महिला दिवस पर मिलिए कोटा की उस बहादुर महिला से, जिसने अपने साहस और समर्पण से अलग पहचान बनाई है. कोटा वन विभाग की वनकर्मी प्रेम कंवर को आज लोग ‘क्रोकोडाइल क्वीन' के नाम से जानते हैं. चंबल नदी के किनारे मगरमच्छों का रेस्क्यू करना आसान काम नहीं है, लेकिन प्रेम कंवर ने अपनी बहादुरी से इसे संभव कर दिखाया है.
मगरमच्छों को चंबल नदी में छोड़ती हैं
कोटा में चंबल नदी और आसपास के इलाकों में कई बार मगरमच्छ आबादी वाले क्षेत्रों में पहुंच जाते हैं. ऐसे समय में वन विभाग की टीम उन्हें सुरक्षित पकड़कर नदी में छोड़ने का काम करती है. इस टीम की अहम सदस्य प्रेम कंवर हैं, जो अब तक कई मगरमच्छों का सफल रेस्क्यू कर चुकी हैं. मगरमच्छ जैसे खतरनाक वन्यजीव के सामने डटकर खड़ी होने वाली प्रेम कंवर को लोग अब ‘क्रोकोडाइल क्वीन' के नाम से पहचानने लगे हैं.

कोटा की प्रेम कंवर मगरमच्छों का रेस्क्यू करके चंबल नदी में छोड़ती हैं.
आस्ट्रेलिया में विशेष ट्रेनिंग ली हैं
प्रेम कंवर ने मगरमच्छ रेस्क्यू की बारीकियां सीखने के लिए ऑस्ट्रेलिया में विशेष ट्रेनिंग भी लिया है. ट्रेनिंग के बाद उन्होंने अपने अनुभव का इस्तेमाल करते हुए कोटा और आसपास के इलाकों में कई सफल रेस्क्यू ऑपरेशन किए हैं. चंबल नदी में मगरमच्छों की बड़ी संख्या होने के कारण कई बार वे नदी से निकलकर आबादी वाले इलाकों तक पहुंच जाते हैं. ऐसे में प्रेम कंवर और उनकी टीम बिना डर के उन्हें सुरक्षित पकड़कर वापस नदी में छोड़ती हैं.
महिला दिवस के मौके पर प्रेम कंवर ने कहा कि आज महिलाएं किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं हैं. अगर लक्ष्य तय हो और मेहनत करने का जज़्बा हो तो महिलाएं हर चुनौती को पार कर सकती हैं. उन्होंने कहा कि सपनों को पूरा करने के लिए कड़ी मेहनत और आत्मविश्वास जरूरी है.
प्रेम कंवर महिलाओं के लिए बनीं प्रेरणा
महिलाएं आज हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं. जरूरी है कि हम अपने सपनों पर भरोसा रखें और मेहनत करते रहें. खतरनाक मगरमच्छों के बीच काम करने वाली प्रेम कंवर आज न केवल वन विभाग की मजबूत कड़ी हैं, बल्कि महिलाओं के लिए प्रेरणा भी बन चुकी हैं. महिला दिवस पर उनका संदेश साफ है. हिम्मत, मेहनत और आत्मविश्वास के साथ महिलाएं किसी भी क्षेत्र में नई ऊंचाइयां हासिल कर सकती हैं.
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