Rajasthan News: राजस्थान के बाड़मेर की अदालत ने एक पुराने आपराधिक मामले में गवाही देने के लिए बार-बार बुलाने के बावजूद पेश नहीं होने पर पुलिस निरीक्षक उगमराज सोनी के खिलाफ सख्त रुख अपनाया. अदालत ने शनिवार को उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया. हालांकि कुछ समय बाद उनकी माफी याचिका और जमानत अर्जी स्वीकार कर ली गई जिसके बाद उन्हें रिहा कर दिया गया.
10 साल पुराने मामलों से जुड़ा है मामला
दरअसल यह पूरा मामला करीब दस साल पुराने दो आपराधिक प्रकरणों से जुड़ा हुआ है. उस समय उगमराज सोनी बाड़मेर कोतवाली थाने में तैनात थे और इन मामलों के जांच अधिकारी थे. एक मामला चोरी से संबंधित था जबकि दूसरा धोखाधड़ी का था. इन दोनों मामलों की सुनवाई के दौरान उनकी गवाही को महत्वपूर्ण माना जा रहा था.
कई बार भेजे गए सम्मन
अदालत ने इन लंबित मामलों का निपटारा जल्द करने के लिए उन्हें कई बार सम्मन जारी किए थे. सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के निर्देशों के तहत पुराने मामलों को जल्द खत्म करने की प्रक्रिया चल रही है. इसके बावजूद पुलिस निरीक्षक निर्धारित तारीखों पर अदालत में पेश नहीं हुए. लगातार अनुपस्थिति के कारण आखिरकार अदालत ने उनके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी कर दिया.
पेशी पर पहुंचते ही हिरासत का आदेश
गिरफ्तारी वारंट के बाद शनिवार को उगमराज सोनी अदालत में पेश हुए. अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट-2 अंकुर गुप्ता ने मामले को गंभीर मानते हुए कोर्ट की अवमानना और बार-बार अनुपस्थित रहने को लेकर उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया.
माफी याचिका और जमानत के बाद रिहाई
सीआई की ओर से अधिवक्ता पवन गिरी सोडियार ने अदालत में माफी याचिका और जमानत आवेदन प्रस्तुत किया. इसके साथ ही बाड़मेर के दो अन्य पुलिस निरीक्षक जमानतदार बने. अदालत ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद जमानत मंजूर कर ली और सीआई उगमराज सोनी को रिहा कर दिया.
मामलों के निपटारे में हुई देरी
अधिवक्ता पवन गिरी सोडियार ने बताया कि ये दोनों मामले सरकार बनाम राजूराम और सरकार बनाम जमील खान के नाम से दर्ज हैं जो बाड़मेर कोतवाली थाने से जुड़े हैं. जांच अधिकारी होने के कारण उगमराज सोनी की गवाही जरूरी थी. उनकी अनुपस्थिति के कारण इन मामलों के निस्तारण में देरी हो रही थी.
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