
हजरत पैगंबर मोहम्मद साहब के पैदाइश के पाक मौके पर आज पूरे देश में ईद ए मिलाद उन नबी मनाया जा रहा है. इस मौके पर सड़कों पर लोग जुलूस निकाल रहे हैं, जिसमें हजारों की संख्या में बच्चे, बूढ़े, जवान शामिल हो रहे हैं. इस मौके पर हजरत पैगंबर मोहम्मद के जन्म दिवस पर सभी को मुबारकबाद देते हैं. आज इस्लामिक दिन है और आज के दिन को बहुत ही खुशी के साथ मनाते हैं. चारों ओर खुशी का माहौल है. भाईचारा के साथ आज के दिन को मनाया जा रहा है. आज इबादत का दिन है हमलोग आज रातभर इबादत होगी.
जश्ने ईद मिलादुन्नबी के मौके पर सरहदी जिले जैसलमेर में अकीदत के साथ मनाया जा रहा है. जिले की मस्जिदों की शानदार सजावट की गई है. मोहम्मद साहब के पैदाइश के मुबारक मौके पर मस्जिदों के साथ ही बड़ी संख्या में लोगों ने अपने घरों को सजाकर जश्न मनाया जा रहा है.
इस खास दिन को लेकर कई दिनों से चल रही है. इन सब तैयारियों के बीच शहर के मुस्लिम समुदाय के लोगों में उत्साह का माहौल है. जश्ने ईद मिलादुन्नबी के अवसर पर सरहदी जिले जैसलमेर जिले में भव्य जुलूस निकाला गया. इस जुलूस में हजारो की संख्या में मुस्लिम भाई शामिल हुए. धूमधाम के साथ सभी मुस्लिम भाइयो के नए कपड़े पहनकर जुलूस में शामिल हुए.
ईद-मिलाद-उन-नबी के संदेश
वो चांद का चमकना,
वो मस्जिदों का सवरना,
वो मुसलमानों की धूम।
ईद-ए-मिलाद-उन नबी मुबारक.
जुलुस में सजावट के साथ ऊँट और घोड़ो की झाँकियाँ निकाली गई. सभी के हाथ में हरा झंडा लिए अपने खुदा को याद किया गया. जुलुस शहर के गडसीसर प्रोल के पास स्थित मुस्लिम मुसाफिर खाना से रवाना होकर मदरसा रोड से होते हुए ढिब्बा पाडा, गोपा चौक, नीरज बस स्टेंड चौराहा, हनुमान चौराहा होते हुए गीता आश्रम रोड स्थित बडी ईदगाह पर पंहुचा. जुलुस का कई लोगो ने फूलो की बरसात कर सभी का स्वागत किया गया.
सभी मुस्लिम भाइयो ने एक-दूसरे से गले मिलकर मोहम्मद साहब के पैदाइश के मुबारक दी. इस मौके पर कैबिनेट मंत्री शाले मोहम्मद भी जुलूस में शामिल हुए. मंत्री सालेह मोहम्मद ने देशवासियों को मिलाद-उल-नबी की बधाई दी. और कहा हम सब पैगम्बर के जीवन से प्रेरणा लें और एक दूसरे के साथ सद्भाव बनाकर रखे.
जानिए क्या करते हैं ईद मिलाद उन नबी पर?
इस दिन सभी मुस्लिम लोग मस्जिद जाते हैं. सभी लोग नमाज पढ़ने के साथ कुरआन की तिलावत करते हैं. इस दौरान वे अल्लाह से अपने गुनाहों की माफ़ी मांगते हैं. पैंगबर मुहम्मद इंसानियत और रहमदिली में यकीन रखते थे, यही वजह है कि इस दिन मुस्लमान अल्लाह की इबादत के साथ, गरीब और मजबूर लोगों की खूब मदद करते हैं. इस्लाम में खैरात (दान) करना और दूसरों की मदद करना सबसे सवाब (पुण्य) का काम माना जाता है.
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