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फर्जी ATS अफसर बन युवक का अपहरण, 98 लाख की फिरौती; जानें कैसे बची जान 

पूछताछ करने की बात कहकर युवक को गाड़ी में बैठा ले गए. रास्‍ते में युवक को पता चला क‍ि उसका अपहरण हो गया. 

फर्जी ATS अफसर बन युवक का अपहरण, 98 लाख की फिरौती; जानें कैसे बची जान 
किडनैपिंग के दौरान का CCTV फुटेज का स्क्रीनशॉट. (सोशल मीडिया पर वायरल)

सिरोही: एटीएस अधिकारी बनकर आए बदमाशों ने माउंट आबू के एक रिसोर्ट से युवक का अपहरण कर ल‍िया. 98 लाख रुपये की फिरौती मांगी. 10 जून की रात में माउंट आबू के एक होटल सिरोही जिले के मंडवारिया निवासी झालाराम रुका था. उसी रात जयपुर से एटीएस अधिकारी बनकर 5-6 लोग आए. झालाराम से पूछताछ की बात कहकर उसे गाड़ी में बैठाकर बाड़मेर अपहरण कर ले गए. बदमाश रास्ते में वीडियो कॉल करके झालाराम की तस्दीक करते रहे.  बाद में डेढ़ लाख रुपए देकर उसे छोड़ दिया.  

सुबह करीब साढ़े 3 बजे अपहरण 

झालाराम के अनुसार, भाेर में करीब 3.30 बजे किसी ने उनके कमरे का दरवाजा जोर-जोर से खटखटाया. जब उन्होंने दरवाजा खोला तो बाहर लोग खड़े थे. उनमें से एक ने खुद को जयपुर ATS अधिकारी विकास कुमार बताया.  झालाराम को लगा कि अगर उन्होंने कुछ गलत नहीं किया है, तो पुलिस उन्हें थाने ही ले जाएगी, लेकिन बदमाशों ने उनकी गाड़ी को पुलिस स्टेशन की तरफ ले जाने के बजाय ढूंढी पुलिया की ओर मोड़ दिया, जिससे झालाराम के मन में खौफ पैदा हो गया. 

वीडियो कॉल पर रची साजिश

अपहरणकर्ता झालाराम को माधव पुलिया ले गए.  वहां उन्होंने कुछ लोगों को वीडियो कॉल किया, ज‍िससे झालाराम की पहचान की पुष्टि हो सके. वीडियो कॉल पर भूतगांव निवासी खुशवंत रावल और मणादर निवासी राजू राम रावल मौजूद थे. उन्होंने किसी पुराने पैसे के लेन-देन का जिक्र किया. जब झालाराम ने ऐसे किसी भी लेन-देन से इनकार किया, तो फोन पर मौजूद शख्स ने अपहरणकर्ताओं को आदेश दिया. 

"इसे ठिकाने लेकर जाओ"

फोन पर कहा क‍ि तुम इसको ठिकाने लेकर जाओ तो पता चलेगा. इस पूरी साजिश में सोडो की ढाणी निवासी युवराज सिंह सोडा भी शामिल था. युवराज ने अपहरणकर्ताओं से कहा कि इसे छोड़ना मत, यह पैसे मंगवा सकता है.  इसके बाद झालाराम को गाड़ी में डालकर घुमाया जाने लगा. 

पाकिस्तान बॉर्डर के पास मौत का फरमान

बदमाश पीड़ित को बाड़मेर से करीब 30-35 किलोमीटर दूर पाकिस्तान बॉर्डर के पास परा गांव के सुनसान धोरों (रेत के टीलों) में ले गए.  वहां उनसे जबरदस्ती कुछ कोरे कागजों पर हस्ताक्षर करवाए गए, और दबाव डालकर झूठे वीडियो भी बनवाए गए, ताकि बाद में उन्हें फंसाया जा सके. 

अपहरणकर्ताओं ने पहले 20 लाख रुपये, बाद में 5 लाख रुपये मांगे.  जब झालाराम ने कहा कि उनके पास इतने पैसे नहीं हैं, तो खुशवंत रावल ने फोन पर एक खौफनाक फरमान सुनाया.  पैसे की मुझे कोई जरूरत ही नहीं है,  इसको मार कर फेंक दो जो मैंने तुमको पैसे कहे वो मैं दे दूंगा. 

1.5 लाख रुपये देकर बचाई जान

लगातार मिल रही जान से मारने की धमकियों से घबराकर झालाराम ने अपनी जान बचाने का एक रास्ता निकाला.  उन्होंने बताया कि उनकी गाड़ी में 1.5 लाख रुपये रखे हैं. पैसे मिलने के बाद अपहरणकर्ताओं का रवैया थोड़ा बदला.  उन्होंने झालाराम को खाना खिलाया और फिर उसे एक हाईवे पर ले जाकर छोड़ दिया. पुलिस इस मामले में पूरी गंभीरता से जांच कर रही है और बाड़मेर जाकर घटनास्थल का मुआयना भी कर चुकी है.  हालांकि, इस घटना ने होटल प्रबंधन की सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. 

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