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रामदेवरा की रीवाइल्डिंग टनल में पहुंचे तीन गोडावण के चूजे, अब जंगल में उड़ान की तैयारी

इन तीनों चूजों को लगभग चार महीने तक टनल में रखा जाएगा, जहां उन्हें मरुस्थलीय मौसम, स्थानीय वनस्पति, कीट-पतंगों और प्राकृतिक वातावरण से परिचित कराया जाएगा.

रामदेवरा की रीवाइल्डिंग टनल में पहुंचे तीन गोडावण के चूजे, अब जंगल में उड़ान की तैयारी
रामदेवरा की रीवाइल्डिंग टनल में पहुंचे तीन गोडावण के चूजे

देश के सबसे संकटग्रस्त पक्षियों में शामिल ग्रेट इंडियन बस्टर्ड (गोडावण) के संरक्षण अभियान में जैसलमेर से एक बड़ी और उम्मीद जगाने वाली सफलता सामने आई है. पोकरण के रामदेवरा गोडावण संरक्षण एवं प्रजनन केंद्र से लगभग एक माह आयु के तीन गोडावण चूजों (R9, R10 और R11) का सफलतापूर्वक रीवाइल्डिंग स्ट्रक्चर (टनल) में ट्रांसलोकेशन किया गया है. यह कदम भविष्य में इन चूजों को प्राकृतिक आवास में सुरक्षित रूप से छोड़ने की दिशा में बेहद अहम माना जा रहा है.

गोडावणों की संख्या 38 हुई

उप वन संरक्षक (वन्यजीव) अशोक सिंह भाटी ने बताया कि राजस्थान वन विभाग और वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया संयुक्त रूप से गोडावण संरक्षण के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं. 24 जुलाई को इन तीनों चूजों को रामदेवरा ब्रीडिंग सेंटर से विशेष रूप से तैयार किए गए रीवाइल्डिंग स्ट्रक्चर में स्थानांतरित किया गया है. वर्तमान में रामदेवरा और सम स्थित संरक्षण एवं प्रजनन केंद्रों में गोडावणों की कुल संख्या बढ़कर 38 हो गई है, जिसके बाद अब चरणबद्ध तरीके से इन्हें प्राकृतिक आवास में वापस छोड़ने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है.

करीब दो वर्षों में तैयार हुए इस अत्याधुनिक रीवाइल्डिंग स्ट्रक्चर का निर्माण राजस्थान स्टेट रोड डेवलपमेंट एंड कंस्ट्रक्शन कॉर्पोरेशन (RSRDC) ने लगभग ₹9.25 करोड़ की लागत से किया है. इस संरचना का उद्देश्य ब्रीडिंग सेंटर में जन्मे चूजों को खुले रेगिस्तानी वातावरण में छोड़ने से पहले प्राकृतिक परिस्थितियों के अनुरूप तैयार करना है.

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4 महीने तक टनल में रहेंगे तीनों चूजे

उप वन संरक्षक (वन्यजीव) अशोक सिंह ने बताया कि इन तीनों चूजों को लगभग चार महीने तक टनल में रखा जाएगा, जहां उन्हें मरुस्थलीय मौसम, स्थानीय वनस्पति, कीट-पतंगों और प्राकृतिक वातावरण से परिचित कराया जाएगा. साथ ही उन्हें शिकारियों से बचाव, भोजन की तलाश और खुले क्षेत्र में जीवित रहने के व्यवहार का प्रशिक्षण भी दिया जाएगा. इस दौरान वन विभाग और विशेषज्ञों की टीम इनके स्वास्थ्य, व्यवहार और अनुकूलन क्षमता पर लगातार नजर रखेगी.

प्रशिक्षण अवधि पूरी होने के बाद इन चूजों को डेजर्ट नेशनल पार्क के प्राकृतिक आवास में चरणबद्ध तरीके से स्वतंत्र छोड़ा जाएगा. अशोक सिंह भाटी ने बताया कि यह पहल भारत में गोडावण के रीवाइल्डिंग कार्यक्रम की एक महत्वपूर्ण कड़ी साबित होगी और भविष्य में विलुप्ति के कगार पर पहुंच चुके इस दुर्लभ पक्षी की जंगली आबादी बढ़ाने में मील का पत्थर साबित होगी.

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