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राजस्थान में आबाद थे इंसानों के पूर्वज ‘होमो इरेक्टस’, डीडवाना में खुदाई में मिली 8 लाख साल पुरानी कुल्हाड़ी

'Homo erectus' Inhabited In Rajasthan: डीडवाना में प्रागैतिहासिक काल की सभ्यता के बारे में फ्रांस के वैज्ञानिकों सहित कई वैज्ञानिक शोध कर यहां विश्व की सबसे प्राचीन सभ्यता होने का दावा कर चुके हैं. इन शोध के बारे में विदेशों में पढ़ाया भी जा रहा है, लेकिन राजस्थान की पाठ्य-पुस्तकें अब तक इस विषय से अछूती हैं.

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राजस्थान में आबाद थे इंसानों के पूर्वज ‘होमो इरेक्टस’, डीडवाना में खुदाई में मिली 8 लाख साल पुरानी कुल्हाड़ी
डीडवाना के आर 16 खास क्षेत्र में खुदाई में मिले 'होमो इरक्टस' के सुबूत

Human Ancestors 'Homo Erectus: विश्व में सबसे प्राचीन सभ्यता सिंघु, हड़प्पा और मिस्र की सभ्यता को माना जाता है, लेकिन डीडवाना में इससे भी हजारों सालों पहले मानव सभ्यता का विकास हुआ था. वैज्ञानिकों को डीडवाना क्षेत्र में खुदाई में हस्त कुल्हाड़ी मिली है, जो एशूलियन काल खंड अर्थात करीब 8 लाख वर्ष पूर्व का साक्षी रहा है.

एशलियन काल खंड में ‘होमो इरेक्ट्स' यानी वर्तमान मानवों के पूर्वज डीडवाना में आबाद थे. डीडवाना में होमो इरेक्टस के आबाद होने के कई प्रमाण मिल चुके हैं. फ्रांस के वैज्ञानिकों सहित अनेक पुरातात्विक विशेषज्ञ शोध कर यहां विश्व की सबसे प्राचीन सभ्यता होने का दावा कर चुके हैं.

डीडवाना में खुदाई मिली प्रोगैतिहासिक काल खंड के औजार

विशेषज्ञों द्वारा डीडवाना में की गई खुदाई में प्रागैतिहासिक काल खंड के हस्त कुल्हाड़ और आर्टिफेक्ट्स भी मिल चुके हैं. सवाल है कि आखिर कौन थे होमो इरेक्टस यानी मानव के पूर्वज और किस प्रकार प्रागैतिहासिक काल की सभ्यता डीडवाना में आबाद रहे, इन सवालों के जवाब पुरातात्विक विशेषज्ञों ने अपने शोध में निकाल लिए हैं.

डीडवाना में खुदाई में मिले होमो इरक्ट्स निर्मित औजार

डीडवाना में खुदाई में मिले होमो इरक्ट्स निर्मित औजार

डीडवाना में जहां खुदाई की गई वैज्ञानिकों ने उसे '16 आर' नाम दिया 

 रेत के टीले से निर्मित बांगड़ नहर की पालों का एक खास क्षेत्र "16 आर" के नाम से जाना जाता है. यही वो स्थान है, जो प्रागैतिहासिक काल खंड के प्रमाण अपने अंदर समेटे हुए हैं. इस रेत के टीले में जिस स्थान पर वैज्ञानिकों ने खुदाई की थी, उसे सर्वे आफ इण्डिया की टोपोशीट्स के अनुसार ‘16 आर' का नाम दिया गया है.

खुदाई में मिले औजार  25 हजार से 3 लाख 50 हजार वर्ष पूर्व की आंकी गई

डीडवाना में नामांकित" खास क्षेत्र '16 आर' और सिंघी सरोवर के आसपास 1980 के दशक में ‘एशूलियन इण्डस्ट्रीज' की खुदाई की गई थी, जिसमें मानव निर्मित आकृतियां यानी आर्टिफेक्ट्स और बड़े बड़े हस्त कुल्हाड़ मिले. वैज्ञानिकों द्वारा इन पुरातात्विक आर्टिफेक्टस की आयु 25 हजार से 3 लाख 50 हजार वर्ष पूर्व आंकी गई है.

डीडवाना में प्रागैतिहासिक काल की सभ्यता के बारे में फ्रांस के वैज्ञानिकों सहित कई वैज्ञानिक शोध कर यहां विश्व की सबसे प्राचीन सभ्यता होने का दावा कर चुके हैं. इन शोध के बारे में विदेशों में पढ़ाया भी जा रहा है, लेकिन राजस्थान की पाठ्य-पुस्तकें अब तक इस विषय से अछूती हैं.
डीडवाना में विश्व की सबसे पुरानी सभ्यता मिलने का दावा

डीडवाना में विश्व की सबसे पुरानी सभ्यता मिलने का दावा

मानव निर्मित आर्टिफेक्ट्स से होमो इरेक्टस के आबाद होने का दावा

वहीं, सिंघी नालाब में एशूलियन निक्षेप से क्वार्टज स्फाटिक के 6 क्रिस्टल खोजे गए है, जो होमोनिन के आकर्षक वस्तुओं के संग्रहण करने के स्वभाव की ओर संकेत करते है. हालांकि यहां जीवाश्मों नहीं मिले, लेकिन मानव निर्मित पत्थर कलाकृतियों आर्टिफेक्ट्स से यहां होमो इरेक्टस के आबाद होने का दावा किया गया है.

