Ajmer News: अजमेर में साइबर ठगी का एक गंभीर मामला सामने आया है, जिसने प्रशासनिक महकमों में हड़कंप मचा के रख दिया है. मामला साइबर ठगों के जरिए अजमेर कलेक्टर की फोटो को डीपी लगाकर ठगी का है. इन ठगों ने इंटरनेशनल नंबर से फर्जी व्हाट्सएप अकाउंट बनाकर प्रशासनिक अधिकारियों और आम लोगों को मैसेज भेजकर ठगने की जानकारी मिली, जिसमें वह खुद को जिला कलेक्टर बताने का प्रयास किया गया था.
रुपयों की मांग की आशंका
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, पुलिस को मिले ऐसे मैसेजों के माध्यम से लोगों पर प्रशासनिक दबाव बनाने और रुपयों की मांग किए जाने की आशंका है. मामले की जानकारी मिलते ही प्रशासन ने इसे गंभीरता से लेते हुए तुरंत संज्ञान लिया और साइबर एजेंसियों को जांच के आदेश जारी किए हैं. प्रशासन का कहना है कि यह स्पष्ट रूप से पहचान की चोरी और साइबर धोखाधड़ी का मामला है.
कलेक्टर की अपील विवेक से ले फैसला
अजमेर के कलेक्टर लोक बंधु ने सभी प्रशासनिक अधिकारियों और आम जनता से विशेष अपील की है. उन्होंने कहा है कि किसी भी विदेशी या अज्ञात नंबर से यदि उनके नाम या किसी भी वरिष्ठ अधिकारी के नाम से व्हाट्सएप मैसेज, कॉल या धनराशि की मांग की जाए तो उस पर कतई भरोसा न करें. ऐसे नंबर को तुरंत Block और Report करे. साथ ही अपने नजदीकी थाने या साइबर अपराध थाने में सूचना दें.
ओटीपी या बैंक डिटेल न दें
कलेक्टर ने जानकारी देते हुए स्पष्ट किया है कि किसी भी शासकीय अधिकारी के जरिए व्यक्तिगत व्हाट्सएप अकाउंट से पैसों की मांग नहीं की जाती. इसलिए सतर्क रहे और किसी भी प्रकार की अपने बैंक की निजी जानकारी, ओटीपी या निजी विवरण साझा किसी के साथ सांझा न करने की अपील की गई है.
साइबर ठगी में लगेंगी सख्त धाराएं
कलेक्टर ने आगे जानकारी देते हुए बताया कि इस प्रकार के मामलों में भारतीय दंड संहिता और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के तहत कड़ी कानूनी कार्रवाई का प्रावधान है. फर्जी पहचान बनाकर मैसेज भेजना आईपीसी की धारा 419 (छलपूर्वक पहचान), 420 (धोखाधड़ी), 468 व 471 (जालसाजी) के अंतर्गत अपराध है. वहीं इस अपराधिक गतिविधि के लिए आईटी एक्ट की धारा 66C (पहचान की चोरी) और 66D (ऑनलाइन धोखाधड़ी) भी लागू होती हैं. दोषी पाए जाने पर आरोपियों को सख्त सजा और भारी जुर्माना हो सकता है. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया है कि मामले की गहन जांच जारी है और दोषियों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा.