
अगर किसी को नया घर खरीदना हो या फिर बनवाना हो तो वह किसी बिल्डर के पास जायेगा या फिर किसी मजदूरों व कारीगरों की टीम से संपर्क करेगा, लेकिन लोगों ने जैसलमेर में यह काम भगवान भरोसे छोड़ा हुआ है सुनने में यह अटपटा जरूर लगेगा लेकिन ऐसा लोगों का मानना है. जैसलमेर से 12 किलोमीटर दूर स्थित भगवान गणेश जी का एक ऐसा मंदिर स्थित है. जो भक्तों को घर प्रदान करता है. दूर-दूर से भक्त यहां भगवान के दर्शनों के लिये आते हैं और भगवान के समक्ष अपने आशियाने की मनोकामना प्रकट करते हैं और गणेश जी इस मनोकामना को पूरा भी करते हैं.
ऐतिहासिक मंदिर का है अपना महत्व
ऐसी मान्यता है कि यहां पर आने वाले भक्तों को भगवान बाकायदा घर दिए भी हैं और यह इसी का परिणाम ही है कि यहां आने वाले दर्शानार्थियों की संख्या दिन प्रतिदिन बढती ही जा रही है. जैसलमेर की स्थापना से भी पुराने इस मंदिर के इतिहास के बारे में अगर बात करें तो पता लगता है कि करीब 14 सौ वर्ष से भी पुराना है यह मंदिर और उस काल में चंवद ऋषि द्वारा 5 सौ वर्ष तक तप किया था. इसलिये इस स्थान का नाम चूंधी पडा था इतना ही नहीं विभिन्न समय काल में विभिन्न ऋषि मुनियों ने यहां तपस्या कर इस स्थान के तप को बढाया है और इसी का परिणाम है कि आज यहां आने वाले दर्शनार्थियों को यहां आने के बाद शांति व सकून प्राप्त होता है.

नदी के बीच विराजित भगवान गणेश की प्रतिमा
भक्तों की मनोकामना पूरी करते हैं भगवान गणेश
वैज्ञानिक युग में इस प्रकार की बातें बेमानी सी लगती है लेकिन आस्था व श्रद्धा के आगे विज्ञान भी घुटने टेकता है. जैसलमेर के चूंधी गणेश जी के मंदिर में जहां मंदिर परिसर के पास बने सैकडों की संख्या में छोटे-छोटे मकान यह गवाही दे रहे हैं कि भगवान हैं और वे भक्तों की मनोकामना पूर्ती के लिये हरपल तैयार रहते हैं. मान्यता है कि मन में सच्ची श्रद्धा के साथ अगर यहां दर्शन कर गणेश जी से कुछ मांगा जाये तो मनोकामना कभी निष्फल नहीं जाती है. भक्तो का मनाना है कि हमने जितने घर बनाए भगवान गणेश ने उतनी घर हमे दिए है. हालांकि एनडीटीवी राजस्थान इस परम्परा के सच होने का दावा नहीं करता.
स्वयं विराजित हुए हैं मारुति नंदन
स्थानीय समिति द्वारा किया जाता है आयोजन
चूंधी गणेश की इन्हीं मान्यताओं व चमत्कारों के चलते यहां पर प्रतिवर्ष गणेश चतुर्थी के दिन भव्य मेला लगता है जिसमें जैसलमेर सहित अन्य जिलों व राज्यों से भी कई श्रद्धालु भगवान गणपति के दर्शन करने व उनसे अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति हेतु एकत्रित होते हैं. गणेश चतुर्थी के दिन यहां भरे जाने वाले मेले का आयोजन यहां की स्थानीय समिति द्वारा किया जाता है. जिसमें जैसलमेर से चूंधी तक दर्शनार्थियों को लाने के लिए बसों की व्यवस्था, मंदिर परिसर में आने वाले दर्शनार्थियों के लिए प्रसादी की व्यवस्था करना शामिल होता है.
स्पष्टीकरणः स्थानीय लोगों की मान्यताओं और बताई कहानी के आधार पर इस स्टोरी को लिखा गया है.