लाखों साल पहले आबाद रहे होमोनिन की विलुप्त प्रजाति है होमो इरेक्टस'

 डीडवाना में आबाद रहे ‘होमो इरेक्टस' लाखों साल पहले आबाद रहे होमोनिन की विलुप्त प्रजाति है, जिसका उद्भव अफ्रिका में हुआ था, वहां से वे जार्जिया, भारत, श्रीलंका, चीन व जावा में फैल गए. इन्हें ‘अपराइट मैन' भी कहते है. ये प्लीस्टोसीन काल में जीवित रहे, जिनके जीवाश्म 1 लाख 43 हजार से 18 लाख वर्ष तक की आयु के है.

2.5 से 4 लाख वर्ष पूर्व अस्तित्व में आया आज का मानव होमो सेपियन्स 

वर्तमान मानव ‘होमो सेपियन्स' कहलाते है, जिनका उद्भव ढाई से चार लाख वर्ष पूर्व तक माना गया है, इन्हें ‘वाइस मैन' कहा गया है. इस सभ्यता के बारे में वैज्ञानिक व भूगर्भशास्त्री डॉ. अरूण व्यास ने भी शोध किए हैं और एक किताब की लिखी है, जिसमें उन्होंने इस सभ्यता की विस्तार से जानकारी दी है.

खुदाई में मिली 8 लाख पुरानी होमा इरक्टस निर्मित सभ्यता के सुबूत

खुदाई में मिली 8 लाख पुरानी होमा इरक्टस निर्मित सभ्यता के सुबूत

डीडवाना में ‘होमो इरेक्ट्स' के अनेक मानव निर्मित आकृतियां पाई गई

डॉ अरुण व्यास के अनुसार डीडवाना में ‘होमो इरेक्ट्स' के प्रमाण स्वरूप अनेक मानव निर्मित आकृतियां पाई गई है, जिनमें मुख्यत: पत्थरों से बने हथियार है. उन्होंने बताया कि पुणे के डेक्कन कॉलेज के डॉ. वी.एन. मिश्रा व डॉ. एस. एन. राजगुरू के निर्देशन में 1980 के दशक में सिंघी तालाब व आस-पास के क्षेत्रों में ‘एशूलियन इण्डस्ट्रीज' की खुदाई की गई, जिसमें मानव निर्मित आकृतियां (आर्टिफेक्ट्स) और बड़े बड़े हस्त कुल्हाड़ मिले थे.

डॉ. अरुण व्यास के अनुसार ‘16 आर' नामक स्थान मानव विकास व सभ्यता की गवाह स्थली है, इस स्थान को मोनुमेंटल स्मारक या जियोलॉजिकल पार्क के रुप में सरंक्षित करने की दरकार है, ताकि देश विदेश के पर्यटक यहां आकर मानव विकास व सभ्यता को देख सके.

डीडवाना में खुदाई के दौरान वैज्ञानिकों को करीब 1300 आर्टिफेक्ट्स मिले

खुदाई में छोटे औजार, बड़े काटने के औजार जैसे ‘चौपर', पोलीहेण्ड्रोस' व ‘स्पेरोइड्स' इत्यादि करीब 1300 आर्टिफेक्ट्स मिले, इनमें से 90 प्रतिशत मारवाड़ बालिया की पहाड़ी की कायान्तरित चट्टानों से निर्मित हैं. सिंघी तालाब से पहाड़ी की दूरी करीब 3 किमी है, ये चट्टानें मुख्यत: ‘क्वार्टजाइट्स' है. इससे स्पष्ट है कि पुरा ऐतिहासिक मानव झील के किनारे आबाद थे.

फ्रांस की क्लेरी गेलार्ड ने एशिलियन का समयकाल 8 लाख वर्ष पूर्व माना

फ्रांस की क्लेरी गेलार्ड द्वारा 1980 के दशक में मध्य पेलियोलिथिक टूल्स प्राप्त किए गए थे. क्लेरी गेलार्ड के मतानुसार अमरपुरा में एशूलियन का समयकाल 8 लाख वर्ष पूर्व का है. उस समय एशिया के अधिकतर क्षेत्र में ‘होमो इरेक्ट्स' आबाद थे और वे भारत में एशूलियन इण्ड्रस्ट्रीज के शिल्पकार थे.

फ्रांस समेत कई देशों के पुरातात्विक वैज्ञानिक कर चुके हैं शोध

फ्रांस समेत कई देशों के पुरातात्विक वैज्ञानिक कर चुके हैं शोध

डीडवाना में विश्व की सबसे प्राचीन सभ्यता होने का दावा कर चुके हैं वैज्ञानिक

डीडवाना में प्रागैतिहासिक काल की सभ्यता के बारे में फ्रांस के वैज्ञानिकों सहित कई वैज्ञानिक शोध कर यहां विश्व की सबसे प्राचीन सभ्यता होने का दावा कर चुके हैं. इन शोध के बारे में विदेशों में पढ़ाया भी जा रहा है, लेकिन राजस्थान की पाठ्यपुस्तकें अब तक इस विषय से अछूती हैं.

डीडवाना की ‘16 आर' जगह मानव विकास व सभ्यता की गवाह स्थली

डॉ. अरुण व्यास के अनुसार ‘16 आर' नामक यह स्थान मानव विकास व सभ्यता की गवाह स्थली है, ऐसे में इस स्थान को मोनुमेंटल स्मारक या जियोलॉजिकल पार्क के रुप में सरंक्षित करने की दरकार है, ताकि देश विदेश के पर्यटक यहां आकर मानव विकास व सभ्यता के इस स्थान को देख सके.

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