
राजस्थान के भीलवाड़ा जिले के अजमेर हाईवे पर स्थित रायला गांव में तालाब में अतिक्रमण और निर्माण को लेकर एनजीटी नाराज है. नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल सेंट्रल जोनल बेंच भोपाल ने रायला गांव के तालाब के स्वरूप को बिगड़ने पर नाराजगी जताई है. एनजीटी के न्यायाधिपति सुधीर अग्रवाल एवं विशेषज्ञ सदस्य अफरोज अहमद की बेंच ने रायला निवासी ओमप्रकाश सोमानी की याचिका पर धर्म तालाब रायला के भराव क्षेत्र में केचमेंट एरिया में हुए निर्माण को ध्वस्त करने के आदेश पारित किए है.
एनजीटी ने भीलवाड़ा कलेक्टर को पाबंद किया है कि वह 15 फरवरी 2024 तक किसी भी सूरत में तालाब के कैचमेंट और बहाव क्षेत्र में हुए निर्माणों को तोड़कर कोर्ट में रिपोर्ट पेश करें. एनजीटी ने सरपंच गीता देवी जाट व सरपंच पति जगदीश जाट को दोषी मानते हुए तालाब की मूल स्थिति में वापस लाने एवं इनसे 2 करोड़ वसूल कर उसे तालाब के लिए खर्च करने के आदेश दिए है.
साथ ही लाथ जिला कलेक्टर भीलवाड़ा द्वारा एक अनुपालना रिपोर्ट रजिस्ट्रार, सेन्ट्रल जोन, भोपाल बेंच को 6 महीने के भीतर 15 फरवरी.2024 से पहले पेश करने का आदेश दिया है. एनजीटी भोपाल के निर्णय का स्वागत करते हुए पर्यावरणविद् बाबूलाल जाजू ने कहा कि इससे निश्चित रूप से झील जलाशयों तालाबों को संरक्षण मिलेगा एवं उनकी भूमि अतिक्रमित होने से बचेगी.