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This Article is From Mar 12, 2026

बाड़मेर: झांक मठ के महंत पारसनाथ की संदिग्ध मौत, टांके में मिला शव; जांच में जुटी पुलिस

राजस्थान में बाड़मेर जिले के नागाणा क्षेत्र में झांक मठ के महंत पारसनाथ का शव मठ के पानी के टांके में मिलने से सनसनी फैल गई. पुलिस और एफएसएल टीम जांच में जुटी है. प्रारंभिक जांच में आत्महत्या की आशंका जताई जा रही है.

बाड़मेर: झांक मठ के महंत पारसनाथ की संदिग्ध मौत, टांके में मिला शव; जांच में जुटी पुलिस
बाड़मेर जिले के नागाणा क्षेत्र में झांक मठ के महंत पारसनाथ का शव मठ के पानी के टांके में मिलने से सनसनी फैल गई.

Rajasthan News: राजस्थान में बाड़मेर जिले के नागाणा थाना क्षेत्र स्थित झांक मठ से गुरुवार सुबह एक चौंकाने वाली खबर सामने आई. जहां मठ के महंत पारसनाथ का शव मठ परिसर के पानी के टांके में मिला. सुबह एक भक्त जब टांके से पानी निकालने पहुंचा तो उसे अंदर शव दिखाई दिया. घटना की खबर फैलते ही मठ में अनुयायियों और स्थानीय लोगों की भारी भीड़ जमा हो गई और पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई.

पुलिस और जांच टीमें मौके पर पहुंचीं

सूचना मिलते ही Nagana Police Station की पुलिस तुरंत मौके पर पहुंची. साथ ही एफएसएल और एमओबी की टीमों को भी जांच के लिए बुलाया गया. पुलिस ने घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया और आसपास के लोगों से पूछताछ शुरू की. टांके के बाहर महंत के जूते भी मिले हैं जिससे पुलिस मामले की हर पहलू से जांच कर रही है.

पुलिस अधीक्षक ने किया घटनास्थल का निरीक्षण

घटना की जानकारी मिलते ही Narendra Singh Meena भी मौके पर पहुंचे और हालात का जायजा लिया. उन्होंने पुलिस अधिकारियों को मामले की गहराई से जांच करने के निर्देश दिए. मौके पर मौजूद लोगों और महंत के शिष्यों से भी विस्तृत पूछताछ की गई.

प्रारंभिक जांच में आत्महत्या की आशंका

पुलिस की शुरुआती जांच में मामला आत्महत्या का माना जा रहा है. अधिकारियों के अनुसार महंत पारसनाथ काफी समय से मानसिक रूप से बीमार चल रहे थे और उनका इलाज भी चल रहा था. बताया गया कि रात करीब तीन बजे शिष्य सो गए थे. इसके बाद महंत ने टांके में कूदकर आत्महत्या कर ली. हालांकि पुलिस सभी पहलुओं की जांच कर रही है.

30 साल से मठ के महंत थे पारसनाथ

महंत पारसनाथ पिछले लगभग 30 वर्षों से झांक मठ की सेवा कर रहे थे. उन्होंने अपने जीवन का बड़ा हिस्सा गौ सेवा और धार्मिक कार्यों में बिताया. मठ में एक बड़ी गौशाला का संचालन भी उनके मार्गदर्शन में होता था. जीव दया और सामाजिक कार्यों में भी वे हमेशा आगे रहते थे इसलिए क्षेत्र में उनका विशेष सम्मान था.

संतों की मौजूदगी में होगा अंतिम संस्कार

पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी होने के बाद महंत पारसनाथ का अंतिम संस्कार संत समाज और अनुयायियों की मौजूदगी में धार्मिक विधि विधान के साथ समाधि देकर किया जाएगा. उनकी अचानक मौत से पूरे क्षेत्र में गहरा दुख और शोक का माहौल है.

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