
राजस्थान के हनुमागढ़ में एक अनोखा मामला सामने आ रहा है, जहां डीजल की तस्करी करने के लिए तस्करों ने एक नायाब तरीका ढूंढ निकाला है. डीजल-पेट्रोल तस्करों ने चलता फिरता पेट्रोल पंप बनाया है. पंजाब और हरियाणा बॉर्डर पर होने के कारण यहां डीजल पेट्रोल की तस्करी बड़े पैमाने पर की जाती है. पुलिस ने कार्रवाई कर एक तस्कर को गिरफ्तार कर लिया है. तस्करी से पेट्रोल पंप संचालकों में रोष है.
तस्कर पिकअप गाड़ी पर चलता फिरता पेट्रोल पंप बना कर पेट्रोलियम पदार्थों की बिक्री कर रहे हैं. हाईवे पर अमूमन ऐसे पेट्रोल पंपों को देखा जा सकता है, जिनमें शहर में लगे पेट्रोल पम्पों से कम दाम पर पेट्रोल-डीजल बेचा जाता है, जिससे पेट्रोल पंप संचालकों को काफी नुकसान हो रहा है.
इस कड़ी में आज रावतसर पुलिस उपाधीक्षक पूनम चौहान को सूचना मिलने पर उन्होंने एक ऐसे चलते-फिरते पेट्रोल पंप को जब्त किया, जिसमें मशीनें लगी हुई हैं और इनसे पेट्रोल बेचा जा रहा है. रावतसर डीवाईएसपी पूनम चौहान के अनुसार, फोन पर सूचना मिली की खोडां तिराहे के पास खड़ी एक पिकअप जीप में पेट्रोल पंप लगा हुआ है और मौके पर पिकअप से डंपर में तेल डाला जा रहा है.
पुलिस ने मौके पर जाकर पिकअप को चेक किया तो उसमें डीजल भरने की मशीनें फिट की गई थी और उसमें डीजल भी था. पुलिस ने पिकअप चालक को हिरासत में लेकर पूछताछ की. चालक की पहचान संदीप कुमार पुत्र भगवाना राम सियाग निवासी हरदासवाली के रूप में हुई है. उसके पास से डीजल बिक्री के15000 से ज्यादा नकदी और करीब 900 लीटर डीजल बरामद किया गया.
पुलिस अधिकारी का कहना है कि उन्हें लंबे समय से सूचना मिल रही थी कि अवैध रूप से डीजल की तस्करी कर बेचा जा रहा है. पिक अप के पीछे KD लिखा हुआ था, पुलिस इसकी भी जांच कर रही है कि KD का मतलब क्या है, ज़िले में ऐसे और भी पेट्रोल पंप सक्रिय तो नहीं हैं और इनका सरगना कौन है.
गौरतलब है कि जिले की सीमा से लगते हरियाणा और पंजाब से प्रतिदिन हजारों लीटर डीजल और पेट्रोल की तस्करी होती है और इनको हाईवे पर सप्लाई किया जाता है. तस्करी के इस खेल में सबसे बड़ा कारण है पंजाब और हरियाणा से राजस्थान में पेट्रोलियम पदार्थ 10 रुपये ज्यादा महंगा है.
तेल तस्करी के इस खेल में कई गाड़ियां लगी हुई हैं और इस तरह के चलते पेट्रोल पम्प भी कई गाड़ियों में लगे हुए हैं. दूसरी तरफ डीजल और पेट्रोल की तस्करी से राजस्थान के पेट्रोल पंप संचालकों में रोष है, तस्करी के इस बड़े खेल में रसद विभाग की मिलीभगत से भी इंकार नहीं किया जा सकता.