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Ashok Gehlot Defamation case: दिल्ली उच्च न्यायालय ने बुधवार को केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत से राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की उस अपील पर जवाब देने के लिये कहा है जो उन्होंने एक आपराधिक मानहानि शिकायत में उन्हें (गहलोत) समन किये जाने के खिलाफ दायर की है. न्यायमूर्ति स्वर्ण कांत शर्मा ने मामले को 22 जनवरी, 2024 को अगली सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया.
गहलोत ने शेखावत की ओर से दायर शिकायत में अपने समन के खिलाफ उनकी अपील खारिज करने के सत्र अदालत के आदेश को चुनौती दी है. सत्र अदालत ने कहा था कि अतिरिक्त मुख्य मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट द्वारा जारी किए गए समन में कोई तथ्यात्मक गलती नहीं है.
शेखावत का प्रतिनिधित्व वरिष्ठ अधिवक्ता विकास पहावा ने किया. शेखावत ने शिकायत में आरोप लगाया है कि गहलोत ने संवाददाता सम्मेलन, मीडिया की खबरों और सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए उन्हें राज्य में संजीवनी घोटाले से जोड़कर सार्वजनिक रूप से बदनाम किया.
संजीवनी क्रेडिट सोसाइटी घोटाले में असामान्य रूप से उच्च रिटर्न के वादे के साथ हजारों निवेशकों से अनुमानित 900 करोड़ रुपये की कथित धोखाधड़ी शामिल है.
सत्र अदालत ने पहावा की इस दलील पर गौर किया था कि किसी आरोपी को तलब करते समय मजिस्ट्रेट अदालत को सबूतों की सत्यता या स्वीकार्यता आदि के बारे में कोई विस्तृत चर्चा करने की आवश्यकता नहीं थी क्योंकि इस पर सुनवायी के दौरान पेश किए गए साक्ष्यों के आधार पर निर्धारित किया जा सकता है.
निचली अदालत ने पहले शिकायत मामले में सुनवायी पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था, लेकिन गहलोत को वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट के सामने पेश होने की अनुमति दी थी.
केंद्रीय जल शक्ति मंत्री एवं जोधपुर से सांसद शेखावत ने मजिस्ट्रेट के समक्ष अपनी शिकायत में आरोप लगाया है कि गहलोत कथित घोटाले को लेकर उनके खिलाफ अपमानजनक टिप्पणियां कर रहे हैं और उनकी छवि खराब करने और उनके राजनीतिक करियर को प्रभावित करने की कोशिश कर रहे हैं.
मजिस्ट्रेट अदालत ने पहले कहा था कि गहलोत ने शेखावत के खिलाफ 'प्रथम दृष्टया' अपमानजनक आरोप लगाए और ऐसा निहितार्थ के बारे में अच्छी तरह से जानते हुए और उनकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने के इरादे से किया.
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