साध्वी प्रेम बाईसा का आज उनके पैतृक गांव में अंतिम संस्कार किया गया. उनका गांव बालोतरा ज़िले के परेऊ गांव में है. आज, 30 जनवरी, शुक्रवार को वहां उन्हीं के बनाए हुए शिव शक्ति धाम नामक आश्रम में उन्हें साधु संतों की परंपरा के अनुसार समाधि दी गई. इस दौरान बड़ी संख्या में साधु-संत उनके गांव में मौजूद रहे और पूरे विधि-विधान के साथ साध्वी को समाधि देने की रस्म पूरी की गई. उनकी समाधि के आयोजन के दौरान बड़ी संख्या में उनके अनुयायी भी मौजूद रहे. पूरा माहौल शोक के साथ भक्तिमय बना रहा. साध्वी के पार्थिव शरीर के आश्रम पहुंचने के बाद रात भर वहां भजन होता रहा.
पोस्टमार्टम के बाद शव गांव लाया गया
इससे पहले साध्वी प्रेम बाईसा का पार्थिव शरीर कल रात (29 जनवरी) जोधपुर से उनके पैतृक गांव पहुंचा. साध्वी की बुधवार, 28 जनवरी की शाम को जोधपुर में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी. इसके बाद यह मामला पुलिस में गया और उनके शव को जोधपुर स्थित उनके आश्रम से कब्ज़े में लेकर वापस अस्पताल ले जाया गया. जोधपुर में कल उनके शव का पोस्टमार्टम किया गया. इसकी रिपोर्ट अभी सामने नहीं आई है.

साध्वी प्रेम बाईसा के गांव में आश्रम के बाहर अंतिम दर्शन के लिए जुटे लोग
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गांव में रात भर होता रहा भजन
पोस्टमार्टम के बाद साध्वी के शव को उनके परिजनों को सौंप दिया गया. इसके बाद कल देर शाम एंबुलेंस से उनके शव को जोधपुर से बालोतरा में उनके पैतृक गांव परेऊ लाया गया. शव को परेऊ गांव में उनके आश्रम लाया गया जहां बड़ी संख्या में ग्रामीण जुटे. वहां उनके शव को अंतिम दर्शन के लिए रखा गया. उनके पार्थिव शव के पास रात भर ग्रामीणों ने भजन गाए.
हालांकि साध्वी की मौत के बाद उनके और उनके परिवार के व्यक्तिगत जीवन को लेकर गांव के लोगों ने चुप्पी साधी हुई है. उनकी मौत पर हर शख्स स्तब्ध नजर आया.
पिता ट्रक चालक, दो साल की उम्र में मां चल बसीं
प्रेम बाईसा मूल रूप से बालोतरा जिले के परेऊ गांव की रहने वाली थीं. गांव के लोगों से मिली जानकारी के अनुसार उनके पिता वीरमनाथ ट्रक चालक हैं और माता अमरू बाईसा गृहिणी थीं. जब वह मात्र दो साल की थीं तब उनकी मां का निधन हो गया.
मां की भक्ति भावना का असर उनके जीवन पर गहरा पड़ा. इसके बाद पिता उन्हें जोधपुर के गुरुकृपा आश्रम ले गए जहां संत राजाराम जी महाराज और संत कृपाराम जी महाराज के शरण में उन्होंने कथा वाचन और भजन गायन के साथ आध्यात्मिक शिक्षा ली.

समय के साथ प्रेम बाईसा भागवत कथा और भजनों के कारण लोगों में लोकप्रिय होती गईं. बाद में वे गुरुकृपा आश्रम से अलग होकर जोधपुर के पाल रोड के पास साधना कुटीर आश्रम में रहने लगीं. जोधपुर स्थित आश्रम के उद्घाटन में बाबा रामदेव सहित कई प्रमुख संत मौजूद रहे थे.
उन्होंने अपने पैतृक गांव में भी आश्रम बनवाया जहां धार्मिक आयोजन होते रहे हैं. इसी शिव शक्ति धाम नामक आश्रम में साध्वी को समाधि दी गई.
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