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जैसलमेर में 250 साल पुरानी दरगाह पर बुलडोजर चलेगा या नहीं? 7 द‍िन बाद होगा फैसला 

तहसीलार ने व‍िस्‍तृत र‍िपोर्ट मांगी है. इसके ल‍िए 7 द‍िन का समय द‍िया है. इतने दिनों में पूरी र‍िपोर्ट पेश करनी होगी. 

जैसलमेर में 250 साल पुरानी दरगाह पर बुलडोजर चलेगा या नहीं? 7 द‍िन बाद होगा फैसला 
मेहमूद शाह पीर जिलानी दरगाह पर बुलडोजर चलेगा या नहीं 7 दिन बाद इसका फैसला होगा. (Photo- NDTV)

सीमावर्ती क्षेत्र में चलाए जा रहे ‘ऑपरेशन बॉर्डर क्लीन' के तहत बहुचर्चित मेहमूद शाह पीर जिलानी दरगाह मामले में मंगलवार को उपनिवेशन तहसील कार्यालय में महत्वपूर्ण सुनवाई हुई. सुनवाई के दौरान दरगाह प्रबंधन की ओर से आवश्यक दस्तावेज एवं न्यायालय से संबंधित आदेश प्रस्तुत किए गए, जिसके बाद प्रशासन ने मामले की विस्तृत जांच कराने का निर्णय लिया है. उपनिवेशन तहसीलदार रामगढ़-द्वितीय ज्ञान सिंह भाटी ने हल्का पटवारी को भूमि रिकॉर्ड की जांच कर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं और इसके लिए सात दिन का समय दिया गया है.

250 साल पुरानी दरगाह होने का दावा 

रामगढ़-तनोट बाईपास स्थित यह दरगाह करीब 250 वर्ष पुरानी बताई जाती है. प्रशासन ने ‘0 से 50 किलोमीटर बॉर्डर क्लीन अभियान' के तहत दरगाह को नोटिस जारी क‍िया था. जमीन और निर्माण से जुड़े दस्तावेज 22 जून तक प्रस्तुत करने के निर्देश दिए थे. नोटिस में संतोषजनक जवाब नहीं मिलने की स्थिति में 23 जून से कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई थी.

दरगाह को कब्रिस्तान के भीतर बताया 

सुनवाई के दौरान मुस्लिम समुदाय के प्रतिनिधियों ने अपना पक्ष रखते हुए दावा किया कि दरगाह पूरी तरह वैध कब्रिस्तान भूमि के भीतर स्थित है, और यह क्षेत्र लंबे समय से धार्मिक आस्था का केंद्र रहा है.उनका कहना था कि किसी धार्मिक ढांचे को हटाने जैसी कार्रवाई का अधिकार उपनिवेशन तहसीलदार को नहीं बल्कि जिला कलेक्टर को है. समुदाय के प्रतिनिधियों ने प्रशासन से ऐतिहासिक तथ्यों और सामाजिक संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए निर्णय लेने की मांग की.

7 दिन में पटवारी करेंगे पैमाइश 

तहसीलदार ज्ञान सिंह भाटी ने बताया कि दरगाह के निकट कब्रिस्तान होने की बात सामने आई है, लेकिन यह जांच का विषय है कि विवादित संरचना वास्तव में कब्रिस्तान की सीमा के भीतर है या बाहर. उन्होंने कहा कि पेश क‍िए गए दस्तावेजों और कोर्ट के आदेशों का परीक्षण किया जा रहा है.आगामी 7 दिनों में पटवारी एवं गिरदावर की टीम मौके पर पहुंचकर पैमाइश करेगी, और भूमि की वास्तविक स्थिति का निर्धारण करेगी.

30 जून तक रिपोर्ट तैयार कर ली जाएगी

प्रशासन के अनुसार, 30 जून तक विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर ली जाएगी, जिसके आधार पर नियमानुसार अंतिम निर्णय लिया जाएगा. पूरा मामला राजस्व रिकॉर्ड, दस्तावेजी साक्ष्यों और मौके की पैमाइश पर निर्भर है. सीमावर्ती क्षेत्र में आस्था, इतिहास और प्रशासनिक कार्रवाई से जुड़े इस मामले पर अब सभी की निगाहें आगामी रिपोर्ट और प्रशासन के अंतिम फैसले पर टिकी हुई हैं.

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