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This Article is From Feb 05, 2026

Rajasthan: 'खेजड़ी' पर मान गई सरकार! मंत्री केके विश्नोई ने मंच से कहा- 'लिखित में देंगे आश्वासन, अमृता देवी का बलिदान नहीं भूलेंगे'

Bikaner Khejri Protest: खेजड़ी बचाओ आंदोलन के बीच मंत्री केके विश्नोई ने मंच से लिखित में आश्वासन देने की घोषणा कर दी है. जानें क्या अब खत्म होगा 480 लोगों का अनशन?

Rajasthan: 'खेजड़ी' पर मान गई सरकार! मंत्री केके विश्नोई ने मंच से कहा- 'लिखित में देंगे आश्वासन, अमृता देवी का बलिदान नहीं भूलेंगे'
मंत्री केके विश्नोई ने मंच से की खेजड़ी मुद्दे पर लिखित आश्वासन देने की घोषणा.
NDTV Reporter

Rajasthan News: खेजड़ी बचाओ आंदोलन में पिछले 4 दिनों से जारी गतिरोध आखिरकार टूटता नजर आ रहा है. बीकानेर के कलेक्ट्रेट पर चल रहे महापड़ाव के बीच गुरुवार को प्रदेश सरकार के मंत्री केके विश्नोई ने मंच से बड़ी घोषणा कर दी है. मंत्रियों के प्रतिनिधिमंडल और आंदोलनकारियों के बीच हुई वार्ता के बाद सरकार ने नरमी दिखाते हुए आंदोलनकारियों की मांगों पर सकारात्मक कदम उठाया है.

'लिखित में देंगे आश्वासन'

मंत्री केके विश्नोई ने मंच से हुंकार भरते हुए कहा कि सरकार खेजड़ी संरक्षण के मुद्दे पर पूरी तरह गंभीर है. उन्होंने घोषणा की कि आंदोलनकारियों की मांगों पर सरकार लिखित में आश्वासन देगी, ताकि भविष्य में खेजड़ी वृक्षों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके. यह आंदोलनकारियों की एक बड़ी नैतिक जीत मानी जा रही है, जो 'ट्री एक्ट' जैसी सख्त मांगों को लेकर अनशन पर बैठे थे.

अमृता देवी बिश्नोई का जिक्र

मंत्री विश्नोई ने बिश्नोई समाज की भावनाओं का सम्मान करते हुए कहा, 'वर्तमान में केंद्र से लेकर प्रदेश तक की सरकार मां अमृता देवी के बलिदान को याद करती है. हम उनकी विरासत और पर्यावरण संरक्षण के संकल्प को झुकने नहीं देंगे.' 

इस घोषणा के बाद अब आंदोलनकारियों के बीच अनशन खत्म करने की चर्चाएं तेज हो गई हैं, हालांकि लिखित आश्वासन मिलने तक महापड़ाव जारी रहने की संभावना है.

क्यों सुलग रही है आंदोलन की आग?

दरअसल, इस पूरे विवाद की जड़ में पश्चिमी राजस्थान के सोलर पावर प्रोजेक्ट्स हैं. राजस्थान के राज्य वृक्ष खेजड़ी को 'मरुस्थल की जीवनरेखा' कहा जाता है, लेकिन आंदोलनकारियों का गंभीर आरोप है कि बीकानेर संभाग में विकास के नाम पर हजारों खेजड़ी के पेड़ों को बेरहमी से काटा जा रहा है. चौंकाने वाली बात यह है कि कई जगहों पर इन पेड़ों को काटकर सबूत मिटाने के उद्देश्य से रात के अंधेरे में जमीन में गाड़ देने की शिकायतें भी सामने आई हैं. इसी 'अवैध कटाई' ने बिश्नोई समाज और पर्यावरण प्रेमियों के सब्र का बांध तोड़ दिया.

1000 रुपये का मामूली जुर्माना

आंदोलनकारी केवल खोखले आश्वासन नहीं, बल्कि ठोस कानूनी सुरक्षा चाहते हैं. वर्तमान में खेजड़ी की अवैध कटाई पर महज 1000 रुपये का मामूली जुर्माना है, जिसे अपराधी आसानी से भरकर छूट जाते हैं. संतों और पर्यावरण प्रेमियों की मुख्य मांग है कि इस जुर्माने को खत्म कर इसे 'गैर-जमानती अपराध' की श्रेणी में डाला जाए. साथ ही, खेजड़ी संरक्षण को एक 'धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहर' घोषित करते हुए एक विशेष और कड़ा कानून (Tree Act) बनाया जाए, ताकि सोलर प्लांट कंपनियां मनमानी न कर सकें.

363 शहीदों की विरासत और संतों का अल्टीमेटम

यह आंदोलन महज एक धरना नहीं है, बल्कि यह बिश्नोई समाज के उस गौरवशाली 'खेजड़ली बलिदान' (1730 ईस्वी) की याद दिलाता है, जहां अमृता देवी बिश्नोई के नेतृत्व में 363 लोगों ने पेड़ों के लिए अपने सिर कटवा दिए थे. बीकानेर में चल रहे इस महापड़ाव की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 3 फरवरी से करीब 480 लोग (जिनमें 29 संत और 60 महिलाएं शामिल हैं) अन्न-जल त्याग कर आमरण अनश पर बैठे हैं. संतों द्वारा सरकार को दिए गए 24 घंटे के अल्टीमेटम के बाद ही प्रशासन की नींद खुली और मंत्रियों का प्रतिनिधिमंडल वार्ता के लिए पहुंचा है.

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