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अंबेडकर के इस्तीफे के बाद सिरोही महाराजा ने दे दिया अपना बंगला, लेकिन बाबा साहेब ने रख दी शर्त

Ambedkar Jayanti 2026: बाबा साहेब अंबेडकर ने 1951 में हिंदू कोड बिल को लेकर प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू से अपनी गंभीर असहमति के कारण इस्तीफा दे दिया और सरकारी आवास छोड़ दिया था. सिरोही से विशाल खंडेलवाल की रिपोर्ट.

अंबेडकर के इस्तीफे के बाद सिरोही महाराजा ने दे दिया अपना बंगला, लेकिन बाबा साहेब ने रख दी शर्त
बाबा साहेब अंबेडकर और सिरोही के महाराजा अभयसिंह में आत्मीय संबंध था
PTI & NDTV

बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर (Babasaheb Ambedkar) ने अपने राजनीतिक जीवन का अधिकतर समय दिल्ली में गुजारा और उन्होंने अंतिम सांस भी दिल्ली में ही ली थी. लेकिन, बहुत कम लोग यह जानते हैं कि बाबा साहेब ने जीवन की अंतिम सांस सिरोही महाराजा के बंगले में ही ली थी. विधि मंत्री के पद से इस्तीफा देने के तत्काल बाद बाबा साहेब ने दिल्ली के पृथ्वीराज रोड स्थित अपना सरकारी बंगला छोड़ दिया था. इसके बाद वे सिरोही महाराजा के शामनाथ मार्ग स्थित बंगले में रहने आए और अंतिम क्षणों तक यहीं रहे. दरअसल सिरोही राज्य और बाबा साहेब अंबेडकर के बीच गहरा और ऐतिहासिक संबंध रहा है.

सिरोही के महाराजा से संबंध

सिरोही स्थित इतिहासकार डॉक्टर उदयसिंह डिंगार बताते हैं कि विधि मंत्री रहते समय ही बाबा साहेब और सिरोही राज्य के शासक महाराजा अभयसिंह के बीच घनिष्ठ एवं आत्मीय संबंध बन गया था. गहरी मित्रता के कारण ही बाबा साहेब ने जब सरकारी आवास छोड़ने का फैसला सुनाया तो सिरोही महाराजा ने उन्हें अपने बंगले में रहने का ऑफर दिया. बाबा साहेब ने ऑफर पर विचार किया, लेकिन किराया देने पर अड़ गए. 

महाराजा ने उनकी बात रखते हुए प्रतीकात्मक राशि लेने की सहमति दी. इसके बाद बाबा साहेब 22, पृथ्वीराज रोड का आवास छोड़कर 26, शामनाथ मार्ग स्थित बंगले में शिफ्ट हो गए. अपनी अंतिम सांस उन्होंने इसी बंगले में ली। बाबा साहेब के निधन के बाद उनकी पत्नी डॉ. सविता अंबेडकर करीब तीन वर्ष तक इसी बंगले में रहीं.

इस्तीफा देते ही छोड़ा सरकारी आवास

हिंदू कोड बिल को लेकर प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू से अपनी गंभीर असहमति के कारण बाबा साहेब ने 31 अक्टूबर 1951 को कैबिनेट से इस्तीफा दे दिया था. अगले ही दिन, 1 नवंबर 1951 को उन्होंने सरकारी आवास खाली कर दिया और 26, शामनाथ मार्ग के बंगले में चले गए जो पहले अलीपुर रोड के नाम से जाना जाता था. यह बंगला उस समय में सिरोही महाराजा की संपत्ति हुआ करता था.

दिल्ली स्थित अंबेडकर राष्ट्रीय स्मारक

दिल्ली स्थित अंबेडकर राष्ट्रीय स्मारक
Photo Credit: delhitourism.gov.in

सरकार ने राष्ट्रीय स्मारक बनाया

बाद के वर्षों में सिरोही महाराजा ने यह बंगला एक व्यापारी को बेच दिया जिसने आगे इसे एक स्टील व्यवसायी को बेच दिया. उन्होंने इस बंगले में कुछ बदलाव भी किए.

सिरोही स्थित अंबेडकर समिति के अध्यक्ष रामलाल परिहार ने कहा कि वर्ष-2000 के आसपास देशभर के अंबेडकरवादी कार्यकर्ताओं की मांग पर तत्कालीन सरकार ने इस बंगले को स्मारक बनाने पर विचार किया. सरकार ने स्टील व्यवसायी से संपर्क किया तथा यह बंगला ले लिया और बदले में उन्हें इसी क्षेत्र में लगभग उतनी ही जमीन दी.

तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने 2 दिसंबर 2003 को इस बंगले को बाबा साहेब के राष्ट्रीय स्मारक बनाने के लिए परियोजना की आधारशिला रखी. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2023 में अंबेडकर जयंती के दिन स्मारक का अनावरण किया और इसे देश को समर्पित किया.

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