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Rajasthan: मुकाम में फाल्गुनी मेला शुरू, गुरु जम्भेश्वर के जयकारों से गूंजा धाम, जानें साल में दो बार क्यों लगता है यह मेला

बीकानेर जिले के नोखा में बिश्नोई समाज के मुख्य तीर्थ स्थल मुकाम में आज लगने वाले फाल्गुनी मेले के अवसर पर श्रद्धा और भक्ति का अनूठा संगम देखने को मिल रहा है.

Rajasthan: मुकाम में फाल्गुनी मेला शुरू, गुरु जम्भेश्वर के जयकारों से गूंजा धाम, जानें साल में दो बार क्यों लगता है यह मेला
बिश्नोई समाज का मेला

Mukam Mela 2026: राजस्थान के बीकानेर जिले के नोखा में बिश्नोई समाज के मुख्य तीर्थ स्थल मुकाम में आज लगने वाले फाल्गुनी मेले के अवसर पर श्रद्धा और भक्ति का अनूठा संगम देखने को मिल रहा है. पर्यावरण संरक्षण के प्रणेता गुरु जम्भेश्वर भगवान के समाधि स्थल पर आयोजित इस मेले में देश के कोने-कोने से हजारों श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा है.

साल में दो बार लगता है ये मेला

मुकाम धाम बिश्नोई समाज का सबसे बड़ा तीर्थ स्थल है. यहां गुरु जम्भेश्वर भगवान का समाधि स्थल)है। पर्यावरण को समर्पित विश्नोई समाज का ये मेला साल में दो बार आश्विन और फाल्गुन मास होता है. जो समाज की एकता और पर्यावरण के प्रति उनकी अटूट आस्था का प्रतीक है.

गुरु जम्भेश्वर की समाधि के आगे टेका मत्था

मेले के दौरान पूरा मुकाम क्षेत्र 'जम्भोजी' के जयकारों से गुंजायमान रहा. श्रद्धालुओं ने कतारबद्ध होकर गुरु जम्भेश्वर की समाधि के आगे मत्था टेका और सुख-समृद्धि की कामना की. बिश्नोई समाज के 29 नियमों का पालन करते हुए, पर्यावरण की शुद्धि के लिए विशाल हवन कुंड में घी और खोपरे की पवित्र आहुतियां दी गईं.

मुकाम धाम का इतिहास और महत्व

बिश्नोई समाज के शिव राज विश्नोई ने मेले के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि गुरु जम्भेश्वर भगवान ने समराथल धोरे पर निर्वाण प्राप्त किया था. इसी पावन स्थल को बाद में 'मुकाम' के नाम से जाना गया. मुकाम का शाब्दिक अर्थ है- पड़ाव या विश्राम स्थल, जहां गुरु महाराज ने अपनी मानवरूपी देह का त्याग किया था.

वर्ष में दो बार मेले का रोचक कारण

मुकाम धाम में साल में दो बार (आश्विन और फाल्गुन मास में) मेला भरने के पीछे एक गहरी परंपरा छिपी है. गुरु महाराज के निर्वाण के बाद संतों और विद्वानों ने यह तय किया था कि हर छह महीने में समाज के लोग यहां एकत्रित होंगे और धर्म, पर्यावरण और सामाजिक सरोकारों पर संवाद करेंगे. यही संवाद आगे चलकर एक विशाल मेले के रूप में तब्दील हो गया, जो आज बिश्नोई समाज की एकता का प्रतीक है.

प्रशासन और व्यवस्थाएं चाक-चौबंद

श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन और मंदिर कमेटी पूरी तरह अलर्ट मोड पर है. मंदिर परिसर और आसपास भारी पुलिस जाब्ता तैनात किया गया है. स्वयंसेवकों द्वारा जगह-जगह पेयजल, नि:शुल्क चिकित्सा शिविर और भंडारों की व्यवस्था की गई है. साथ ही भीड़ को नियंत्रित करने के लिए खास बैरिकेडिंग और सीसीटीवी कैमरों से निगरानी रखी जा रही है.

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