
Vice President mimicry controversy: टीएमसी (तृणमूल कांग्रेस) के सांसद कल्याण बनर्जी (Kalyan Banerjee) द्वारा उपराष्ट्रपति जगदीप धनकड़ की "मिमिक्री" करना भारी पड़ता नजर आ रहा है. इसे लेकर देशभर में विरोध प्रदर्शन किए जा रहे हैं. राजस्थान के भरतपुर जिले में 'जिला जाट महासभा' के कार्यकर्ताओ द्वारा एम.एस.जे कॉलेज के मुख्य द्वार पर राज्यसभा के सभापति और उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ (Jagdeep Dhankhar) की नकल उतारकर हास्यापद और अशोभनीय रूप से मिमिक्री कर उनका अपमान करने को लेकर टीएमसी सांसद का पुतला फूंक कर विरोध प्रदर्शन किया गया है.

भरतपुर जिले में 'जिला जाट महासभा' के कार्यकर्ताओ द्वारा एम.एस.जे कॉलेज के मुख्य द्वार पर सांसद का पुतला फूंका.
इस मौके पर युवा जाट महासभा के अध्यक्ष लोकेश तमरौली ने बताया कि मंगलवार को संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान सांसदों के निलंबन मामले को लेकर संसद भवन के बाहर प्रदर्शन करते हुए टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी द्वारा राज्यसभा के सभापति और देश के उपराष्ट्रपति जगदीप धनकड़ की आपत्तिजनक हावभाव और शारीरिक रूपी बोल-चाल की नकल उतार कर मिमिक्री कर उनको अपमानित करने कार्य किया गया था. इसे कृत्य को लेकर जाट समाज कड़े शब्दों में निंदा करते हुए रोष व्यक्त करता हैं.
उपराष्ट्रपति की समाज में एक प्रतिष्ठा हैं, मान-सम्मान हैं. जिसको धूमिल कर चोट पहुंचाने का कार्य सांसद कल्याण बनर्जी द्वारा किया गया हैं. इसे लेकर पुतला दहन करते समय छात्र नेता विष्णु चौधरी खैमरा ने सांसद के खिलाफ ''जगदीप धनकड़ का अपमान-नही सहेगा राजस्थान'', ''कल्याण बनर्जी ' शर्म करो, शर्म नही तो डूब मरो'', के नारेबाजी की.
साथ ही यह भी कहा कि लोकतंत्र के मंदिर संसद परिसर में टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी द्वारा उनकी मिमक्री कर अपमान करना अत्यंत निंदनीय व दुर्भाग्यपूर्ण है. यह मात्र उपराष्ट्रपति का अपमान नहीं बल्कि किसानों, लोकतांत्रिक परंपराओं, संवैधानिक व्यवस्थाओं, संसदीय गरिमाओ व भारत के जन-जन का अपमान है. टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी द्वारा सार्वजनिक रूप से अगर माफी नहीं मांगी गई तो जाट महासभा आंदोलन करेगी.
जानिए कौन है कल्याण बनर्जी
कल्याण बनर्जी पश्चिम बंगाल की सेरामपुर सीट से सांसद हैं. वह पहली बार वर्ष 2009 में संसद आये. इससे पूर्व वह 2001 से 2006 तक पश्चिम बंगाल विधानसभा के सदस्य रह चुके हैं. उसके बाद वह साल 2007 से 2009 के बीच टीएमसी के उपाध्यक्ष रहे थे. फिर उन्होंने लोकसभा की ओर कदम बढ़ाया और लोकसभा चुनाव 2009 में जीतकर संसद पहुंचे. सांसद इससे पहले भी अपने बयानों को लेकर वह पहले भी विवादों में रहे हैं.