Jaipur Congress District President: राजस्थान कांग्रेस के 45 जिलाध्यक्षों के नाम घोषित होने के बाद 5 और जिलों में अध्यक्ष के नाम तय होने का इंतजार हैं. इसमें जयपुर शहर कांग्रेस को भी अध्यक्ष मिलना है. इस बीच जयपुर शहर कांग्रेस अध्यक्ष आर आर तिवाड़ी को उम्मीद है कि पार्टी उन्हें रिपीट करके एक बार फिर मौका देगी. तिवाड़ी जयपुर नगर निगम में कांग्रेस का बोर्ड और महापौर बनाने की तमन्ना रखते हैं. लेकिन घोषणा के इंतजार के बीच शहर कांग्रेस के कार्यकर्ताओं के बीच मौजूदा अध्यक्ष को लेकर चर्चा यह भी है कि बकरे की अम्मा कब तक खैर मनाएगी? उधर आर आर तिवाड़ी का कहना है कि बकरा अमर भी तो हो सकता है.
सवाल - जयपुर शहर कांग्रेस के जिला अध्यक्ष के नाम का ऐलान होना बाकी है आपकी क्या अपेक्षा है पार्टी से?
तिवाड़ी - मुझे उम्मीद है कि मैं बरकरार रहूंगा. मैंने काम किया है. नगर निगम चुनाव भी जल्द होने हैं. मैं चाहता हूं कि नगर निगम चुनाव में कांग्रेस जीते. मैंने नगर निगम के चुनाव को लेकर हाईकोर्ट में रिट लगा रखी है. 10 दिसंबर को कोर्ट में अगली सुनवाई है. मेरा मानना है कि अभी तक माहौल बीजेपी के खिलाफ है. राज्य सरकार काम नहीं कर रही है. ऐसे में बीजेपी के खिलाफ जनता में नाराजगी है और कांग्रेस कार्यकर्ताओं में जोश है . मैने लगातार ढाई साल संघर्ष किया है भारतीय जनता पार्टी से. मैं चाहता हूं कि जयपुर नगर निगम में बोर्ड हमारा बने और मेयर भी कांग्रेस का बने इसलिए मैं जिला अध्यक्ष रहना चाहता हूं.
सवाल - कांग्रेस रिव्यू कर रही है और यह भी संभावना जताई जा रही है, कि जिला अध्यक्ष बदल सकता है. पुष्पेंद्र भारद्वाज, सुनील शर्मा, अमीन काग़ज़ी जैसे कई नाम चल रहे हैं.
तिवाड़ी - राहुल गांधी की महत्वाकांक्षी योजना है. देश के वरिष्ठ नेताओं को हर जिले में आब्जर्वर के रूप में भेज कर सीधे कांग्रेस के साथियों से पूछा कि आपके यहां अध्यक्ष कौन बन सकता है? आंध्र प्रदेश के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष राजू जयपुर में भी आए थे. उन्होंने अलग-अलग लोगों से बात की. जयपुर की अर्थ विधानसभाओं में जाकर वहां के ब्लॉक अध्यक्ष, मंडल अध्यक्ष, बीएलए, बुद्धिजीवी वर्ग सबसे उन्होंने बात की. कार्यकर्ताओं की नजर में तो मैं हूं. कार्यकर्ताओं की पसंद में तो हूं. अब रिजल्ट आएगा तब पता लगेगा कि कौन बनता है? अभी तो रिजल्ट विदहेल्ड है. कार्यकर्ताओं की पसंद के आधार पर मैं बनूंगा. राहुल गांधी जिस तरह एक नई ऊर्जा के साथ कांग्रेस के साधारण कार्यकर्ताओं को आगे बढ़ा रहे हैं. मेरा तो बैकग्राउंड भी कांग्रेस के साधारण कार्यकर्ता का है.
मैं मोटरसाइकिल वाला अध्यक्ष बना था, पहली बार जुलाई 2023 में, आज भी मोटरसाइकिल चलाता हूं. साथियों से जुड़ाव रखकर कांग्रेस को आगे बढ़ने का काम कर रहा हूं. मेरा मन है और भरोसा भी है, कि फैसला मेरे पक्ष में आएगा. कोशिश तो सभी करते हैं. कोई भी आदमी आगे बढ़ सकता है, जो अपनी सेवाएं देना चाहता है, वह काम करे. कोशिश तो सभी करते है और दूसरे कोशिश कर भी रहे हैं, चाहे सुनील शर्मा हो, चाहे पुष्पेंद्र हो, चाहे महेश हो. मुझे भरोसा है कि फैसला मेरे पक्ष में होगा. मैं सबके साथ हूं, लेकिन दृढ़ विश्वास मुझे है कि साथियों का पूरा विश्वास मेरे में है.
सवाल - ऐसा माना जा रहा है कि जिलाध्यक्ष को लेकर ज्यादा प्रतिस्परर्धा हवामहल सीट के कारण भी है. चर्चा है कि जिलाध्यक्ष बनकर नेता अपने लिए हवामहल सीट को सुरक्षित करना चाहते हैं?
तिवाड़ी- मुझे भी कई कार्यकर्ता कहते हैं कि जिलाध्यक्ष की दौड़ में लगे दूसरे लोग अपना विधानसभा चुनाव का टिकट पक्का करना चाहते हैं. मैंने अपने जीवन के 48 साल कांग्रेस को दिए है. इंदिरा गांधी के लिए 10 दिन 1978 में जयपुर की सेंट्रल जेल में रहा हूं. मैं तो कल्पना भी नहीं कर सकता था कि जिला अध्यक्ष बन जाऊंगा और वो भी राजधानी का! जिसका कोई बड़ा राजनीतिक बैकग्राउंड ना हो. मेरे पिताजी तो साधारण सरकारी बाबू थे, लेकिन भाग्य और अपनी मेहनत पर भरोसा था. मैं तो जिलाध्यक्ष बनकर ही संतुष्ट था. मैं तो कल्पना भी नहीं कर सकता था कि इस महान पार्टी का विधानसभा का उम्मीदवार बन सकता हूं.
यह भी मुझे उम्मीद नहीं थी, लेकिन एक साधारण कार्यकर्ता को राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे और अशोक गहलोत ने जो ताकत दी, मुझे हवा महल विधानसभा सीट से चुनाव लड़ावा दिया. पहले तो मेरी जीत की भी घोषणा हो गई थी, लेकिन बाद में मुझे हरवा दिया. मुझे हराने में भी किसका हाथ था? यह सबको पता है किसका हाथ था? लेकिन मैं निराश नहीं हुआ. प्रताप सिंह खाचरियावास ने जब लोकसभा का चुनाव लड़ा था, तो उसके वोट देखो आप. मैंने उनको हवामहल से 3000 वोट से जितवाया लोकसभा में, जबकि मैं 500 वोट से विधानसभा में हारा था. कारगुज़ारी तो मेरे साथ हुई, लेकिन मुझे इस बात का भी खेद नहीं है.
सवाल - आप मोटरसाइकिल पर चलने वाले नेता हो, आपके साथ जो हुआ आप कहते हो कि उससे निराश नहीं हो, लेकिन कांग्रेस कार्यकर्ताओं में चर्चा है कि, बकरे की अम्मा कब तक खैर मनाएगी?
तिवाड़ी- बकरा अमर भी हो सकता है. बकरे की बात मत करो. मैं जीवंत हूं. मैं तो साधारण कार्यकर्ता था, पर्चियां बांटता था. मैंने 1977 के चुनाव में हाथ से लिखकर पर्चियां बांटी हैं. आज तो छपी हुई पर्चियां मिलती हैं. कार्यकर्ता को ज्यादा मेहनत नहीं करनी पड़ती. हमको तो खाली पर्ची देते थे और वोटर लिस्ट थमा देते थे. मैं, मेरी पत्नी और परिवार के अन्य सदस्य नाम लिखकर पर्ची बांटते थे. आज तो सारा काम अलग तरीके से होता है. हम मैन्युअल काम करते थे. मैं वह कार्य करता हूं जो निराश कभी नहीं होंगा. कांग्रेस के लिए मरते दम तक काम करूंगा. जयपुर का कार्यकर्ता मेरे को प्यार करता है और मुझे भरोसा है कि जिला अध्यक्ष मैं ही रहूंगा.