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This Article is From Jan 30, 2026

Rajasthan: बेंगलुरु से आए इस आइडिया ने बदली भरतपुर के किसान की किस्मत, 55 हजार लगाकर हर साल कमा रहा लाखों का रिटर्न

Rajasthan News: भरतपुर के एक किसान ने पारंपरिक खेती छोड़कर कमर्शियल खेती की ओर रुख किया है, जिसमें वह लाखों का मुनाफ़ा कमा रहा है.

Rajasthan: बेंगलुरु से आए इस आइडिया ने बदली भरतपुर के किसान की किस्मत, 55 हजार लगाकर हर साल कमा रहा लाखों का रिटर्न
Malabar Neem Tree
NDTV

Bharatpur News: राजस्थान के भरतपुर जिले के किसान अब पारंपरिक खेती की जगह व्यापारिक खेती की तरफ मुड़ गए हैं. जिसका बदलाव भी धीरे-धीरे देखने को मिल रहा है. उन्हें कम लागत में दोगुना मुनाफा मिल रहा है. इससे उनकी आर्थिक स्थिति भी मजबूत हो रही है.ये आइडिया उन्हें आंध्र के किसानों से इंस्पायर होकर आया है , जो मालाबार नीम की खेती से जुड़ा है. जिसे जिले के वैरा सबडिवीजन के सलेमपुर कला गांव के एक किसान ने हाल ही में शुरु की है. जिसकी लकड़ियां अब मार्केट में लाखों रुपये में बिकने के लिए तैयार है.

आर्थिक स्थिति होती है मजबूत

इस पेड़ की खासियत यह है कि एक बार लगाने के बाद इसे तीन बार बेचा जा सकता है, जिससे किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी. मालाबार नीम का इस्तेमाल प्लाइवुड, फर्नीचर और पैकेजिंग इंडस्ट्री में होता है. कमर्शियल खेती के मामले में इसे किसानों के लिए एक अच्छा ऑप्शन माना जाता है क्योंकि इसे खेतों के किनारे मेड़ पर लगाया जा सकता है, जिससे फसलों को कम नुकसान पहुंचता है. इसकी लंबाई 25 से 50 फीट तक होती है. किसान का कहना है कि मालाबार नीम की खेती कम लागत में दोगुना मुनाफा दे रही है, और उन्होंने दूसरे किसानों से भी ऐसी ही खेती करने की अपील की है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत होगी.

 मिलता है कम लागत और ज़्यादा मुनाफे

मालाबार नीम की खेती करने वाले किसान बीरी सिंह ने बताया कि वह 3 साल पहले वे बेंगलुरु गए थे. वहां जब उन्होंने किसानों से बात की तो उन्हें मालाबार नीम की खेती के बारे में पता चला. उन्होंने कम लागत और ज़्यादा मुनाफे के लिए इसे अपनाने का फैसला किया. जिसके बाद गांव लौटकर उन्होंने अपने 1.5 बीघा खेत में 170 रुपये प्रति पौधे के हिसाब से 170 मालाबार नीम के पौधे खरीदे, जिनका कुल खर्च लगभग 55 हजार रुपये आया. सिर्फ 5-6 साल में तैयार होने वाली मालाबार नीम की लकड़ी का इस्तेमाल मुख्य रूप से प्लाइवुड, फ़र्नीचर (बेड, सोफ़ा, टेबल), पैकिंग बॉक्स, माचिस, पेंसिल और म्यूज़िकल इंस्ट्रूमेंट बनाने में होता है. इसके अलावा, यह एग्रो-फ़ॉरेस्ट्री के लिए भी बहुत काम की है.

किसान की आर्थिक स्थिति होगी मजबूत

उन्होंने आगे बताया कि एक बार यह पौधा लगाने के बाद इसे किसी चीज की जरूरत नहीं होती. इसे तीन बार काटकर बाजार में बेचा जा सकता है. अभी उनका मालाबार नीम का पेड़ 3 साल 4 महीने का है. 5वें साल के बाद यह बाज़ार में बिकने के लिए तैयार हो जाएगा. एक पेड़ की कीमत करीब ₹5 से ₹7000 है. इस मालाबार नीम के पेड़ की लंबाई 25 से 50 फीट होती है. शुरुआत में इसमें कड़ी मेहनत लगती है, उसके बाद 15 साल तक इसकी चिंता नहीं करनी पड़ती. इस खेती से किसान को कम लागत में दोगुना मुनाफ़ा होता है. इससे किसान की आर्थिक स्थिति भी मजबूत होती है.

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