Rajasthan News: राजस्थान के चित्तौड़गढ़ जिले में श्रम विभाग के भीतर करोड़ों रुपये के संभावित फर्जीवाड़े ने हड़कंप मचा दिया है. सरकारी खजाने को चूना लगाने और अपात्र लोगों को लाभ दिलाने की शिकायतों के बाद शुक्रवार को विभाग ने एक बड़ा कदम उठाते हुए 3 साल पुराने लंबित 3,351 आवेदनों को फिर से जांच के दायरे में ले लिया है.
भुगतान से ठीक पहले खुला 'पेंडोरा बॉक्स'
ये 3,351 आवेदन भुगतान के लिए SNA (Single Nodal Agency) पोर्टल पर पूरी तरह तैयार थे. बस एक क्लिक होते ही करोड़ों की राशि खातों में ट्रांसफर होने वाली थी, लेकिन भ्रष्टाचार की शिकायतों और मुख्यमंत्री की जनसुनवाई में सामने आई श्रमिकों की पीड़ा के बाद इनका रास्ता रोक दिया गया. अब इन सभी फाइलों की नए सिरे से बारीकी से जांच होगी.
मृत्यु क्लेम में दलालों का जाल, 3 जिलों की टीमें करेंगी जांच
आवेदनों में सबसे संवेदनशील मामला सामान्य और दुर्घटना में मृत्यु (462 आवेदन) से जुड़ा है. सूत्रों के अनुसार, दलाल मृतक के परिजनों से योजनाओं का लाभ दिलाने के बदले 1 से 1.5 लाख रुपये तक वसूल रहे थे. इस 'खेल' की परतें खोलने के लिए विभाग ने चित्तौड़गढ़, उदयपुर और भीलवाड़ा के श्रम निरीक्षकों की 3 विशेष टीमें गठित की हैं, जो अगले 10-12 दिनों में आवेदनकर्ताओं तक पहुंचकर भौतिक सत्यापन करेंगी.
उप श्रम आयुक्त की सख्त चेतावनी: दोषी बख्शे नहीं जाएंगे
चित्तौड़गढ़ उप श्रम आयुक्त सुनील कुमार यादव ने मामले की पुष्टि करते हुए बताया, 'हमने सभी 3,351 आवेदनों को री-ओपन कर दिया है. 2,889 आवेदनों की जांच कार्यालय स्तर पर जारी है, जबकि मृत्यु क्लेम का भौतिक सत्यापन टीमें कर रही हैं. फर्जी दस्तावेज लगाने वालों और गलत तरीके से फाइल आगे बढ़ाने वाले अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के लिए उच्चाधिकारियों को लिखा जाएगा.'
एसीबी की एंट्री की संभावना
इस पूरे मामले में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) की एंट्री की भी प्रबल संभावना है. सरकारी कोष को हानि पहुंचाने के आरोप में तत्कालीन अधिकारियों और दलालों पर गाज गिरना तय माना जा रहा है.
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