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This Article is From Jan 23, 2026

Rajasthan: 'नशेड़ी तोते चुरा ले गए अफीम तो छिन जाएगा लाइसेंस', चित्तौड़गढ़ में मोबाइल पर खेतों की LIVE पहरेदारी कर रहे किसान

Rajasthan News: अफीम की खेती पककर तैयार हो चुकी है. इसी को ध्यान में रखते हुए नारकोटिक्स डिपार्टमेंट 7 जिलों में 49 हजार 140 किसानों को अफीम के पट्टे जारी किए गए.

Rajasthan: 'नशेड़ी तोते चुरा ले गए अफीम तो छिन जाएगा लाइसेंस', चित्तौड़गढ़ में मोबाइल पर खेतों की LIVE पहरेदारी कर रहे किसान
नशेड़ी तोतों के लिए बिछाया जाल
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 Chittorgarh Opium cultivation News: राजस्थान के 7 जिलों में इस बार काले सोने के नाम से मशहूर अफीम की चमक फैली है. इसी के चलते राज्य के इन जिलों में 49 हजार 140 किसानों को अफीम के पट्टे जारी किए गए. जिसमें  चित्तौड़गढ़, झालावाड़, बारां, कोटा, उदयपुर, भीलवाड़ा और प्रतापगढ़ शामिल है. जिसमें अफीम किसानों को दिए गए 49 हजार 140 अफीम लाइसेंस में से 34 हजार 776 किसानों को गम पद्धति से और 14 हजार 364 अफीम किसानों को CPS पद्धति से लाइसेंस दिए गए हैं. इसके अलावा 10 इलाकों में अफीम की खेती के लाइसेंस भी दिए गए हैं.

चित्तौड़गढ़ बना अफीम का हब

जिले के नारकोटिक्स डिपार्टमेंट ने चित्तौड़गढ़ और उदयपुर की 15 तहसीलों के 758 गांवों में तीन सेक्शन में करीब 22 हजार किसानों को अफीम के लाइसेंस दिए हैं. जिसमें गम पद्धति में 10-10 आरी के लाइसेंस और CPS तरीके में 5-5 आरी के लाइसेंस दिए गए हैं. राज्य के जिन 7 जिलों में अफीम की बुआई होती है, उनमें सबसे ज्यादा लाइसेंस चित्तौड़गढ़ में दिए गए हैं. क्योंकि इसकी  खेती के लिए जमीन का पी एच मान 6 से 7 के बीच होना चाहिए .अफीम का पौधा समशीतोष्ण जलवायु में बहुत ही अच्छे से विकास करता है .

अफीम के खेत

अफीम के खेत
Photo Credit: NDTV

CCTV के साये में अफीम

वहीं लाइंसेस मिलने के बाद किसानों को इनकी देखरेख में पूरी ताकत झोंक देनी पड़ती है. वैसे भी अब अफीम की फसल पूरी तरह से पकने को है, खेतों में सफेद फूलों खड़े है, जो फसल के आखिरी पड़ाव पर पहुंचने का सूचक है, क्योंकि इनके खिलने के बाद 15-20 दिन में गम पद्धति वाले किसान डोडे पर चीरा लगाकर इसमें से दूध एक्टठा कर विभाग को जमा करवाएंगे. वही सीपीएस पद्धति वाले किसान अफीम डोडे पर बिना चीरा लगाएं डोडे को 8 इंच डंठल के साथ नारकोटिक्स विभाग में जमा करवाएंगे. इस बीच इन्हें बेहद सतर्कता से अपना काम करना होता है क्योंकि यदि अफीम की खेती में नुकसान हुआ तो लाइसेंस सीधा  निरस्त होता है. इसलिए अफीम की खेती को बचाने के लिए किसान विभाग के नियमों की सख्ती के चलते किसान खेतों को हाईटेक भी बना रहे हैं. 

खेतों की डिजिटल पहरेदारी

अफीम की इस कीमती फसल को बचाने के लिए किसानों ने नई टेक्नोलॉजी का सहारा लिया है. अब खेतों की रखवाली सिर्फ डंडों से ही नहीं, बल्कि डिजिटल कैमरों (CCTV) से भी की जा रही है. मोबाइल पर खेतों की लाइव मॉनिटरिंग की जा रही है.  इंसानों से ही नहीं, तोतों और दूसरे पक्षियों से बचाने के लिए पूरे अफीम को खेत को मजबूत जालों से ढक दिया गया है. हालात ऐसे हैं कि किसान अपने घर छोड़कर खेतों में डेरा डाले हुए हैं.इधर, नारकोटिक्स डिपार्टमेंट ने अफीम की खेती को मापने के लिए राज्य के साथ-साथ जिलों में 45 टीमें तैनात की हैं. चित्तौड़गढ़ जिले में भी 15 टीमें हर अफीम किसान के बोए गए अफीम के खेतों को मापने में लगी हुई हैं.

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