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This Article is From Aug 27, 2025

फीकी पड़ सकती है जयपुर के जवाहरात व्यवसाय की चमक, ट्रंप के टैरिफ से ज्वेलर्स की बढ़ी चिंताएं

ट्रंप के टैरिफ से चिंतित उद्योगपति कहते हैं कि सरकार को कुछ क़दम उठाने चाहिए, जैसे कोविड महामारी में उन्हों अर्थ व्यवस्था को संभाला था , जिनके लोन हैं, उनको लोन चुकाने के लिए बैंकों से उन्हें और समय देना चाहिए.

फीकी पड़ सकती है जयपुर के जवाहरात व्यवसाय की चमक, ट्रंप के टैरिफ से ज्वेलर्स की बढ़ी चिंताएं
फीकी पड़ सकती है जयपुर के जवाहरात व्यवसाय की चमक (फाइल फोटो- ANI)

Rajasthan News: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के भारत पर 50 फीसदी टैरिफ लागू होते ही जयपुर के आभूषण बाजार की घुमावदार गलियों में चिंता बढ़ गई है. यहां का प्रसिद्ध जोहरी बाजार, जहां पारंपरिक ज्वेलर्स सदियों से खूबसूरत आभूषण बनाते आए हैं. कुंदन पोल्की के हार जिनमें मीणाकारी का काम होता है. जौहरी बाज़ार से सटा हुआ है, गोपाल जी का रास्ता, जहां व्यापारी मोती, गहनों, रंगीन रत्नों और कीमती पत्थरों का व्यापार करते हैं. ये सारे सामान अपने गद्दियों से बेचते हैं, जो इनकी दुकानें का पारंपरिक नाम है.

विदेशी मुद्रा कमाने का जरिया है आभूषण उद्योग

आभूषण और रत्न जयपुर की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है और पर्यटन के साथ यह शहर के लिए विदेशी मुद्रा कमाने का सबसे बड़ा जरिया है, लेकिन जब अमेरिका ने भारत से आभूषण और रंगीन रत्नों के निर्यात पर 50 फीसदी टैरिफ लगाया तो अब यह चिंता जताई जा रही है कि यह समृद्ध उद्योग अपनी चमक खो सकता है. सुधीर कासलीवाल का परिवार जेम पैलेस के नाम से प्रसिद्ध है, नौ पीढ़ियों से जयपुर के शाही परिवार के व्यक्तिगत आभूषणकार रहे हैं.

प्रसिद्ध राजमाता गायत्री देवी उनके शाही संरक्षक थे और वर्षों से जेम पैलेस ने अपनी समयहीन कारीगरी और विरासत आभूषणों के लिए एक प्रतिष्ठा बनाई है. ओपरा विनफ्रे से लेकर अमेरिका की पूर्व प्रथम महिला जैकलिन केनेडी ओनासिस तक ने जेम पैलेस के कार्यशाला का दौरा किया है, लेकिन अमेरिकी शुल्क इस तरह के पारंपरिक व्यापारों को प्रभावित कर सकते हैं. 

अमेरिका को निर्यात आदेश ठप

सुधीर कासलीवाल कहते हैं, "हमारा अमेरिका को निर्यात आदेश बिल्कुल ठप हो गया है. वास्तव में, खरीदार अब आगे कोई नया आदेश नहीं दे रहे हैं, और चिंता की बात यह है कि हमारे स्टोर में जो विदेशी पर्यटक आते हैं. उनमें से 70 प्रतिशत अमेरिकन हैं और शुल्क निश्चित रूप से जयपुर में हमारी बिक्री को प्रभावित करेंगे. अमेरिकी पर्यटक आभूषण नहीं खरीदेंगे, क्योंकि जब वे भारत से आभूषण वापस अपने देश ले जाएंगे तो उन्हें भारी शुल्क देना होगा."

राजस्थान से आभूषण और रत्नों का कुल निर्यात 18,000 करोड़ रुपये है. अमेरिका जयपुर के व्यापारियों के लिए सबसे बड़ा बाजार है. हर साल जयपुर 3,200 करोड़ रुपये का तैयार आभूषण और रंगीन रत्न अमेरिका को निर्यात करता है. 

जयपुर ज्वेलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष और एक प्रमुख निर्यातक आलोक सोनखिया का कहना है कि इस समय तक हमें क्रिसमस के लिए आदेश मिल जाने चाहिए थे, लेकिन अभी तक कोई भी आदेश नहीं आया है. हम अब भी यह अनुमान लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि उद्योग को कितने नुकसान का सामना करना पड़ा है, क्योंकि आदेश रद्द हो रहे हैं. वास्तव में, कुछ निर्यातकों ने कहा कि उनकी consignments अमेरिका पहुंच चुकी हैं, लेकिन अमेरिका में ग्राहक उन्हें उठाने नहीं आ रहे हैं.

3 लाख लोगों को रोजगार देता यह उद्योग

हम आने वाले महीनों में आभूषण उद्योग पर इसके प्रभाव को महसूस करेंगे. रंगीन रत्नों की कटाई और पॉलिशिंग भी जयपुर के निर्यात व्यापार का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है. पन्ना, टैंज़ानाइट, रूबिलाइट, मॉर्गेनाइट और एक्वामरीन जैसे रंगीन पत्थर जयपुर में काटे, पॉलिश किए जाते हैं और तैयार आभूषणों में इस्तेमाल होते हैं. यह उद्योग 3 लाख तक कुशल और अ-कुशल श्रमिकों को रोजगार देता है, जिनकी आय पर असर पड़ सकता है. 

रंगीन रत्न पैनल और आभूषण और रत्न निर्यात संवर्धन परिषद के संयोजक डी पी खंडेलवाल कहते हैं, "टैंज़ानाइट अमेरिकी बाजार में एक बहुत लोकप्रिय रत्न बन चुका था, खासकर प्रसिद्ध फिल्म 'टाइटैनिक' के बाद. जयपुर अपनी कारीगरी के लिए जाना जाता है, जिसमें रत्नों की कटाई और पॉलिशिंग शामिल है, और रंगीन रत्नों का निर्यात बाजार का लगभग 20 प्रतिशत है. हमने कारीगरों को यह कला सिखाने के लिए प्रशिक्षण केंद्र खोले हैं, जो जयपुर में सदियों से फल-फूल रही है. लेकिन अगर उत्पादन घटता है, तो स्वाभाविक रूप से नौकरियां भी खतरे में पड़ सकती हैं."

गिरिश, जो उत्तर प्रदेश से जयपुर आकर नौ साल पहले एक आभूषण निर्यात इकाई में काम करने लगे थे, कहते हैं कि वह चिंतित हैं. "मुझे ज्यादा समझ नहीं आता कि क्या हो रहा है, लेकिन एक बात तो निश्चित है कि अगर आदेश कम हो जाते हैं और काम कम होता है, तो हम नौकरी से बाहर हो सकते हैं और हम कुछ और करने के लायक नहीं हैं. हमारी परिवारों का गुजारा कैसे होगा?" 

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