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Rajasthan: झीलों के शहर उदयपुर में खतरनाक हो रही झीलें, सुसाइड और बढ़ते हादसों पर बढ़ी चिंता

Rajasthan News: उदयपुर की झीलों में मई महीने में डूबने से कई मौतें हुई है. वॉलेंटियर्स ने बताया कि सबसे ज्यादा फतहसागर और पिछोला झील में हादसे बढ़े है.

Rajasthan: झीलों के शहर उदयपुर में खतरनाक हो रही झीलें, सुसाइड और बढ़ते हादसों पर बढ़ी चिंता
उदयपुर की झीलों में नहाते हुए बच्चे
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Udaipur Lake Accidents: झीलों के शहर उदयपुर की खूबसूरती यहां के ताल-तलैया और झीलों से ही है. लेकिन पिछले कुछ समय से इन्हीं जलाशयों में लगातार हो रहे हादसों और मौतों ने यहां के सुरक्षा इंतजामों पर सवाल खड़े कर दिए है.  हैरान करने वाली बात यह है कि बीते मई महीने में ही तैरने और सुसाइड के अलग-अलग हादसों में रिकॉर्ड 10 लोगों की जान जा चुकी है.

झीलों में लगातार डूबते इंसानों को लेकर अब शहर के लोगों का गुस्सा और चिंता दोनों बढ़ गए हैं. यही वजह है कि उदयपुरवासियों की बरसों पुरानी मांग एक बार फिर जोर पकड़ने लगी है. स्थानीय लोग प्रशासन से दो टूक मांग कर रहे हैं कि झीलों के घाटों पर सुरक्षा गार्ड तैनात किए जाएं और बिना तैयारी या सुरक्षा के पानी में उतरने वालों पर सख्ती अपनाई जाए.

झीलों का शहर उदयपुर

झीलों का शहर उदयपुर
Photo Credit: NDtv

प्रसिद्ध झीलों में डूबने के सबसे ज्यादा हुई मौतें

शहर की पिछोला, फतहसागर, गोवर्धन सागर, बड़ी तालाब और गंगू कुंड जैसी झीलें और तालाब ही वो जगहें हैं, जहां डूबने के सबसे ज्यादा मौत के हादसे हुए हैं. बड़ी बात यह है कि ये सभी मशहूर पर्यटन स्थल हैं, जहां हर वक्त लोगों की भारी आवाजाही रहती है. सुबह और शाम के समय  बड़ी संख्या में  तैरने वालों की अच्छी-खासी भीड़ जुटती है. हादसों का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पिछले ही हफ्ते फतहसागर झील में एक ऐसा दर्दनाक हादसा हुआ, जिसने सबको हिलाकर रख दिया, यहां बरसों से बच्चों को तैरना सिखाने वाले एक अनुभवी शख्स की खुद झील में डूबने से मौत हो गई.

मई में करीब 10-11 शव निकाल चुके हैं सिविल डिफेंस वॉलेंटियर्स

पदा की स्थिति में तैनात रहने  वाले सिविल डिफेंस के वॉलेंटियर्स ने बेहद चौंकाने वाले आंकड़े सामने रखे. उन्होंने बताया कि इस अकेले महीने में वे उदयपुर के अलग-अलग जलाशयों से करीब 10-11 शव निकाल चुके हैं, जो शायद अपने आप में पहली बार हुआ है. वॉलेंटियर्स का कहना है कि सिविल डिफेंस की टीम तो किसी भी हादसे या आपदा की स्थिति में मदद के लिए हमेशा तैयार रहती है, लेकिन हादसों को तुरंत रोकने के लिए पुख्ता इंतजाम बेहद जरूरी है. इसके लिए उन्होंने सुझाव दिया है कि शहर की झीलों पर तीन अलग-अलग शिफ्टों में कम से कम दो-दो गार्ड्स की तैनाती परमानेंट की जानी चाहिए. जिससे किसी के डूबने की स्थिति सामने आए तो उसपर तुरंत एक्शन लिया जा सके.

 10-11 शव निकाल चुके हैं वॉलेंटियर्स

10-11 शव निकाल चुके हैं वॉलेंटियर्स
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लेक पेट्रोलिंग लॉच होने के बाद रही गायब

ओल्ड सिटी के पूर्व पार्षद गोपाल नागर ने इस गंभीर स्थिति पर चिंता जताते हुए बताया कि कुछ साल पहले नगर निगम ने झीलों में नहाने और कपड़े धोने पर रोक लगाने के लिए 'लेक पेट्रोलिंग' की शुरुआत की थी. शुरुआती दिनों में इसका काफी असर भी दिखा, लेकिन पिछले डेढ़-दो साल से यह टीम पूरी तरह गायब है. नतीजा यह है कि अब स्थानीय लोगों के साथ-साथ बाहर से आने वाले पर्यटक भी बेधड़क झीलों में नहाने उतर जाते हैं, जिससे आए दिन ये हादसे हो रहे हैं. पूर्व पार्षद का साफ कहना है कि मौतों के बढ़ते आंकड़ों को रोकने के लिए नगर निगम या जिला प्रशासन को तुरंत घाटों पर पक्के तौर पर गार्ड्स तैनात करने चाहिए.

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