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जोधपुर में रिटायर्ड प्रिंसिपल से 1.85 करोड़ की साइबर ठगी, SBI का संविदाकर्मी समेत चार आरोपी गिरफ्तार

पुलिस जांच में सामने आया कि मुकेश राव साइबर ठगी के लिए लोगों के बैंक खाते किराए पर खरीदता था. इन खातों में ठगी की रकम जमा करवाई जाती थी और बाद में उसे ऑनलाइन ट्रांजेक्शन व क्रिप्टोकरेंसी जैसे Tether के जरिए विदेश भेज दिया जाता था.

जोधपुर में रिटायर्ड प्रिंसिपल से 1.85 करोड़ की साइबर ठगी, SBI का संविदाकर्मी समेत चार आरोपी गिरफ्तार
रिटायर्ड प्रिंसिपल

Jodhpur News: जोधपुर साइबर थाना पुलिस ने रिटायर्ड प्रिंसिपल से 1 करोड़ 85 लाख रुपये की साइबर ठगी के मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है. गिरफ्तार आरोपियों में State Bank of India की पाल रोड शाखा का एक संविदा कर्मचारी भी शामिल है. पुलिस के अनुसार इस पूरे नेटवर्क का मास्टरमाइंड एक मोटर मैकेनिक है, जो बैंक खातों को किराए पर लेकर ठगी की रकम ट्रांसफर करवाता था.

साइबर थाना प्रभारी सुरेश सारण ने बताया कि मामले की जांच के दौरान पुलिस ने सबसे पहले तिलक सिंह निवासी गणेश नगर, प्रतापनगर सदर को हिरासत में लेकर पूछताछ की. पूछताछ में सामने आया कि उसने कमीशन के लालच में अपना बैंक खाता शिवम तोमर को उपलब्ध करवाया था, जिसका इस्तेमाल ठगी की रकम ट्रांसफर करने में किया गया.

पूरे गिरोह के मास्टरमाइंड मुकेश राव का खुलासा हुआ

इसके बाद पुलिस ने शिवम तोमर को गिरफ्तार किया. पूछताछ के दौरान उसने पाल रोड स्थित SBI शाखा में कार्यरत संविदा कर्मचारी अजय कुमार का नाम बताया. अजय कुमार से पूछताछ करने पर पूरे गिरोह के मास्टरमाइंड मुकेश राव का खुलासा हुआ, जिसके बाद पुलिस ने उसे भी गिरफ्तार कर लिया.

पुलिस जांच में सामने आया कि मुकेश राव साइबर ठगी के लिए लोगों के बैंक खाते किराए पर खरीदता था. इन खातों में ठगी की रकम जमा करवाई जाती थी और बाद में उसे ऑनलाइन ट्रांजेक्शन व क्रिप्टोकरेंसी जैसे Tether के जरिए विदेश भेज दिया जाता था. पुलिस को शक है कि इस रकम को खासकर चीन में बैठे गिरोह के सरगनाओं तक पहुंचाया जाता था.

मुकेश राव एक विदेशी नंबर से चीनी भाषा में बातचीत करता था

जांच में यह भी सामने आया कि मुकेश राव एक विदेशी नंबर से चीनी भाषा में बातचीत करता था और इसके लिए Google Translate का इस्तेमाल करता था. इससे इस गिरोह के अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क से जुड़े होने की आशंका जताई जा रही है. पुलिस अब इस एंगल से भी जांच कर रही है और यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस गिरोह में बैंक का कोई अन्य कर्मचारी भी शामिल है या नहीं.

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