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Rajasthan: 180 करोड़ की कोर्ट बिल्डिंग में सुविधाओं की कमी पर बिफरे वकील, 14 मांगों के साथ अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे

Rajasthan News: अजमेर के करीब 180 करोड़ रुपये की लागत से बने नए डिस्ट्रिक्ट कोर्ट बिल्डिंग में बेसिक सुविधाओं की कमी को लेकर वकीलों ने अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी है.

Rajasthan: 180 करोड़ की कोर्ट बिल्डिंग में सुविधाओं की कमी पर बिफरे वकील, 14 मांगों के साथ अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे
कोर्ट परिसर में हड़ताल पर बैठे वकील
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Ajmer News: अजमेर के नए डिस्ट्रिक्ट कोर्ट बिल्डिंग में काम शुरू होने के साथ ही वकीलों में भारी गुस्सा देखा जा रहा है. करीब 180 करोड़ रुपये की लागत से बने नए कोर्ट परिसर में वकीलों के बैठने के लिए चैंबर, टेबल, कुर्सी और बेसिक सुविधाओं की कमी को लेकर डिस्ट्रिक्ट बार एसोसिएशन ने अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी है. इसके कारण न्यायिक काम पर भी असर पड़ रहा है और कचहरी आने वाले पक्षकारों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.

14 सूत्रीय मांगें लिखकर प्रशासन को दी

मामले को लेकर जिला बार एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. योगेंद्र ओझा ने बताया कि नई बिल्डिंग का उद्घाटन 20 अप्रैल 2025 को हुआ था, लेकिन सवा दो महीने से वकीलों और  न्याय प्रशासन के बीच गतिरोध बना हुआ है. उनका कहना है कि नई बिल्डिंग में वकीलों, महिला वकीलों और पक्षकारों के बैठने का भी सही इंतज़ाम नहीं है. महिला वकीलों के लिए कॉमन रूम और वॉशरूम, फ्लोराइड फ्री पीने का पानी, लिफ्ट की टेक्निकल कमियों को दूर करने, बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन में खामियों समेत 14 सूत्रीय मांगें लिखकर  प्रशासन को दी गई हैं.

जल्द समाधान का दिया आश्वासन

अध्यक्ष ओझा ने बताया कि मांगो के बारे में संरक्षक न्यायाधीश, मुख्य न्यायाधीश और यहां तक ​​कि हाईकोर्ट रजिस्ट्रार को भी अवगत कराया गया. 27 जनवरी को रजिस्ट्रार अजमेर आए और समस्याओं को जायज मानते हुए जल्द समाधान का आश्वासन दिया, लेकिन कई दिन बीत जाने के बाद भी चैंबर आवंटन और सुविधाओं को लेकर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई. उन्होंने कहा कि वकीलों ने कोर्ट भवन की जमीन के लिए लंबे समय तक संघर्ष किया, लेकिन आज उन्हें बैठने की जगह नहीं मिल रही है, जबकि परिसर में अन्य सुविधाएं विकसित की गई हैं.

इन सुविधाओं की कमी

नई कोर्ट बिल्डिंग में पीने का पानी, टॉयलेट, लिफ्ट, CCTV कैमरे, टाइपिस्ट, स्टाम्प वेंडर, फोटोस्टेट, कैंटीन और क्लाइंट के बैठने की व्यवस्था जैसी बेसिक सुविधाएं भी नहीं हैं. कई बार वकीलों और पक्षकारों के लिफ्ट में फंसने की घटनाएं भी सामने आई हैं. एडवोकेट आशीष राजोरिया ने साफ किया है कि जब तक न्यायिक प्रशासन के जिम्मेदार अधिकारियों से बातचीत के बाद मांगों पर कोई ठोस फैसला नहीं हो जाता, तब तक आंदोलन और काम का बहिष्कार जारी रहेगा.

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