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राजस्थान में एक ऐसा संस्थान जो 17 वर्षों से महिलाओं को दे रहा रोजगार और बच्चों को शिक्षा के स्कॉलरशिप

जोधपुर में 40 वर्षीय गोविंद सिंह राठौड़ पिछले 17 वर्षों से अपने सम्भली संस्थान के जरिए महिलाओं और बच्चों के सशक्तिकरण के लिए जुटे हुए हैं.

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राजस्थान में एक ऐसा संस्थान जो 17 वर्षों से महिलाओं को दे रहा रोजगार और बच्चों को शिक्षा के स्कॉलरशिप

Jodhpur News: इसमें कोई संदेह नहीं कि आज भारत में महिलाओं की भागीदारी हर क्षेत्र में बढ़ रही है. जहां महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए सरकार प्रयास कर ही रही है. वहीं जोधपुर में 40 वर्षीय गोविंद सिंह राठौड़ पिछले 17 वर्षों से अपने सम्भली संस्थान के जरिए महिलाओं और बच्चों के सशक्तिकरण के लिए जुटे हुए हैं. महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ने के लिए अब तक करीब 15000 से अधिक महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ने के साथ ही 5000 से अधिक बच्चों को शिक्षा से जोड़ने के लिए स्कॉलरशिप भी दे चुके है. इसके अलावा समलैंगिक वर्ग के लिए भी निस्वार्थ भाव से उन्हें स्वरोजगार से जोड़ने के साथी आत्मनिर्भर बनाने के लिए भी कार्य कर रही है. जहां वर्ष 2007 में शुरू हुई यह संस्थान महिलाओं को औपचारिक शिक्षा और हस्तशिल्प उत्पादन जैसे पारंपरिक आय-सृजन कौशल में प्रशिक्षण साथ ही महिलाओं की स्वयं सहायता की व्यवस्था और निगरानी प्रदान करने उनके जीवन को बदलने के लिए भी अधिक प्रयास कर रही है. 

संयुक्त राष्ट्र (UN) से संबंधित इस संस्थान में अब तक करीब 57 हजार से अधिक महिलाओं और बच्चों के सशक्तिकरण पर कार्य कर चुकी की जो कर्म अभी भी जारी है जहां महिलाओं को यहां प्रशिक्षण देने से लेकर उन्हें स्वरोजगार देने तक का कार्य किया जा रहा है.

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एनडीटीवी से बात करते हुए सम्भली ट्रस्ट के संस्थापक गोविंद सिंह राठौड़ ने बताया कि मैं वर्ष 2006 से महिलाओं और बच्चों के सशक्तिकरण के लिए कार्य कर रहा हूं. हमारी संस्थान संयुक्त राष्ट्र से रिकॉग्नाइज है और हम यहां महिलाओं और बच्चों की जरूरत और उनकी नीड के अनुरूप कार्य करते हैं. जहां समाज से पिछड़े महिलाएं और बच्चों जिन्हें समाज भी ना कर देता है. ऐसी महिलाओं और बच्चों के उत्थान के लिए हम कार्य कर रहे हैं. जहां न सिर्फ ऐसी महिलाएं हमारे संस्थान में आती है. बल्कि हम स्वयं उनके मोहल्ले और क्षेत्र में जाकर उन्हें प्रशिक्षित भी करते हैं. स्वरोजगार से जोड़ते हैं जिससे वह आत्मनिर्भर बन सके इसके साथ ही जितनी भी सरकारी योजनाएं हैं. उनसे भी उन्हें जोड़ने के लिए हमारे संस्थान कार्य करती है और कौन से उनके पास सरकारी दस्तावेज की कमी है उन्हें भी ईमित्र के जरिए बनवाने का कार्य करते हैं.

गोविंद सिंह राठौड़ ने आगे बताया कि हम एक पुरुष प्रधान समाज में रहते हैं. जहां मेरा उद्देश्य यही था कि जो फर्स्ट सर्कल में महिलाएं हैं. उन्हें कैसे सशक्त बना सके चाहे इसकी शुरुआत हमने एक छोटे स्तर पर की थी. अब यह एक विराट रूप लेने के साथ ही पूरे पश्चिमी राजस्थान जिसमें जैसलमेर, बाड़मेर पाली के अलावा पूरे पश्चिमी राजस्थान में महिलाओं और बच्चों के सशक्तिकरण के लिए एक फ्लैगशिप ऑर्गेनाइजेशन है और महिलाओं को उनके अधिकार दिलाने के लिए हम प्रयास करते हैं.

एनडीटीवी की टीम ने सम्भली ट्रस्ट के इन कार्यों व योजनाओं से जुड़ी महिलाओं और समलैंगिक वर्ग से जुड़े लोगों से भी बात की जहां हर वर्ग से जुड़े लोग जो समाज और परिवार से प्रताड़ित होते हैं सम्भली ट्रस्ट सिर्फ उन्हें पहले प्रशिक्षित नही करता है. बल्कि प्रशिक्षित करने के पश्चात उन्हें स्वरोजगार से भी जोड़ता है. जहां अब तक करीब 500 से अधिक महिलाओं को सिलाई मशीन देने के अलावा समलैंगिक वर्ग से जुड़े लोग जिन्हें बाहर टिक्का-टिप्पणी और बेड कमेंट से प्रताड़ित होते हैं. उन्हें भी शरण देने का कार्य यह संस्थान कर रही है. इसके अलावा निर्भया हेल्पलाइन के जरिए भी महिलाओं व बालिकाओं को 24 घंटे साइकोलॉजी काउंसलर की सुविधा टेलिफोनिक उपलब्ध कराई जा रही है जहां यहां महिलाओं और बालिकाओं को सिलाई मशीन के साथ ही हस्तशिल्प के छोटे उद्योगों के लिए भी प्रशिक्षित किया जाता है जहां आज के इस युग में जोधपुर की 40 वर्षीय गोविंद सिंह राठौड़ महिलाओं और बच्चों की सशक्तिकरण के लिए एक नई मिसाल के रूप में उभर रहे.

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