
प्रदेश में बच्चों के प्रति बढ़ते अपराध को लेकर बाल अधिकारिता विभाग द्वारा एक नवाचार करते हुए थानों, स्कूलों व अन्य संस्थानों पर क्यूआर कोड कोड लगाएगी. इसकी सहायता से बच्चें आसानी से अपनी ऑनलाइन शिकायत दर्ज करा सकेंगे. यह कवायद शिकायतों के त्वरित समाधान के लिए किया गया है.
इस संबंध में विभाग एक बाल हक ई-बॉक्स हर स्कूल थाने, सरकारी व निजी संस्थानों में लगाएगी. अभियान में किशोर न्याय बोर्ड, बाल कल्याण समिति, विशेष किशोर पुलिस इकाई को भी साथ लाया जाएगा.
गौरतलब है कई बार बाल अपराध से पीड़ित मासूम और उनके परिजन उत्पीड़न शिकायत करने के लिए पुलिस थाने व बाल अधिकारिता विभाग जाने में असहज महसूस करते हैं. इसलिए अब विभाग ने बाल हक ई-बॉक्स और वात्सल्य अभियान शुरू किया है. यह पहली बार है जब विभाग ने शिकायत दर्ज करने के लिए क्यूआर कोड जारी किए है.

बाल अपराधों पर लगाम के लिए नई पहल
क्या है बाल हक ई-बॉक्स का उद्देश्य
वात्सल्य अभियान वात्सल्य (फोस्टर केयर) अभियान का उद्देश्य है कि बच्चों को रिश्तों की समझ, स्नेह, अपनत्व, सही गलत का ज्ञान, परिवार और समाज का महत्व पता चल सके. यही नहीं, विभाग ने पारिवारिक देखरेख से वंचित एवं संस्थानों में रह रहे बच्चों को स्नेह एवं दुलार मिल सके,इसके लिए भी विशेष तैयारी की है.
ऐसे काम करेगा बाल हक ई-बॉक्स
बाल हक ई-बॉक्स एक तरह का क्यूआर कोड है, बालक और परिजन शिकायत करने के लिए जैसे ही क्यू आर कोड स्कैन करेंगे तो एक गूगल फॉर्म खुलेगा, जिसमें बालक का नाम, पता, उम्र संपर्क सूत्र और बालक के साथ हुए अपराध के प्रकार के आधार पर जानकारी भरनी होगी.
गोपनीय रहेगी शिकायकर्ता की पहचान
यह जानकारी सीधे जयपुर पहुंचेगी और वहां से संबंधित जिले के बाल संरक्षण अधिकारी, पुलिस और संबंधित को मामले की शिकायत भेजी जाएगी. शिकायत गोपनीय रहेगी, इससे शारीरिक उत्पीड़न मारपीट, बाल यौन दुर्व्यवहार, उपेक्षा, भेदभाव, नशीली दवाओं, पदार्थों का विक्रय, बाल विवाह और बाल श्रम की शिकायत की जा सकेगी
पोषक माता-पिता को सरकार देगी 4 हजार रुपए
बाल विभाग की ओर से जारी दिशा निर्देश के अनुसार ऐसे बालक जिनका किन्हीं कारणों से दत्तक ग्रहण नहीं हुआ हो, जिन्हें कानूनी अड़चन के वजह से लीगल फ्री नहीं किया गया हो, जिनके माता-पिता उन्हें पालने में समर्थ न हो और बालक राजकीय गृहों में रह रहा हो, जो घरेलू हिंसा से प्रभावित हो, जिनके माता-पिता सजा भुगत रहे हों, उनको पोषक माता-पिता के सुपुर्द किया जाएगा. पोषक माता-पिता को सरकार 4 हजार रुपए मासिक देगी. माता-पिता बनने के लिए जरूरी है कि आपराधिक रिकॉर्ड न हो, आयकरदाता हो, दो वर्षों से राजस्थान निवासी हो और शादी को 2 साल पूरे हो गए हो.