
Rajasthan News: राजस्थान में अपनी ही सरकार पर सवाल उठाने वाले मंत्री किरोड़ी लाल मीणा (Kirodi Lal Meena) के सुर अब बदले-बदले नजर आ रहे हैं. अलग-अलग मुद्दों पर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलने वाले किरोड़ी लाल मीणा अब कह रहे हैं कि वे पूरी ताकत से कृषि मंत्री के रूप में काम करेंगे. क्या यह हाईकमान का दबाव है या कोई नई सियासी रणनीति? किरोड़ी लाल मीणा के इस यू-टर्न के पीछे की आखिर कहानी क्या है? आइए जानते हैं...
कैबिनेट मंत्री किरोड़ी लाल मीणा ने सरकार बनने के बाद से कई बार अपनी ही सरकार के खिलाफ मोर्चा खोला है. सरकार बनने के बाद से ही वो अलग-अलग मौकों पर अपने ही नेताओं और नीतियों पर सवाल उठाते रहे. फिर जब लोकसभा चुनाव में 11 सीटों पर बीजेपी की हार हुई और उसके बाद उनके भाई को विधानसभा उपचुनाव में दौसा सीट से हार का सामना करना पड़ा, तो मीणा और ज्यादा आक्रामक हो गए. जनवरी में उन्होंने सार्वजनिक रूप से कहा कि दोसा सीट पर उनके भाई को हराने के लिए ‘अभिमन्यु को घेरकर मारने' जैसी साजिश की गई. लेकिन सबसे बड़ा विवाद तब हुआ जब मीणा ने विधानसभा सत्र में अपनी ही सरकार पर फोन टैपिंग के आरोप लगाए. उन्होंने कहा था कि मेरा फोन टैप किया जा रहा है, सीआईडी मेरे पीछे लगी है. मैंने भ्रष्टाचार के कुछ मामले उठाए थे, 50 फर्जी थानेदारों को हटवाया था. इसके बाद मेरे खिलाफ ही साजिश रची जा रही है.
'मुझे हाईकमान से निर्देश मिला है...'
मीणा के इस बयान के बाद पार्टी को उनका रवैया पसंद नहीं आया. भाजपा नेतृत्व ने इसे अनुशासनहीनता माना और उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया. हालांकि, मीणा ने खुद को अनुशासित सिपाही बताते हुए नोटिस का जवाब दे दिया, लेकिन उनकी बयानबाजी जारी रही. 30 मार्च को सवाई माधोपुर में उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव हराने की पूरी साजिश हुई थी. उन्होंने पर्ची सरकार का मुद्दा भी उठाया. लेकिन अब जब वो कोटा पहुंचे, तो उनके बयान में अचानक बदलाव दिखा. कोटा में मीडिया के सवालों पर उन्होंने कहा कि अब पुरानी बातें मत कुरेदो, वो बीत गईं. मुझे हाईकमान से निर्देश मिला है कि काम करो, और मैं अब पूरी ताकत से कृषि मंत्री के रूप में काम करूंगा.
सियासी भविष्य संकट में लगने लगा!
लेकिन सवाल उठता है कि आखिर ऐसा क्या हुआ जो मीणा ने यू-टर्न ले लिया? सियासी जानकारों के मुताबिक, इसके पीछे कई वजहें हो सकती हैं. कहा जा रहा है कि भाजपा का अनुशासन किसी भी मंत्री को बगावती तेवर अपनाने की इजाजत नहीं देता. मीणा को साफ संकेत दिया गया कि अगर वे इसी राह पर चलते रहे, तो उनका मंत्री पद भी खतरे में पड़ सकता है. खबरें हैं कि हाल ही में उनके कुछ बयानों को लेकर पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने उनसे सख्ती से बात की और स्पष्ट कर दिया कि उनके बयानों से सरकार की छवि खराब हो रही है. मीणा को दो टूक कह दिया गया कि या तो वे बयानबाजी बंद करें या फिर अपने भविष्य की चिंता करें. यही कारण है कि मीणा को अपना सियासी भविष्य भी संकट में लगने लगा है. वे खुद कह चुके हैं कि जब-जब सवाई माधोपुर से जीते, तभी मंत्री बने. अगर वे पार्टी नेतृत्व से टकराव जारी रखते, तो उनकी कुर्सी भी खतरे में पड़ सकती थी. कहा ये भी जा रहा है कि किरोड़ी लाल मीणा का यह कदम पूरी तरह से एक रणनीतिक बदलाव है. उन्होंने महसूस किया कि अगर वे सरकार के खिलाफ खुलकर खड़े रहेंगे, तो पार्टी में उनकी स्थिति कमजोर हो सकती है. इसलिए उन्होंने बैकफुट लिया और अब सरकार के साथ खड़े नजर आ रहे हैं.
सरकार के साथ कितने दिन टिके रहेंगे मीणा?
अब बड़ा सवाल ये है कि क्या मीणा पूरी तरह पार्टी लाइन पर आ गए हैं, या फिर यह महज एक अस्थायी रणनीति है? क्या वे अगले चुनाव तक सरकार के साथ रहेंगे, या फिर किसी और मौके पर फिर से बागी तेवर अपनाएंगे? मीणा का यह यू-टर्न बताता है कि राजनीति में कुछ भी स्थायी नहीं होता. भाजपा में अनुशासन सर्वोपरि है और हाईकमान के इशारे के बिना कोई नेता लंबे समय तक पार्टी से अलग रुख नहीं अपना सकता. आने वाले महीनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि मीणा सरकार के साथ कितने दिनों तक टिके रहते हैं.