
Rajasthan News: जैसलमेर जिले में एक हैंडीक्राफ्ट की दुकान पर CBI ने छापा मारकर शहतूश से बने 23 शॉल व छोटे स्टॉल जब्त किए. इस शॉल को तिब्बती हिरण की खाल से बनाया जाता है, इसकी बिक्री भारत में प्रतिबंधित है. मिली जानकारी के अनुसार सीमा शुल्क संभाग नई दिल्ली की कम्प्लेंट के बेस पर जैसलमेर में एक हैंडीक्राफ्ट की दुकान में अवैध रूप से शॉल बेचने का मामला सामने आने पर मुकदमा भी दर्ज किया गया है.
12 लाख रुपये का शॉल
रिपोर्ट में बताया कि तिब्बती हिरण के बालों से बनी शॉल व स्टॉल जैसलमेर में अवैध रूप से बेची जा रही है, जबकि यह एक संरक्षित जानवर है. जैसलमेर में हैंडीक्राफ्ट की दुकान में कार्रवाई कर तलाशी लेते हुए 23 शॉल व स्टॉल बरामद की गई है. आपको बता दें कि सर्दियों के मौसम में ठंड से बचने के लिए लोग स्वेटर या शॉल का उपयोग करते हैं. आमतौर पर शॉल में पशमीना की शॉल का बहुत नाम है. लेकिन शहतूश की शॉल सबसे महंगी शॉल में शामिल है. शहतूश की 23 शॉल-स्टॉल की कीमत करीब 12 लाख रुपये तक होती है.
5 हिरण की खाल से 1 शाॅल
तिब्बती हिरण के ऊन को सबसे अच्छी कैटेगरी का भी माना जाता है. तिब्बती हिरण को चिरू और इसके खाल व बालों से बने शॉल को शहतूश शॉल के नाम से जाना जाता है. एक शहतूश शॉल को बनाने में लगभग 5 चिरू (तिब्बती हिरण) को मारा जाता है. शहतूश का शॉल में चिरू के बाल होते है, जो सर्दी से बचाने में बेहद कारगर होते है. चिरू का शिकार बैन होने के कारण इस शॉल की कीमत भी बहुत ज्यादा होती है.
1990 में भारत ने लगाया प्रतिबंध
वर्ष 1975 में आईयूसीएन द्वारा शहतूश शॉल पर प्रतिबंध लगा दिया था. इसके बाद 1990 में भारत ने भी इस शॉल पर प्रतिबंध लगा दिया. भारत में प्रतिबंध के बाद भी कश्मीर में इसे बेचा जाता था लेकिन वर्ष 2000 से इसकी बिक्री बिल्कुल बंद कर दी गई है. लेकिन अवैध रूप से इसे अभी भी बेचा जा रहा है. इस शॉल के कारण लगातार चिरू का शिकार हो रहा था. जिसके कारण चिरू की संख्या में तेजी से गिरावट आने से कई संगठनों ने इसका विरोध भी किया. इसको लेकर चिरू के शिकार पर प्रतिबंध लगा दिया. इसके बाद शहतूश की शॉल की बिक्री भी भारत में बंद कर दी गई.
ये भी पढ़ें- जैसलमेर में 10 साल बाद फिर रूपाराम और छोटू सिंह में मुकाबला, भाजपा और कांग्रेस ने उतारे पुराने ही प्रत्याशी