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राजस्थान में नवोदय विद्यालय की छात्रा की संदिग्ध मौत, बुखार होने पर स्कूल ने दी थी दवा...फिर लिवर-किडनी डैमेज

राजस्थान में नवोदय विद्यालय लोधा की छात्रा की अचानक मौत हो गई. परिजनों का आरोप है कि स्कूल प्रबंधन ने बच्ची की तबीयत खराब होने की जानकारी देर से दी और नाजुक स्थिति में ठीक इलाज भी नहीं करवाया.

राजस्थान में नवोदय विद्यालय की छात्रा की संदिग्ध मौत, बुखार होने पर स्कूल ने दी थी दवा...फिर लिवर-किडनी डैमेज
नवोदय विधायालय की छात्रा का मौत

Rajasthan News: बांसवाड़ा के जवाहर नवोदय विद्यालय, लोधा में अध्ययनरत सातवीं की छात्रा की मौत बुधवार (21 जनवरी) को हुआ था, इसके बाद मामला तूल पकड़ता जा रहा है. छात्रा की तबीयत स्कूल में ही बिगड़ी थी जिसके बाद उसका इलाज स्कूल द्वारा कराया जा रहा था. परिजनों ने विद्यालय प्रशासन पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाते हुए दावा किया है कि समय रहते सही इलाज नहीं मिलने और गलत दवाइयां देने से छात्रा की जान चली गई. बुधवार (21 जनवरी) सुबह कलेक्ट्रेट में हंगामे के बाद दोपहर को परिजनों ने सदर थाने में रिपोर्ट दर्ज करवाई. मृतका के चाचा शांतिलाल यादव ने आरोप लगाया कि स्कूल की लापरवाही और भारी मात्रा में दी गई दवाओं के कारण छात्रा के शरीर के महत्वपूर्ण अंगों-लीवर और किडनी काम करना बंद कर दिया, जिससे उसकी मौत हो गई.

जानकारी के अनुसार, मृतका शिवानी (13 वर्ष) को सोमवार (19 जनवरी) को बुखार आया था, जिस पर विद्यालय की एक शिक्षिका ने उसे दवाई दी. आरोप है कि दवा लेने के कुछ समय बाद ही शिवानी को पेट में तेज और असहनीय दर्द शुरू हो गया. हालत बिगड़ने पर उसे पहले ज़िला अस्पताल में इलाज करवाया फिर उसे अहमदाबाद रेफर किया गया, लेकिन रास्ते में तबीयत और खराब होने पर परिजन उसे गुजरात के हिम्मतनगर स्थित अस्पताल लेकर गए, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई.

14 को स्वस्थ छोड़ा था स्कूल 19 को गंभीर हालत में बुलाया

परिजनों के अनुसार, 14 जनवरी को छात्रा के पिता उसे पूरी तरह स्वस्थ हालत में स्कूल छोड़कर आए थे. 15 और 16 जनवरी को तबीयत खराब होने पर स्कूल स्टाफ ने वार्डन को छात्रा को घर भेजने की सलाह दी थी, लेकिन आरोप है कि वार्डन ने यह कहते हुए मना कर दिया कि बीमारी गंभीर नहीं है और छुट्टी की जरूरत नहीं है.

इलाज की जानकारी देर से

मृतका के चाचा शांतिलाल यादव ने बताया कि स्कूल प्रशासन ने छात्रा का इलाज पहले एक निजी अस्पताल और फिर एमजी अस्पताल में कराया. लेकिन परिजनों को इसकी सूचना समय पर नहीं दी गई. 19 जनवरी को फोन कर सिर्फ यह बताया गया कि बच्ची को सामान्य सर्दी-जुकाम और बुखार है. जब परिजनों का बेटा देव यादव छात्रा को लेने पहुंचा, तो उसकी हालत बेहद नाजुक थी. तेज बुखार, शरीर लाल और कमजोरी साफ नजर आ रही थी.

लिवर-किडनी डैमेज

परिजनों का आरोप है कि स्कूल में छात्रा को 500-500 MG की टैबलेट्स सहित अन्य हैवी दवाइयां दी गईं. उनका दावा है कि ओवरडोज या गलत दवाओं के असर से महज 24 घंटे के भीतर छात्रा का लीवर सूज गया और डॉक्टरों ने बताया कि उसकी दोनों किडनियां भी डैमेज हो चुकी थीं.

नवोदय प्राचार्य का पक्ष

विद्यालय के प्राचार्य अब्दुल हमीद ने आरोपों को नकारते हुए कहा कि जैसे ही छात्रा की तबीयत बिगड़ी, स्कूल प्रशासन ने उसे गंभीरता से लिया. विद्यालय की नर्स छात्रा को एमजी अस्पताल लेकर गई, जहां उसका इलाज करवाया गया और इसके बाद परिजनों को सूचना देकर छात्रा को उनके सुपुर्द कर दिया गया. बाहर जाकर इन्होंने कहा इलाज करवाया इसकी जानकारी नहीं, घटना का हमें बहुत दुख है .

पुलिस कार्रवाई

सदर थाना सीआई रूपसिंह ने बताया कि परिजनों ने दोपहर में विद्यालय प्रबंधन के खिलाफ रिपोर्ट दी है. मामले दर्ज कर पोस्टमार्टम की कार्रवाई की गई है. रिपोर्ट आने के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी. फिलहाल पोस्टमार्टम कराकर शव परिजनों को सुपुर्द कर दिया है.

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