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This Article is From Feb 10, 2026

राजस्थान बजट से पहले टीकाराम जूली ने कहा- बीजेपी का बजट आंकड़ों का मायाजाल, पुरानी घोषणाएं फांक रही धूल

जूली ने सवाल उठाया, "जब पिछली घोषणाओं का धरातल पर अस्तित्व ही नहीं है, तो नए बजट का क्या औचित्य? यह बजट प्रदेश के विकास का दस्तावेज नहीं, बल्कि भाजपा की विफलता को छिपाने का 'आंकड़ों वाला पर्दा' होगा."

राजस्थान बजट से पहले टीकाराम जूली ने कहा- बीजेपी का बजट आंकड़ों का मायाजाल, पुरानी घोषणाएं फांक रही धूल
टीकाराम जूली

Rajasthan Budget: राजस्थान विधानसभा में बुधवार (11 फरवरी) को 2026-27 के लिए बजट पेश होने वाला है. राजस्थान की वित्त मंत्री दिया कुमारी राज्य का बजट पेश करेंगे. लेकिन पेश होने वाले राज्य बजट से पहले नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने सरकार की कार्यप्रणाली पर तीखा हमला बोला है. एक आधिकारिक बयान जारी करते हुए जूली ने सरकार के पिछले वादों का 'रियलिटी चेक' किया और वर्तमान शासन को "विकास विरोधी और हेडलाइन प्रेमी" करार दिया.

26 प्रतिशत कार्यों को अब तक हाथ भी नहीं लगाया

टीकाराम जूली ने बीजेपी के पिछले बजट को आंकड़ों का मायाजाल बताया और कहा कि अब बुधवार को फिर से जुमलों की बौछार होगी. जबकि पुरानी घोषणाएं धूल फांक रही हैं. जूली ने पुरानी बजट घोषणाओं को लेकर रिपोर्ट कार्ड बताते हुए कहा, 26 प्रतिशत कार्यों को अब तक हाथ भी नहीं लगाया.

नेता प्रतिपक्ष ने ठोस आंकड़ों के साथ सरकार को घेरते हुए बताया कि विज्ञापन और दावों के शोर के बीच धरातल पूरी तरह खाली है.

कुल घोषणाएं: 2717

पूर्ण कार्य: मात्र 754

शून्य प्रगति: 707 घोषणाएं (26.02%) ऐसी हैं जिन्हें सरकार ने दो साल बीतने के बावजूद छुआ तक नहीं है.

जूली ने सवाल उठाया, "जब पिछली घोषणाओं का धरातल पर अस्तित्व ही नहीं है, तो नए बजट का क्या औचित्य? यह बजट प्रदेश के विकास का दस्तावेज नहीं, बल्कि भाजपा की विफलता को छिपाने का 'आंकड़ों वाला पर्दा' होगा."

मुख्यमंत्री की नाक के नीचे विकास का पहिया जाम

सरकार की प्रशासनिक सुस्ती पर प्रहार करते हुए जूली ने कहा मुख्यमंत्री की नाक के नीचे विकास का पहिया जाम है. इसका उदाहरण दिया कि जयपुर के सिविल लाइन्स का फ्लाईओवर आज भी अधूरा है, जबकि इसी मार्ग से मुख्यमंत्री का काफिला प्रतिदिन गुजरता है. "जो सरकार अपनी आंखों के सामने चल रहे प्रोजेक्ट्स पूरे नहीं करा सकती, वह प्रदेश के दूर-दराज के इलाकों में विकास क्या खाक करेगी? सहकार मार्ग फ्लाईओवर की घोषणा तो केवल कागजी पुल बनकर रह गई है."

बाड़मेर रिफाइनरी: भाजपा ने इसे 'बीरबल की खिचड़ी' बना दिया है. दिसंबर 2024 की डेडलाइन को बढ़ाकर अगस्त 2025 किया गया, लेकिन आज फरवरी 2026 तक भी लोकार्पण का कोई अता-पता नहीं है.

इलेक्ट्रिक बसें: 2024 में प्रदेश को 1000 इलेक्ट्रिक बसें देने का वादा किया गया था। दो साल बीत गए, लेकिन सड़कों पर एक भी नई बस नहीं उतरी। जनता आज भी धुआं उगलती खटारा बसों में सफर को मजबूर है.

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