलसिला थमने के बजाय और भी डरावना होता जा रहा है. लसाड़िया ब्लॉक की घाटा पंचायत में 5 मासूमों की जान जाने के बाद अब जलारा क्षेत्र में भी 2 और बच्चों की मौत का मामला सामने आया है. इस नई घटना ने प्रशासन की चिंता इसलिए बढ़ा दी है क्योंकि जलारा का घटनास्थल पुरानी जगह से करीब 40 किलोमीटर दूर है. इसके साथ ही अब जिले में इस अज्ञात बीमारी से मरने वाले बच्चों की कुल संख्या 7 हो गई है.
प्राइवेट क्लीनिक और घर की दवा से बिगड़ा मामला
चीफ मेडिकल एंड हेल्थ ऑफिसर महेंद्र कुमार ने NDTV राजस्थान को बताया, 'सलूंबर जिला अस्पताल में दो बच्चों को मृत अवस्था में लाया गया, जिनमें एक मात्र 2 महीने का मासूम था और दूसरा साढ़े चार साल का बच्चा. 2 महीने के बच्चे को डायरिया की शिकायत थी, जिसके लिए परिजनों ने पहले उसे स्थानीय प्राइवेट क्लीनिक में दिखाया और घर में ही रखी कोई पुरानी दवा दे दी. वहीं साढ़े चार साल के बच्चे को उल्टी और बुखार था, जिसे भी एक प्राइवेट क्लीनिक ले जाया गया. लेकिन तबीयत अधिक बिगड़ने पर जब तक उसे अस्पताल लाया गया, डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया. इन दो नई मौतों के बाद चिकित्सा विभाग की टीमें तुरंत जलारा क्षेत्र में एक्टिव हो गई हैं और प्रभावित गांवों में घर-घर जाकर स्क्रीनिंग की जा रही है.'

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उल्टी-दस्त और फिर शरीर में अकड़न का सेम पैटर्न
इस रहस्यमय बीमारी का पैटर्न बेहद डराने वाला है. इससे पहले उदयपुर मुख्यालय से 110 किमी दूर लसाड़िया के घाटा पंचायत में हुई 5 मौतों (दीपक, लक्ष्मण, सीमा, राहुल और काजल) के दौरान भी एक जैसे लक्षण देखे गए थे. परिजनों ने बताया था कि बच्चों को शाम या रात के समय हल्की उल्टी-दस्त होती थी और फिर अचानक शरीर में तेज अकड़न आ जाती थी. इसके बाद बच्चा बेहोश हो जाता और फिर उसे दोबारा होश ही नहीं आता था.
3690 टीमें मैदान में, 52 हजार घरों की स्क्रीनिंग शुरू
भजनलाल सरकार इस संकट को रोकने के लिए अब युद्धस्तर पर अभियान चला रही है. चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की प्रमुख शासन सचिव गायत्री राठौड़ और निदेशक डॉ. रवि प्रकाश शर्मा के अनुसार, पूरे उदयपुर संभाग में 3690 टीमें तैनात की गई हैं, जिन्होंने अब तक 52000 से अधिक घरों का सर्वे पूरा कर लिया है. इस सर्वे के दौरान 275 लक्षण वाले संदिग्ध मरीज चिन्हित किए गए हैं, जिनमें से 25 गंभीर मरीजों को बड़े अस्पतालों में रेफर किया गया है. विभाग ने मच्छरजनित बीमारियों की रोकथाम के लिए 2557 स्थानों पर एंटी-लार्वल गतिविधियां की हैं और अब तक 1,796 ब्लड स्लाइड्स के साथ 94 सैंपल विस्तृत जांच के लिए लिए गए हैं.

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पटवारी से लेकर चीफ सेक्रेटरी तक निगरानी में जुटे
एडिशनल कमिश्नर छोगाराम देवासी ने बताया कि प्रशासन पूरी तरह सतर्क है और पटवारी से लेकर चीफ सेक्रेटरी तक हर मूवमेंट पर नजर रखी जा रही है. घाटा पंचायत में ही 17 मेडिकल टीमें घर-घर स्क्रीनिंग कर रही हैं. अधिकारियों ने ग्रामीणों से सख्त अपील की है कि बच्चों में कोई भी लक्षण दिखने पर निजी क्लीनिकों या घर की दवाइयों के भरोसे न रहें और उन्हें तुरंत सरकारी अस्पताल ले जाएं क्योंकि समय पर सही इलाज ही एकमात्र बचाव है.

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