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This Article is From Mar 08, 2026

महिला दिवसः 94 साल की पाना देवी दौड़ती हैं 100 मीटर रेस, फेंकती हैं भाला-गोला और डिस्कस, अब बस हैं दो अरमान

पाना देवी गोदारा के पांच बेटे और तीन बेटियों का बड़ा परिवार है. उनके पोते जय किशन गोदारा ने ही दादी के हौसलों को उड़ान दी. इसके चलते पाना देवी अब तक अपने करियर में कुल 16 गोल्ड मेडल जीत चुकी हैं.

महिला दिवसः 94 साल की पाना देवी दौड़ती हैं 100 मीटर रेस, फेंकती हैं भाला-गोला और डिस्कस, अब बस हैं दो अरमान

Rajasthan News: घाघरा चोली पहने, सिर पर ओढ़नी ओढ़े, फुर्ती से चलती और गायों की सेवा करती यह और कोई नहीं बल्कि बीकानेर जिले की नोखा तहसील के अणखीसर गांव की रहने वाली 94 वर्षीय पाना देवी गोदारा हैं. जिन्होंने चेन्नई में आयोजित 23वीं एशियन मास्टर्स एथलेटिक्स चैंपियनशिप में अपनी कैटेगरी के खिलाड़ियों को पछाड़ते हुए एक नहीं बल्कि चार गोल्ड मेडल अपने नाम किए. पाना देवी ने 100 मीटर दौड़, शॉट पुट, जैवलिन थ्रो और डिस्कस थ्रो जैसी चार अलग-अलग प्रतियोगिताओं में शानदार प्रदर्शन कर न सिर्फ भारत बल्कि पूरे राजस्थान का नाम विश्व पटल पर रोशन किया.

94 वर्ष की इस उम्र में पाना देवी गोदारा सुबह 5 बजे उठती हैं. वह घर के काम से लेकर गाय-भैंसों की सेवा करने के साथ-साथ खाना भी बनाती हैं. जब पाना देवी से उनकी तंदुरुस्ती और सेहत का राज पूछा गया तो उन्होंने मुस्कुराते हुए बताया कि घी और दूध उनकी ताकत हैं. वे सुबह उठकर नियमित रूप से योग और व्यायाम करती हैं. वे रोजाना अपने भोजन में बाजरे की रोटी और देशी खाना खाती हैं. उन्होंने कहा कि आजकल की पीढ़ी नशे का सेवन करती है, जिससे उन्हें दूर रहना चाहिए. पाना देवी गोदारा से जब उनकी इच्छा पूछी गई तो उन्होंने कहा कि इस उम्र में अब विदेश में खेलकर भारत का नाम रोशन करना चाहती हैं और साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलने की भी इच्छा है.

''एक दिव्यांग खेल सकता है तो दादी क्यों नहीं?''

वहीं पाना देवी के पोते जय श्रवण गोदारा ने बताया कि उनके भाई कोच हैं. वे रोजाना स्टेडियम में प्रैक्टिस करने जाते थे. इस दौरान उनकी नजर एक दिव्यांग खिलाड़ी पर पड़ी, तब उन्हें एहसास हुआ कि अगर एक दिव्यांग खेल सकता है तो दादी क्यों नहीं? इसके बाद उन्होंने दादी पाना देवी को मनाया और प्रतिदिन प्रैक्टिस के लिए स्टेडियम लाने लगे. फिर उन्होंने प्रतियोगिताओं में हिस्सा लिया और जिला, राज्य तथा राष्ट्रीय स्तर पर अलग-अलग कैटेगरी में खेलकर गोल्ड मेडल जीते.

''इस उम्र में भी दादी का काम करना और खेलना बड़ी बात''

श्रवण गोदारा ने राजस्थान सरकार और केंद्र सरकार से अपील की है कि उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत नहीं है, इसलिए पाना देवी को विदेश में होने वाली प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए आर्थिक मदद दी जाए, ताकि वे अपनी प्रतिभा से एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का नाम रोशन कर सकें. वहीं उनकी बहू राधा देवी ने बताया कि “गोल्डन दादी” के नाम से अब उनके परिवार को लोग पहचानने लगे हैं. इस उम्र में भी दादी का काम करना और खेलना बड़ी बात है. सुबह से लेकर शाम तक सभी काम वे खुद करती हैं. परिवार चाहता है कि दादी आगे भी देश के लिए खेलती रहें.

“गोल्डन दादी” के नाम से भी जाना जाने लगा

पाना देवी गोदारा के पांच बेटे और तीन बेटियों का बड़ा परिवार है. उनके पोते जय किशन गोदारा ने ही दादी के हौसलों को उड़ान दी. इसके चलते पाना देवी अब तक अपने करियर में कुल 16 गोल्ड मेडल जीत चुकी हैं. इसी वजह से उन्हें “गोल्डन दादी” के नाम से भी जाना जाने लगा है. दादी की इतनी फुर्ती देखकर आज की महिलाएं भी हैरान हैं. पाना देवी के जज्बे ने साबित कर दिया है कि सपनों को पूरा करने की कोई उम्र नहीं होती. अगर हौसले बुलंद हों तो उम्र मायने नहीं रखती. यह दादी सिर्फ एक साधारण महिला नहीं बल्कि एक प्रेरणादायक एथलीट भी हैं.

पाना देवी ने चेन्नई से पहले बेंगलुरु में हुई 45वीं नेशनल मास्टर्स एथलेटिक्स चैंपियनशिप में शॉट पुट, 100 मीटर दौड़ और डिस्कस थ्रो में स्वर्ण पदक जीतकर अपनी अद्भुत फिटनेस और खेल कौशल का परिचय दिया था. हालांकि आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण वे पिछले वर्ष स्वीडन में आयोजित अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट में भाग नहीं ले सकीं, लेकिन इस बार वे वह मौका गंवाना नहीं चाहतीं.

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