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Rajasthan: राजस्थान के इन गांवों में बुरे हाल, दुल्हन की विदाई के लिए नहीं मिलती गाड़ियां, एंबुलेंस भी नहीं पहुंच पाती

Deeg: लोधपुरी और भूरिया गांव में सड़क ही नहीं है. डीग जिले की यह दोनों विधानसभा अलवर जिले के अंतर्गत आती है.

Rajasthan: राजस्थान के इन गांवों में बुरे हाल, दुल्हन की विदाई के लिए नहीं मिलती गाड़ियां, एंबुलेंस भी नहीं पहुंच पाती
लोधपुरी और भूरिया जैसे गांव विकास से कोसों दूर हैं.

There is no road in Lodhpuri and Bhuria of Deeg: आजादी के 77 साल बाद भी डीग जिले के नगर विधानसभा क्षेत्र के दो गांव, लोधपुरी और भूरिया, विकास से कोसों दूर हैं. बरसात में कच्चे रास्तों के चलते ये गांव टापू बन जाते हैं, जिससे बच्चों के विवाह तक प्रभावित होते हैं. डीग जिले की यह दोनों विधानसभा अलवर जिले के अंतर्गत आती है. इस प्रशासनिक उलझन के कारण न तो गांव में विकास हो पाया और न ही पक्के रास्ते बने. 34 साल पहले लोधपुरी में खुला प्राथमिक विद्यालय आज भी वही है, जिसके चलते बच्चों को आगे की पढ़ाई के लिए दूर जाना पड़ता है. एनडीटीवी की टीम जब लोधपुरी पहुंची तो कच्चे रास्तों की हकीकत सामने आई. ग्रामीणों ने कैमरे के सामने अपना दुख बयां किया.

करीब 1 हजार वाली आबादी के गांव में है बुरे हालात

स्थानीय निवासी हनीफ खान ने बताया, "गांव की आबादी करीब एक हजार है, जिसमें 400 मतदाता हैं. हम धानोता में वोट डालते हैं, लेकिन जनप्रतिनिधि सिर्फ चुनाव में दिखते हैं. पक्की सड़क आज तक नहीं बनी. बरसात में हालात और बिगड़ जाते हैं." 

सरपंच बोले- विधायक और सांसद को लेनी चाहिए जिम्मेदारी

ग्रामीणों की मांग है कि उनकी वोट अलवर जिले में जोड़ी जाए. सरदार कृष्ण सिंह ने कहा कि रास्ते दलदल में बदल जाते हैं. एक अन्य क्षेत्रवासी सुबहदीन ने बताया कि चुनावों के समय पर नेता बड़े बड़े वादे तो करते है, लेकिन आज तक धरातल पर कुछ किया नहीं है. हमारा गांव भरतपुर में सबसे पिछड़ा हुआ गांव है. वहीं, लोधपुरी के सरपंच राकेश ने बताया, "गांव के अंदर विकास कराया, लेकिन बाहर के रास्तों के लिए बजट नहीं मिला. विधायक और सांसद को इसकी जिम्मेदारी लेनी चाहिए."

ग्रामीण बोले- डीग से हटाकर अलवर में जोड़ा जाए हमारा वोट

लोगों का कहना है, "बरसात में 108 एम्बुलेंस भी नहीं पहुंचती. डिलीवरी के लिए 20 किलोमीटर कच्चे रास्तों से जाना पड़ता है. शादी-विवाह भी प्रभावित हैं. बरसात में बारात की गाड़ियां नहीं आ पातीं. यहां तक कि दुल्हन को विदाई के लिए दूसरे गांव तक पैदल ले जाना पड़ता है." ग्रामीणों ने इसका समाधान बताते हुए मांग की है कि हमारे वोट को डीग जिले के नगर विधानसभा से हटाकर अलवर जिला में जोड़ा जाए, जिससे हमारे क्षेत्र के रास्तों का विकास हो सके. तभी सांसद और विधायक के कोटे से हमारे गांव के आम रास्ते बन सकेंगे. 

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